बच्चों का आधार बायोमेट्रिक अपडेट 30 सितंबर तक मुफ्त: यूआईडीएआई की अभिभावकों को चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 22 अगस्त 2026 को अभिभावकों और संरक्षकों को स्पष्ट रूप से सचेत किया है कि 5 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) 30 सितंबर 2026 तक निशुल्क उपलब्ध है। इस समयसीमा के बाद शुल्क लागू हो सकता है, हालाँकि प्राधिकरण ने अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
क्यों जरूरी है बायोमेट्रिक अपडेट
यूआईडीएआई के नियमों के अनुसार, जब किसी बच्चे का आधार पाँच वर्ष की आयु से पहले बनता है, तब उसमें केवल व्यक्तिगत जानकारी और फोटो दर्ज की जाती है। कम उम्र में बायोमेट्रिक पहचान — यानी फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन — लगातार विकसित होती रहती है, इसलिए उस समय इन्हें दर्ज नहीं किया जाता।
इसी कारण बच्चे के 5 वर्ष का होने पर पहला अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट और 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर दूसरा अपडेट आवश्यक होता है, ताकि आधार रिकॉर्ड अद्यतन और सटीक बना रहे।
किन कामों में आता है आधार
आधार आज भारत में पहचान सत्यापन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। छात्रों के लिए इसका उपयोग स्कूल में प्रवेश, बोर्ड परीक्षाओं, छात्रवृत्ति आवेदन, सरकारी सहायता कार्यक्रमों और विभिन्न शैक्षणिक प्रक्रियाओं में होता है। समय पर बायोमेट्रिक अपडेट नहीं होने की स्थिति में भविष्य में पहचान सत्यापन से जुड़ी गंभीर परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
अभियान की प्रगति
यूआईडीएआई ने सितंबर 2025 में बच्चों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया था। प्राधिकरण के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक देशभर में लगभग 2 करोड़ बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट पूरे किए जा चुके हैं। यह अभियान 1.56 लाख से अधिक स्कूलों तक पहुँच चुका है।
गौरतलब है कि 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट शुल्क में पहले भी छूट दी गई थी, जिसे वर्तमान में 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
यूआईडीएआई की अपील
प्राधिकरण ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए अभिभावकों से अपील की है कि वे अंतिम दिनों की भीड़ से बचते हुए जल्द से जल्द नज़दीकी आधार केंद्र पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कराएँ। 30 सितंबर 2026 के बाद शुल्क माफी जारी रहेगी या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है, इसलिए समय रहते कदम उठाना ही समझदारी है।