31 साल पुराने हत्या केस में यूट्यूबर सलीम वास्तिक गिरफ्तार, 25 साल से था फरार
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली पुलिस ने यूट्यूबर सलीम वास्तिक को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
- 20 जनवरी 1995 को दिल्ली के 13 वर्षीय संदीप बंसल का अपहरण कर हत्या की गई थी।
- 1997 में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन 2000 में जमानत मिलने के बाद सलीम फरार हो गया।
- सलीम 25 वर्षों तक शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद में छिपकर रहा।
- 27 फरवरी को दो भाइयों ने उस पर 14 चाकू के वार किए थे, वे भाई बाद में एनकाउंटर में मारे गए।
- सलीम इस्लाम धर्म त्याग चुका है और यूट्यूब पर सक्रिय रहता था।
नई दिल्ली: गाजियाबाद के चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक को दिल्ली पुलिस ने 31 साल पुराने हत्या और अपहरण के मामले में शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे गाजियाबाद से ही पकड़ा, जहां वह अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था। फिलहाल पुलिस उसे थाने ले जाकर गहन पूछताछ कर रही है।
कौन है सलीम वास्तिक और क्या है मामला?
सलीम वास्तिक का असली नाम सलीम खान पुत्र नूरहसन है। वह मूल रूप से शामली जिले के नानूपुरा का रहने वाला है। दिल्ली के गोकलपुरी थाने में उसके खिलाफ अपहरण, रंगदारी और हत्या का गंभीर मुकदमा दर्ज है।
20 जनवरी 1995 को सलीम ने दिल्ली के 13 वर्षीय बालक संदीप बंसल का अपहरण किया था। इसके बाद उसने परिजनों से फिरौती मांगी और फिर उस मासूम बच्चे की निर्मम हत्या कर दी। यह मामला उस समय पूरी दिल्ली में चर्चा का विषय बना था।
सजा के बाद जमानत और फरारी का सिलसिला
दिल्ली पुलिस ने सलीम को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और 1997 में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, वर्ष 2000 में उसे जमानत मिल गई और जेल से बाहर आते ही वह फरार हो गया।
अगले 25 वर्षों तक सलीम शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद में अपनी पहचान बदलकर छिपता रहा। दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद वह पकड़ में नहीं आया। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
दो महीने पहले हुआ था जानलेवा हमला
सलीम वास्तिक हाल ही में उस समय सुर्खियों में आया जब 27 फरवरी की सुबह दो सगे भाइयों ने उसके घर में घुसकर उस पर 14 चाकू के वार किए। करीब एक महीने के इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
इस हमले में आरोपी दोनों भाई बाद में पुलिस एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। एक अन्य घटना में बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आए नकाबपोश हमलावरों ने दिनदहाड़े उसके दफ्तर में घुसकर उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला किया था और उसका गला रेतने की कोशिश की थी। चीख-पुकार मचने पर हमलावर उसे अधमरा छोड़कर भाग गए थे।
इस्लाम छोड़ने के बाद विवादों में रहा यूट्यूबर
इस्लाम धर्म त्याग चुके सलीम वास्तिक एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं और अपने धार्मिक बयानों को लेकर लगातार विवादों में रहे हैं। उनकी गतिविधियों को लेकर कई बार तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई। अब उनकी गिरफ्तारी के साथ 31 साल पुराने इस जघन्य अपराध का कानूनी अंजाम निकट आता दिख रहा है।
पुलिस की विफलता और न्याय व्यवस्था पर सवाल
यह मामला इस लिहाज से भी उल्लेखनीय है कि एक दोषी व्यक्ति जिसे अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, वह ढाई दशक तक न केवल फरार रहा बल्कि सोशल मीडिया पर सक्रिय भी रहा। यह पुलिस की निगरानी प्रणाली और जमानत के बाद भगोड़ों की ट्रैकिंग में गंभीर खामियों को उजागर करता है।
गौरतलब है कि भारत में ऐसे सैकड़ों मामले हैं जहां जमानत पर रिहा होने के बाद दोषी या आरोपी फरार हो जाते हैं और वर्षों तक पकड़ में नहीं आते। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार भगोड़े अपराधियों की संख्या हर साल बढ़ रही है।
अब देखना यह होगा कि दिल्ली की अदालत इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या सलीम को दोबारा जमानत मिल पाएगी या नहीं। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जवाबदेही दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा है।