क्या है क्रिप्टोकरेंसी और यह कैसे कार्य करती है? भारत में इसके नियम क्या हैं?
सारांश
Key Takeaways
- क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल मुद्रा है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित नहीं होती।
- यह ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है, जो लेन-देन को सुरक्षित रखती है।
- भारत में इसे कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है।
- इसमें निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
- साइबर धोखाधड़ी का खतरा भी मौजूद है।
मुंबई, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान डिजिटल युग में निवेश के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें से एक है 'क्रिप्टोकरेंसी'। पिछले कुछ वर्षों में बिटकॉइन और एथेरियम जैसी डिजिटल मुद्राएं निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। कुछ लोग इसे भविष्य की मुद्रा मानते हैं, जबकि कई निवेशक इसके जोखिम को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि लोगों के मन में यह सवाल उठे कि क्रिप्टोकरेंसी क्या है, यह कैसे कार्य करती है और भारत में इसके लिए क्या नियम हैं।
दरअसल, क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल या वर्चुअल मुद्रा है, जिसे न कोई देश जारी करता है और न ही किसी केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह पूरी तरह से कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट पर निर्भर होती है। बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल जैसे क्रिप्टोकरेंसी इसके प्रमुख उदाहरण हैं। क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल वॉलेट में सुरक्षित रखा जाता है और इसका लेन-देन ऑनलाइन किया जाता है।
क्रिप्टोकरेंसी जिस तकनीक पर कार्य करती है, उसे 'ब्लॉकचेन' कहते हैं। ब्लॉकचेन एक डिजिटल खाता-बही की तरह होती है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से दर्ज होता है। एक बार जो जानकारी इसमें जुड़ जाती है, उसे बदलना लगभग असंभव होता है। यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी को सुरक्षित माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति क्रिप्टोकरेंसी खरीदता या बेचता है, तो यह लेन-देन सीधे दो व्यक्तियों के बीच होता है। इसमें किसी बैंक या बिचौलिए की आवश्यकता नहीं होती। लेन-देन की पुष्टि करने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क पर कई सिस्टम मिलकर काम करते हैं, जिसे माइनिंग या सत्यापन प्रक्रिया कहा जाता है।
भारत में क्रिप्टोकरेंसी के संबंध में कानून की बात करें, तो इसे अभी तक कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है। हालांकि, सरकार ने इसे अवैध भी नहीं कहा है। लोग मान्यता प्राप्त डिजिटल एक्सचेंजों के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर सकते हैं, लेकिन इसे जोखिम भरा निवेश माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। किसी भी समय इसमें तेज गिरावट या जबरदस्त उछाल देखा जा सकता है। इसके अलावा, वैश्विक नियमों में बदलाव, तकनीकी जोखिम और साइबर धोखाधड़ी जैसी समस्याएं भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनती हैं। इसलिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने से पहले इसकी तकनीक, जोखिम और कर नियमों को समझना अत्यंत आवश्यक है।