ऐतिहासिक! भारत में बिजली की मांग 252.07 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर, भीषण गर्मी बनी वजह

Click to start listening
ऐतिहासिक! भारत में बिजली की मांग 252.07 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर, भीषण गर्मी बनी वजह

सारांश

24 अप्रैल 2025 को भारत में बिजली की पीक डिमांड 252.07 गीगावाट के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची, जो मई 2024 का 250 GW रिकॉर्ड तोड़ती है। IMD ने मई-जून में और भीषण गर्मी की चेतावनी दी है। सरकार 22 GW नई क्षमता जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

Key Takeaways

  • 24 अप्रैल 2025 को भारत की पीक बिजली डिमांड 252.07 गीगावाट के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंची।
  • यह मई 2024 में बने 250 गीगावाट के पिछले सर्वकालिक रिकॉर्ड को तोड़ता है।
  • IMD ने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में मई-जून 2025 में और भीषण लू का पूर्वानुमान दिया है।
  • सरकार अप्रैल-जून 2025 के बीच 22 गीगावाट से अधिक नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।
  • LPG की कमी के कारण इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ते रुझान से बिजली मांग में 13-27 गीगावाट की अतिरिक्त वृद्धि संभव है।
  • बिजली क्षेत्र को 65-70 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय के अवसर मिलने की उम्मीद है, EV और डेटा सेंटर से मांग तीन गुना बढ़ सकती है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में बिजली की पीक डिमांड ने 24 अप्रैल 2025 को 252.07 गीगावाट का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया। बिजली मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर भारत समेत कई राज्यों में पड़ रही भीषण लू और तेज गर्मी के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा, जिसने बिजली खपत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। यह आंकड़ा मई 2024 में बने 250 गीगावाट के पिछले सर्वकालिक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ता है।

रिकॉर्ड डिमांड के आंकड़े और पृष्ठभूमि

22 अप्रैल को पीक डिमांड 239.70 गीगावाट दर्ज की गई थी, जो 23 अप्रैल को बढ़कर 240.12 गीगावाट हो गई और फिर 24 अप्रैल को 252.07 गीगावाट की ऐतिहासिक ऊंचाई तक जा पहुंची। तुलनात्मक रूप से देखें तो अप्रैल 2025 में अब तक की उच्चतम डिमांड 235.32 गीगावाट थी, जबकि जून 2024 में 242.77 गीगावाट रिकॉर्ड हुई थी।

सरकार ने इस गर्मी के मौसम में डिमांड 270 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान लगाया था। हालांकि वास्तविक आंकड़ा अभी उस अनुमान से कम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मई और जून में यह अंतर और कम हो सकता है।

मौसम विभाग की चेतावनी और आगामी खतरा

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में तीव्र लू चलने का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार मई और जून 2025 में गर्मी का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है, जिससे बिजली की मांग में और उछाल आने की आशंका है।

ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेताया है कि जैसे-जैसे लू की स्थिति विकराल होगी, घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल और बढ़ेगा, जिससे ग्रिड पर दबाव और तीव्र हो जाएगा।

बिजली क्षेत्र में क्षमता विस्तार की तैयारी

बिजली मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह ने बताया कि भारत अप्रैल से जून 2025 के बीच 22 गीगावाट से अधिक नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें 3.5 गीगावाट थर्मल, 10 गीगावाट सोलर, 2.5 गीगावाट पवन ऊर्जा, 1.9 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण और 750 मेगावाट जलविद्युत शामिल हैं।

एक हालिया उद्योग रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत नीतिगत समर्थन के चलते भारत के बिजली क्षेत्र को 65-70 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय के अवसर मिलने की संभावना है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और डेटा सेंटर जैसी नई-पीढ़ी की खपत से इस क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है, और संभावना है कि मांग तीन गुना तक बढ़ सकती है।

