बिजली मंत्रालय का बड़ा आदेश: कैप्टिव कोयला संयंत्रों को पूर्ण क्षमता पर चलाने का निर्देश, 1 अक्टूबर से लागू
सारांश
मुख्य बातें
बिजली मंत्रालय ने 27 सितंबर 2026 को बिजली अधिनियम की धारा 11 का उपयोग करते हुए 50 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले सभी कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध अधिकतम क्षमता पर बिजली उत्पादन करने का आदेश दिया है। यह निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा और इसका उद्देश्य साल की अंतिम तिमाही में बढ़ती बिजली माँग को पूरा करना है।
आदेश की पृष्ठभूमि
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मौजूदा माँग-आपूर्ति की स्थिति और बिजली की खपत में संभावित बढ़ोतरी के मद्देनज़र लिया गया है। बिजली अधिनियम की धारा 11 सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप अपने संयंत्र संचालित करने का अधिकार देती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में बिजली की कुल उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए उत्पादन के सभी स्रोतों का अधिकतम उपयोग आवश्यक माना जा रहा है।
मुख्य प्रावधान और शर्तें
आदेश के अनुसार, पात्र बिजली उत्पादकों को अपनी कैप्टिव जरूरतें पूरी करने के बाद शेष बची बिजली को लागू बाज़ार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बेचने की पेशकश करनी होगी। इससे बाज़ार में बिजली की उपलब्धता बढ़ने और पीक डिमांड को पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो और अधिकतम उत्पादन जारी रह सके।
निगरानी व्यवस्था
मंत्रालय ने सभी पात्र बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंजों और अन्य स्वीकृत माध्यमों से बिजली की बिक्री, उपलब्ध उत्पादन क्षमता तथा कोयला भंडार स्तर की विस्तृत जानकारी शामिल होगी। यह पारदर्शी निगरानी तंत्र क्रियान्वयन की प्रभावशीलता को परखने में सहायक होगा।
आम उपभोक्ताओं पर असर
गौरतलब है कि साल की चौथी तिमाही में औद्योगिक और घरेलू बिजली माँग में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। अतिरिक्त कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता को राष्ट्रीय ग्रिड में शामिल करने से देशभर के उपभोक्ताओं के लिए बिजली की उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है। मंत्रालय को उम्मीद है कि इस कदम से Q4 2026 में बढ़ती माँग को पूरा करने में महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।
आगे की दिशा
यह आदेश 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा अपेक्षित है। धारा 11 के अंतर्गत इस प्रकार के आदेशों का उपयोग सरकार पहले भी गर्मियों के पीक सीजन में कर चुकी है, और अब इसे वर्ष की अंतिम तिमाही के लिए भी लागू किया गया है — जो ऊर्जा सुरक्षा के प्रति नीति-निर्माताओं के बढ़ते सतर्क रवैये का संकेत है।