30 जून 2026
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भारत की ऊर्जा माँग 25 वर्षों में तीन गुना होगी, अमेरिकी निवेशकों की नज़र भारत पर

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भारत की ऊर्जा माँग 25 वर्षों में तीन गुना होगी, अमेरिकी निवेशकों की नज़र भारत पर

सारांश

वाशिंगटन में यूएसआईएसपीएफ शिखर सम्मेलन में उद्योग नेताओं ने स्पष्ट किया — भारत की ऊर्जा माँग अगले 25 वर्षों में तीन गुना होगी, बिजली क्षमता 500 से 2,100 गीगावाट तक जानी है, और अमेरिकी कोयला निर्यात में भारत पहले से 23% हिस्सेदार है। यह अमेरिकी निवेशकों के लिए दशकों का सबसे बड़ा दीर्घकालिक अवसर बताया जा रहा है।

मुख्य बातें

औद्योगिक नेताओं के अनुसार, भारत की ऊर्जा माँग अगले 25 वर्षों में तीन गुना बढ़ेगी, जबकि वैश्विक औसत वृद्धि केवल 12–15% रहने का अनुमान है।
प्रसन्ना जोशी के अनुसार भारत की जीडीपी अगले 25 वर्षों में 7–8 गुना बढ़कर $25–30 ट्रिलियन हो सकती है।
भारत की स्थापित बिजली क्षमता वर्तमान 500 गीगावाट से बढ़ाकर 2047 तक 2,100 गीगावाट करने का लक्ष्य है; सौर-पवन को 100 से 1,800 गीगावाट तक ले जाना होगा।
भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 2047 तक 12–15% करने का लक्ष्य है।
अर्नी थ्रैशर के अनुसार भारत अमेरिकी कोयला निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य है — 23% हिस्सेदारी के साथ; निर्यात 2005 में 10 लाख टन से बढ़कर पिछले वर्ष 2 करोड़ 15 लाख टन हो गया।
दोनों नेताओं ने वाशिंगटन में नौवें यूएसआईएसपीएफ नेतृत्व शिखर सम्मेलन में दीर्घकालिक, बहु-स्रोत ऊर्जा निवेश की ज़रूरत पर बल दिया।

वाशिंगटन में आयोजित नौवें यूएसआईएसपीएफ नेतृत्व शिखर सम्मेलन में उद्योग जगत के शीर्ष नेताओं ने 30 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारत की तेज़ी से विस्तार होती अर्थव्यवस्था को अगले 25 वर्षों में ऊर्जा माँग को तीन गुना तक बढ़ाना होगा, जिससे यह अमेरिकी निवेश, तकनीकी साझेदारी और ऊर्जा सहयोग के लिए दुनिया के सबसे बड़े अवसरों में से एक बन गया है। ऊर्जा सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित इस पैनल चर्चा में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राजनयिक और व्यापारिक नेता एक मंच पर आए।

भारत की ऊर्जा माँग और विकास का अनुमान

एक्सॉनमोबिल के आर्थिक एवं ऊर्जा निदेशक डॉ. प्रसन्ना जोशी ने पैनल में कहा, 'हमारा अनुमान है कि अगले 25 सालों में वैश्विक जीडीपी असल में दोगुनी हो जाएगी, जबकि भारत की जीडीपी लगभग सात से आठ गुना बढ़कर 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। अगले 25 सालों में वैश्विक ऊर्जा माँग सिर्फ 12 से 15 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है, जबकि भारत के लिए यह संख्या तीन गुना है।' उन्होंने कहा कि इस बड़े विकास लक्ष्य के लिए पूरी ऊर्जा वैल्यू चेन में भारी निवेश अनिवार्य होगा।

डॉ. जोशी ने बताया कि भारत की मौजूदा स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 500 गीगावाट है, और देश का दीर्घकालिक लक्ष्य इसे 2047 तक लगभग 2,100 गीगावाट तक पहुँचाना है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अकेले सौर और पवन ऊर्जा को 100 गीगावाट से बढ़ाकर 1,800 गीगावाट तक ले जाने का अनुमान है।

पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की भूमिका

डॉ. जोशी ने पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत के केवल 10 फीसदी ऊर्जा स्रोतों की ही अब तक खोज हो पाई है और अधिक अन्वेषण से देश की ऊर्जा सुरक्षा और मज़बूत होगी। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी केवल 6 फीसदी है, जिसे नए इंफ्रास्ट्रक्चर, अन्वेषण और दीर्घकालिक निवेश के ज़रिये 2047 तक 12 से 15 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

अमेरिकी कोयला निर्यात में भारत अग्रणी

एक्सकोल एनर्जी एंड रिसोर्सेज के अध्यक्ष एवं सीईओ अर्नी थ्रैशर ने बताया कि भारत अमेरिकी कोयला निर्यात का सबसे बड़ा विदेशी बाज़ार बन चुका है। उन्होंने कहा, 'एक गंतव्य के रूप में भारत अमेरिकी निर्यात कोयले का सबसे बड़ा उपभोक्ता है — अभी यह कुल अमेरिकी कोयला निर्यात का लगभग 23 फीसदी है।' थ्रैशर के अनुसार, यह निर्यात 2005 में मात्र 10 लाख टन था, जो पिछले वर्ष बढ़कर 2 करोड़ 15 लाख टन हो गया।

थ्रैशर ने स्पष्ट किया कि कोई भी एकल ऊर्जा स्रोत भारत की बढ़ती माँग को पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने भूमिगत खनन, कोल गैसीफिकेशन, बैटरी स्टोरेज और अन्य ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापक संभावनाओं की ओर भी इशारा किया।

सहयोग और दीर्घकालिक निवेश की ज़रूरत

डॉ. जोशी ने ज़ोर दिया कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए सरकारों, व्यवसायों और तकनीकी प्रदाताओं के बीच समन्वित सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'यह कोई एक कंपनी नहीं कर सकती। आपको पूरी वैल्यू चेन में मिलकर काम करना होगा। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका घरेलू बाज़ार है।' थ्रैशर ने भी निवेशकों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने और लागत को भारतीय अर्थव्यवस्था की क्षमता के अनुरूप रखने की सलाह दी।

शिखर सम्मेलन का संदर्भ

यह चर्चा वाशिंगटन में आयोजित अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के नौवें नेतृत्व शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। इस सम्मेलन में व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर विचार-विमर्श के लिए दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एकत्रित हुए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रही है और भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी उत्पत्ति पर ध्यान देना ज़रूरी है — एक्सॉनमोबिल और कोयला उद्योग के प्रतिनिधि स्वाभाविक रूप से उन्हीं क्षेत्रों में निवेश के पक्ष में बोलेंगे जिनमें उनका व्यावसायिक हित है। भारत की 2,100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य वास्तविक है, परंतु इसके लिए नवीकरणीय और पारंपरिक ऊर्जा के बीच संतुलन को लेकर नीतिगत स्पष्टता अभी भी अधूरी है। प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6% से 15% करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, जबकि घरेलू अन्वेषण दशकों से अपेक्षाओं से पीछे रहा है। असली सवाल यह है कि क्या अमेरिकी निवेश भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा, या दीर्घकालिक आयात-निर्भरता का एक नया अध्याय लिखेगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की ऊर्जा माँग अगले 25 वर्षों में कितनी बढ़ेगी?
औद्योगिक नेताओं के अनुसार, भारत की ऊर्जा माँग अगले 25 वर्षों में तीन गुना बढ़ेगी, जबकि वैश्विक औसत वृद्धि केवल 12–15% रहने का अनुमान है। यह अनुमान एक्सॉनमोबिल के डॉ. प्रसन्ना जोशी ने वाशिंगटन में यूएसआईएसपीएफ शिखर सम्मेलन में साझा किया।
भारत की बिजली क्षमता का 2047 तक क्या लक्ष्य है?
भारत का लक्ष्य अपनी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता को मौजूदा लगभग 500 गीगावाट से बढ़ाकर 2047 तक लगभग 2,100 गीगावाट तक पहुँचाना है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा को 100 गीगावाट से 1,800 गीगावाट तक विस्तारित करना शामिल है।
अमेरिकी कोयला निर्यात में भारत की क्या भूमिका है?
भारत अमेरिकी कोयला निर्यात का सबसे बड़ा विदेशी गंतव्य बन चुका है, जो कुल अमेरिकी कोयला निर्यात का लगभग 23% है। एक्सकोल एनर्जी एंड रिसोर्सेज के सीईओ अर्नी थ्रैशर के अनुसार, यह निर्यात 2005 में 10 लाख टन से बढ़कर पिछले वर्ष 2 करोड़ 15 लाख टन हो गया।
यूएसआईएसपीएफ शिखर सम्मेलन में ऊर्जा पर क्या चर्चा हुई?
वाशिंगटन में नौवें यूएसआईएसपीएफ नेतृत्व शिखर सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिका-भारत निवेश साझेदारी पर केंद्रित पैनल चर्चा हुई। उद्योग नेताओं ने भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा निवेश के लिए दुनिया के सबसे बड़े अवसरों में से एक बताया।
भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस का हिस्सा कितना बढ़ाने का लक्ष्य है?
फिलहाल भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी लगभग 6% है। देश का लक्ष्य नए इंफ्रास्ट्रक्चर, अन्वेषण और दीर्घकालिक निवेश के ज़रिये इसे 2047 तक 12–15% तक बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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