LPG से इंडक्शन कुकिंग की ओर बदलाव और अतिरिक्त बिजली मांग

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के महानिदेशक कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने हाल ही में एक अहम बात कही। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण LPG की आपूर्ति में आई कमी की वजह से भारतीय उपभोक्ता तेजी से इंडक्शन-आधारित खाना पकाने की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव से वितरण स्तर पर बिजली की मांग में 13 से 27 गीगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

पाणिग्रही ने स्पष्ट किया कि इस अनुमान की इतनी बड़ी रेंज इसलिए है क्योंकि अलग-अलग राज्यों में खाना पकाने की आदतें, जलवायु, और सामाजिक-आर्थिक स्थितियां भिन्न हैं। यह बदलाव भारत की ऊर्जा नीति के लिए एक नई चुनौती और अवसर दोनों साबित हो सकता है।

विश्लेषण: क्या भारत का ग्रिड इस दबाव को झेल पाएगा?

गौरतलब है कि 2012 की ऐतिहासिक ग्रिड फेलियर में भारत के 60 करोड़ से अधिक लोग बिजली संकट से प्रभावित हुए थे। उसके बाद से ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ है, लेकिन रिकॉर्ड डिमांड के इस दौर में ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क की परीक्षा एक बार फिर होगी।

यह भी विचारणीय है कि जहां सरकार नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का दावा करती है, वहीं सोलर और पवन ऊर्जा की अंतरायी प्रकृति (intermittency) के कारण पीक डिमांड के घंटों में थर्मल पावर पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है। बैटरी स्टोरेज में 1.9 गीगावाट का जोड़ा जाना सही दिशा में कदम है, लेकिन यह अभी भी जरूरत से काफी कम है।

आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थिति, नई क्षमता के चालू होने की गति और ग्रिड प्रबंधन की दक्षता यह तय करेगी कि भारत इस गर्मी में बिजली संकट से बच पाता है या नहीं।

Point of View

दूसरी तरफ पीक डिमांड के घंटों में थर्मल कोयला संयंत्रों पर निर्भरता अभी भी कायम है — यह विरोधाभास नीति निर्माताओं के लिए असली परीक्षा है। LPG संकट के कारण इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ता रुझान एक अप्रत्याशित कारक है जो 13-27 गीगावाट की अतिरिक्त मांग जोड़ सकता है — इसकी योजना पहले से नहीं बनाई गई थी। अगर मई-जून में 270 गीगावाट की डिमांड सच में आई और ग्रिड तैयार नहीं हुआ, तो 2012 जैसे संकट की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत में बिजली की मांग का नया रिकॉर्ड कब और कितना बना?
24 अप्रैल 2025 को भारत में बिजली की पीक डिमांड 252.07 गीगावाट के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची। यह मई 2024 में बने 250 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ता है।
बिजली की मांग इतनी क्यों बढ़ी?
उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में भीषण लू और तेज गर्मी के कारण घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में AC, कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ा। IMD ने मई-जून में गर्मी और बढ़ने की चेतावनी दी है।
सरकार ने इस गर्मी में कितनी बिजली डिमांड का अनुमान लगाया था?
बिजली मंत्रालय ने इस गर्मी में पीक डिमांड 270 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान लगाया था। हालांकि 24 अप्रैल को यह 252.07 गीगावाट रही, जो अनुमान से कम लेकिन ऐतिहासिक रूप से उच्चतम है।
क्या भारत नई बिजली क्षमता जोड़ रहा है?
हां, बिजली मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह के अनुसार अप्रैल से जून 2025 के बीच 22 गीगावाट से अधिक नई क्षमता जोड़ी जाएगी। इसमें सोलर, थर्मल, पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और जलविद्युत शामिल हैं।
LPG संकट का बिजली मांग से क्या संबंध है?
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के महानिदेशक कृष्ण चंद्र पाणिग्रही के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण LPG की कमी से लोग इंडक्शन कुकिंग अपना रहे हैं। इससे बिजली की मांग में 13 से 27 गीगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
Nation Press