13 अक्टूबर 2026
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कोयला आधारित बिजली क्षमता 105–150 GW तक बढ़ाने की ज़रूरत: CEA चेयरमैन घनश्याम प्रसाद

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कोयला आधारित बिजली क्षमता 105–150 GW तक बढ़ाने की ज़रूरत: CEA चेयरमैन घनश्याम प्रसाद

सारांश

भारत की बिजली माँग पूर्वानुमान से कहीं तेज़ रफ्तार से बढ़ रही है — CEA प्रमुख घनश्याम प्रसाद ने खुलकर माना कि पुराने अनुमान काफी नहीं हैं और 105 से 150 GW अतिरिक्त कोयला क्षमता की ज़रूरत होगी। यह स्वीकारोक्ति स्वच्छ ऊर्जा की प्रतिबद्धताओं और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है।

मुख्य बातें

CEA चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत को 105 से 150 गीगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता की आवश्यकता हो सकती है।
सरकार का पिछला अनुमान था कि 2035 तक 97 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल कोयला क्षमता 307 गीगावाट तक पहुँचती — यह अनुमान अब अपर्याप्त माना जा रहा है।
इस वर्ष दैनिक पीक बिजली माँग पिछले वर्ष की तुलना में 45–50 गीगावाट अधिक दर्ज की गई।
कम मानसून वर्षा के चलते पनबिजली उत्पादन घटा, जिससे थर्मल पावर पर निर्भरता बढ़ी।
सितंबर 2026 में बिजली की कमी 560 मिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुँची — अगस्त 2023 के बाद सर्वाधिक।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत को अपनी तेज़ी से बढ़ती बिजली माँग को पूरा करने के लिए पहले के अनुमानों से कहीं अधिक कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता विकसित करनी होगी। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रसाद ने स्पष्ट किया कि रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ-साथ थर्मल पावर से भी पीछे नहीं हटा जा सकता।

मुख्य घटनाक्रम

प्रसाद के अनुसार, मौजूदा विस्तार योजनाओं के अतिरिक्त 105 गीगावाट से 150 गीगावाट तक अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता की आवश्यकता पड़ सकती है। सरकार ने पिछले वर्ष अनुमान लगाया था कि 2035 तक देश की कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में 97 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल स्थापित क्षमता लगभग 307 गीगावाट हो जाएगी। परंतु बिजली खपत में उम्मीद से अधिक तेज़ वृद्धि के कारण यह अनुमान अब पर्याप्त नहीं रहा।

माँग में अप्रत्याशित उछाल

प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष बिजली की दैनिक पीक डिमांड पिछले वर्ष की तुलना में 45 से 50 गीगावाट अधिक रही है — एक आँकड़ा जो नीति-निर्माताओं के लिए चेतावनी की घंटी है। उन्होंने कहा, 'मांग बढ़ रही है और जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, हमें उस मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के स्थिर स्रोतों की जरूरत है।' यह बयान साफ संकेत देता है कि ऊर्जा परिवर्तन की राह उतनी सीधी नहीं है जितनी पहले मानी जाती थी।

पनबिजली में कमी, थर्मल पर बढ़ा दबाव

इस वर्ष मानसून में कम वर्षा के चलते पनबिजली उत्पादन में गिरावट आई, जिससे आपूर्ति की कमी पूरी करने के लिए थर्मल पावर संयंत्रों पर निर्भरता और बढ़ गई। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे हो गई — जो अगस्त 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह विडंबनापूर्ण है कि यह कमी तब दर्ज की गई जब कोयला आधारित संयंत्र पहले से ही अधिकतम क्षमता पर चल रहे थे।

स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के साथ संतुलन की चुनौती

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिबद्धता जता चुका है। गौरतलब है कि एक ओर भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक विकास और औद्योगीकरण से उपजी माँग उसे कोयले पर निर्भरता बनाए रखने पर मजबूर कर रही है। CEA प्रमुख का यह बयान इसी तनाव को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है।

आगे की राह

नीति-निर्माताओं को अब विस्तारित कोयला क्षमता योजनाओं पर पुनर्विचार करना होगा और साथ ही ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्पों की गति तेज़ करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रिन्यूएबल एनर्जी में बड़े पैमाने पर स्टोरेज समाधान उपलब्ध नहीं होते, तब तक कोयला भारत की बेसलोड बिजली आपूर्ति की रीढ़ बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक बना रहेगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CEA चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने कोयला क्षमता को लेकर क्या कहा?
घनश्याम प्रसाद ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत को मौजूदा विस्तार योजनाओं के अलावा 105 से 150 गीगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित बिजली क्षमता की आवश्यकता हो सकती है। यह बयान उन्होंने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में दिया।
भारत में बिजली की माँग इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही है?
इस वर्ष दैनिक पीक बिजली माँग पिछले वर्ष की तुलना में 45 से 50 गीगावाट अधिक रही है, जो अनुमानों से कहीं ज़्यादा है। इसके साथ ही कम मानसून वर्षा के चलते पनबिजली उत्पादन में गिरावट ने थर्मल पावर संयंत्रों पर दबाव और बढ़ा दिया है।
सितंबर 2026 में बिजली की कमी कितनी रही?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में बिजली की कमी 560 मिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुँच गई, जो अगस्त 2023 के बाद का सर्वाधिक स्तर है। यह उस समय हुआ जब कोयला संयंत्र पहले से ही उच्च उत्पादन पर चल रहे थे।
2035 तक भारत की कोयला आधारित बिजली क्षमता कितनी होगी?
सरकार के पिछले अनुमान के अनुसार 2035 तक कोयला क्षमता में 97 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी जिससे कुल क्षमता लगभग 307 गीगावाट हो जाएगी। परंतु CEA प्रमुख के अनुसार माँग की रफ्तार को देखते हुए इससे भी अधिक क्षमता की ज़रूरत पड़ सकती है।
क्या कोयला क्षमता बढ़ाना भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के विरुद्ध है?
यह सवाल भारत की ऊर्जा नीति के केंद्र में है — देश 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है, लेकिन आर्थिक विकास और औद्योगीकरण से उत्पन्न माँग उसे निकट भविष्य में कोयले पर निर्भर रखती है। CEA प्रमुख के अनुसार जब तक बेसलोड आपूर्ति के वैकल्पिक स्थिर स्रोत विकसित नहीं होते, कोयले को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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