क्या 95 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी अपनी स्किल्स पर भरोसा करते हैं, लेकिन केवल 64 प्रतिशत नौकरी से संतुष्ट हैं?
सारांश
Key Takeaways
- 95 प्रतिशत कर्मचारी अपनी स्किल्स पर विश्वास करते हैं।
- केवल 64 प्रतिशत कर्मचारी नौकरी से संतुष्ट हैं।
- 53 प्रतिशत कर्मचारी तनाव महसूस करते हैं।
- 75 प्रतिशत कर्मचारी काम के बोझ से प्रभावित हैं।
- आईटी क्षेत्र में नौकरी खोजने का आत्मविश्वास सबसे अधिक है।
नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में 95 प्रतिशत कर्मचारी अपनी कार्य क्षमता और स्किल्स पर विश्वास करते हैं, लेकिन इनमें से महज 64 प्रतिशत लोग अपनी नौकरी से संतुष्ट हैं। यह जानकारी मैनपावरग्रुप इंडिया की रिपोर्ट में सामने आई है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर के 1,000 से अधिक कर्मचारियों के साथ बातचीत की गई। इसमें यह भी बताया गया है कि कार्य क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहा है और इसके बीच कर्मचारियों का आत्मविश्वास, संतोष और मानसिक स्वास्थ्य अलग-अलग स्तरों पर दिख रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कर्मचारी अपनी स्किल्स को लेकर सबसे अधिक आत्मविश्वास दिखाते हैं। लगभग 95 प्रतिशत ने कहा कि वे अपने कार्य को अच्छे से कर सकते हैं। 90 प्रतिशत कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं, और 84 प्रतिशत को प्रमोशन की संभावना दिखती है। 90 प्रतिशत कर्मचारी एआई के उपयोग में भी आत्मविश्वास महसूस करते हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी दिखाई देता है कि आज के कार्य में लोग जितने आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं, उतनी ही वे भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आत्मविश्वास का सीधा संबंध नौकरी से संतोष और कंपनी के प्रति वफादारी से नहीं दिखता। इसी कारण से केवल 64 प्रतिशत कर्मचारी ही अपनी नौकरी से खुश हैं। इसके अतिरिक्त, 53 प्रतिशत कर्मचारी रोजाना तनाव का अनुभव करते हैं।
मैनपावरग्रुप इंडिया के मिडिल ईस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुलाटी ने कहा कि जब नौकरी से संतोष का स्तर 64 प्रतिशत है, तब आधे से अधिक कर्मचारी रोज तनाव में रहते हैं।
उन्होंने बताया कि 75 प्रतिशत कर्मचारियों पर काम का बोझ और लंबे घंटों का तनाव बना रहता है। कई कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन नए अवसर भी खोज रहे हैं।
रिपोर्ट में विभिन्न वर्गों की स्थिति भी बताई गई है। ब्लू-कॉलर कर्मचारियों में मानसिक और शारीरिक संतुलन सबसे कम था, जो 68 प्रतिशत रहा। वहीं, जेनजी की महिलाओं में तनाव की स्थिति सबसे अधिक 64 प्रतिशत पाई गई।
दूसरी ओर, मिडिल मैनेजर्स (95 प्रतिशत) और व्हाइट-कॉलर व सीनियर मैनेजर्स (94 प्रतिशत) अपने कार्य में सबसे अधिक मतलब और उद्देश्य महसूस करते हैं, लेकिन यही वर्ग सबसे अधिक तनाव में भी है।
विशेष रूप से, एनर्जी और यूटिलिटी क्षेत्र में कर्मचारियों की स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां 72 प्रतिशत वेल-बीइंग दर्ज किया गया। हेल्थकेयर (52 प्रतिशत) और फाइनेंस व रियल एस्टेट (50 प्रतिशत) क्षेत्र में नौकरी की सुरक्षा की भावना सबसे कम थी।
जहां तक नौकरी खोजने का आत्मविश्वास का सवाल है, आईटी क्षेत्र (86 प्रतिशत) और इंडस्ट्रियल व मटेरियल क्षेत्र (85 प्रतिशत) में यह सबसे अधिक देखा गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तकनीक के प्रति आत्मविश्वास में गिरावट सबसे अधिक बेबी बूमर्स और जेन एक्स उम्र के कर्मचारियों में देखी गई है।
संदीप गुलाटी ने कहा कि इस रिपोर्ट से स्पष्ट संदेश मिलता है कि केवल आत्मविश्वास से कर्मचारियों को लंबे समय तक नहीं जोड़ा जा सकता। जो कंपनियां करियर के स्पष्ट रास्ते, अच्छे प्रबंधक, और कर्मचारियों की भलाई पर ध्यान देंगी, वही प्रतिभा को बनाए रख पाएंगी और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी।