भारत में बिजली की मांग लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड: 265.44 GW पहुंची, कोयला भंडार पर्याप्त
सारांश
मुख्य बातें
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बुधवार, 20 मई को भारत में बिजली की अधिकतम मांग 265.44 गीगावाट तक पहुँच गई — लगातार तीसरे दिन एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह मांग दोपहर 3:45 बजे दर्ज हुई और बिना किसी आपूर्ति-कटौती के पूरी की गई। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग को इस उछाल का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
तीन दिनों का रिकॉर्ड क्रम
18 मई को देश में अधिकतम बिजली मांग 257.37 गीगावाट दर्ज हुई थी। इसके अगले दिन सोमवार को यह आँकड़ा बढ़कर 260.45 गीगावाट (दोपहर 3:40 बजे) हो गया। बुधवार को 265.44 GW के साथ यह तीसरा लगातार रिकॉर्ड है। गौरतलब है कि 18 मई को ही रात 10:29 बजे गैर-सौर ऊर्जा की चरम मांग भी 247.21 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँची थी।
आपूर्ति की स्थिति और कोयला भंडार
अधिकारियों के अनुसार बढ़ती खपत के बावजूद बिजली आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। कोयला मंत्रालय ने बताया कि इस समय तापीय विद्युत संयंत्रों के पास 5.09 करोड़ टन कोयले का भंडार उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की खदानों में लगभग 12.3 करोड़ टन और कंपनी की स्वयं की खदानों में अतिरिक्त 1.6 करोड़ टन कोयला मौजूद है। रेलवे के सहयोग से कोयले की आपूर्ति-श्रृंखला सुचारू बताई गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नागरिकों से लू की चेतावनियों के प्रति सतर्क रहने और गर्मी के मौसम में आवश्यक सावधानियाँ बरतने की अपील की। विद्युत मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मौसमी माँग से निपटने के लिए मज़बूत व्यवस्थाएँ लागू हैं।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मई के दौरान दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान बने रहने की संभावना है। ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के निकटवर्ती क्षेत्र, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से दो से चार दिन अधिक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। हालाँकि, पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी रुक-रुककर होने वाली बारिश और गरज-चमक कुछ क्षेत्रों में तापमान को सामान्य या उससे नीचे रख सकती है।
आगे क्या
यदि तापमान का यही रुझान जारी रहा तो आने वाले दिनों में बिजली माँग के और नए शिखर छूने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा — विशेषकर सौर — की बढ़ती क्षमता ने दिन की चरम माँग को संभालने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन रात की माँग अभी भी थर्मल उत्पादन पर निर्भर है।