2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत का सोलर एनर्जी विस्तार: 162.15 गीगावाट क्षमता के साथ अमेरिका को पछाड़ा, दुनिया का दूसरा सबसे तेज़ बाज़ार बना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत का सोलर एनर्जी विस्तार: 162.15 गीगावाट क्षमता के साथ अमेरिका को पछाड़ा, दुनिया का दूसरा सबसे तेज़ बाज़ार बना

सारांश

2014 में महज़ 3 गीगावाट से 2026 में 162.15 गीगावाट — भारत का सोलर सफर अब अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। ₹2.44 प्रति यूनिट की रिकॉर्ड दर और PM सूर्य सरोवर योजना की मंजूरी के साथ, भारत 2030 के 500 गीगावाट लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

भारत की सोलर क्षमता 2014 में 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून 2026 तक 162.15 गीगावाट हो गई।
2025 में 37 गीगावाट क्षमता जोड़कर भारत ने अमेरिका को पछाड़ा, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बना।
सोलर बिजली दरें ₹18 प्रति यूनिट (2010) से घटकर रिकॉर्ड ₹2.44 प्रति यूनिट पर आईं; LCOE $35/MWh — वैश्विक औसत $44/MWh से कम।
31 जुलाई 2026 को PM सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी — 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर + 10,000 मेगावाट स्टोरेज, बजट ₹5,070 करोड़ ।
29 जुलाई 2025 को रिन्यूएबल एनर्जी ने भारत की बिजली माँग का रिकॉर्ड 51.5% पूरा किया।
भारत का 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य।

भारत की स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 30 जून 2026 तक 162.15 गीगावाट पर पहुँच गई है — जो 2014 में महज़ 3 गीगावाट थी। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 2025 में 37 गीगावाट सोलर क्षमता जोड़कर भारत ने सालाना वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया। यह उपलब्धि एक दशक से भी कम समय में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आए आमूल बदलाव की गवाह है।

क्षमता विस्तार का सफर

भारत में बड़े यूटिलिटी-स्केल सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापित क्षमता 118.79 गीगावाट है। इनमें राजस्थान का भादला सोलर पार्क, कर्नाटक का पावगाडा सोलर पार्क और मध्य प्रदेश का रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क प्रमुख हैं। ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम से 27.88 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता मिलती है। शेष क्षमता हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड सिस्टम से आती है, जो दूरदराज़ के इलाकों में बिजली पहुँचाते हैं।

बिजली दरों में ऐतिहासिक गिरावट

सोलर सेक्टर में सबसे बड़ा बदलाव बिजली की दरों में आई भारी कमी है। 'ई-रिवर्स ऑक्शन' प्रणाली के ज़रिए प्रतिस्पर्धी बोली की वजह से दरें 2010 में लगभग ₹18 प्रति यूनिट से घटकर रिकॉर्ड ₹2.44 प्रति यूनिट के निचले स्तर पर आ गई हैं। 2025 में यूटिलिटी-स्केल सोलर पीवी की लेवेलाइज्ड कॉस्ट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी (LCOE) $35 प्रति मेगावाट रही, जो $44 प्रति मेगावाट के वैश्विक औसत से कहीं कम है। इससे भारत दुनिया के सबसे कम लागत वाले सोलर बाज़ारों में शुमार हो गया है।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी

31 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' (PM-SSY) को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) के साथ 5,000 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) प्रोजेक्ट्स को सहयोग देना है। कम से कम दो घंटे की स्टोरेज क्षमता वाला ESS (10,000 मेगावाट) राज्यों को पीक डिमांड प्रबंधन में मदद करेगा। मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग करके यह योजना भूमि जैसे सीमित संसाधनों पर दबाव कम करेगी। ₹5,070 करोड़ के बजट वाली यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाएगी।

रिन्यूएबल एनर्जी की बड़ी तस्वीर

देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुँच चुकी है, जिसमें 274.68 गीगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता शामिल है। उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई 2025 को रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों ने भारत की बिजली माँग का 51.5 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया — जो अब तक का सबसे अधिक मासिक योगदान है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने ग्लासगो COP26 में 'पंचामृत' लक्ष्यों के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का संकल्प लिया है।

आगे की राह

PM-SSY के ज़रिए फ्लोटिंग सोलर और एकीकृत स्टोरेज का विस्तार भारत की ग्रिड विश्वसनीयता को मज़बूत करेगा। गौरतलब है कि 500 गीगावाट के 2030 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी भी तेज़ रफ्तार से क्षमता जोड़नी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड इंटीग्रेशन अगले चरण की सबसे बड़ी चुनौतियाँ होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड स्थिरता, जो क्षमता जोड़ने की रफ्तार के साथ कदम नहीं मिला पाई है। 51.5% रिन्यूएबल योगदान का एक दिन का रिकॉर्ड और स्थायी औसत योगदान में बड़ा फर्क है। PM सूर्य सरोवर योजना में फ्लोटिंग सोलर एक स्वागतयोग्य नवाचार है, लेकिन ₹5,070 करोड़ के बजट में 5,000 मेगावाट की महत्वाकांक्षा को देखते हुए क्रियान्वयन की गति और भूमि-जल संसाधन प्रबंधन पर कड़ी नज़र ज़रूरी है। 500 गीगावाट के 2030 लक्ष्य तक पहुँचने के लिए भारत को अभी भी हर साल 40-50 गीगावाट जोड़ने होंगे — और वह सिर्फ संख्याओं से नहीं, बल्कि ग्रिड एकीकरण की गुणवत्ता से तय होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट कैसे बना?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत ने 2025 में 37 गीगावाट सोलर क्षमता जोड़ी, जिससे सालाना वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया। कुल स्थापित क्षमता 30 जून 2026 तक 162.15 गीगावाट पर पहुँच चुकी है।
भारत में सोलर बिजली इतनी सस्ती कैसे हुई?
'ई-रिवर्स ऑक्शन' प्रणाली के ज़रिए प्रतिस्पर्धी बोली ने दरें 2010 के ₹18 प्रति यूनिट से घटाकर रिकॉर्ड ₹2.44 प्रति यूनिट पर ला दिया। 2025 में भारत की LCOE $35 प्रति मेगावाट रही, जो $44 के वैश्विक औसत से काफी कम है।
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना क्या है और इसका बजट कितना है?
31 जुलाई 2026 को मंजूर यह योजना एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ 5,000 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स को सहयोग देगी और कम से कम 10,000 मेगावाट की स्टोरेज क्षमता सुनिश्चित करेगी। इसका बजट ₹5,070 करोड़ है और यह वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी।
भारत का 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य क्या है?
ग्लासगो COP26 में घोषित 'पंचामृत' लक्ष्यों के तहत भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का संकल्प लिया है। अभी कुल गैर-जीवाश्म क्षमता 283.46 गीगावाट है।
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी ने अब तक की सबसे अधिक बिजली माँग कब पूरी की?
29 जुलाई 2025 को रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों ने भारत की बिजली माँग का 51.5 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया, जो अब तक का सबसे अधिक मासिक योगदान है। यह भारत की ऊर्जा मिश्रण में रिन्यूएबल की बढ़ती हिस्सेदारी का प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले