मध्य पूर्व तनाव से ब्रेंट क्रूड $116 पार, छह महीनों के उच्चतम स्तर पर कच्चा तेल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व में तेज़ी से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 23 अक्टूबर 2026 को छह महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गईं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.60 प्रतिशत उछलकर $116.13 प्रति बैरल पर पहुँच गया — जो 30 अप्रैल के बाद का सर्वोच्च स्तर है। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 2.90 प्रतिशत बढ़कर $102.56 प्रति बैरल पर आ गया।
साप्ताहिक तेज़ी और बाज़ार का रुझान
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में साप्ताहिक आधार पर करीब 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जो लगातार तीसरे सप्ताह की तेज़ी है। WTI फ्यूचर्स में भी साप्ताहिक स्तर पर 3.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं से जूझ रहा था।
अमेरिका-ईरान तनाव: मुख्य कारण
कीमतों में उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की बढ़ती आशंका बताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा और जल्द ही 'कुछ बड़ा' होने वाला है।
इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका और इज़रायल ने एक 'छोटे लेकिन सघन अभियान' की तैयारी के तहत सैन्य अभ्यास तेज़ कर दिए हैं। इसमें इराक के ऊपर से उड़ान भरकर हमले की रणनीतियों का पूर्वाभ्यास करना भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, संभावित लक्ष्यों में ईरान के ऊर्जा केंद्र, परमाणु सुविधाएँ तथा मिसाइल और ड्रोन के ज़खीरे शामिल हैं।
ईरान की जवाबी तैयारी
ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी तस्नीम के अनुसार, ईरान के सेना प्रमुख ने बयान दिया है कि देश की सेना अपनी क्षमताओं को मज़बूत करने के बाद अब 'युद्ध' के लिए पूरी तरह तैयार है। गौरतलब है कि दोनों पक्षों के इस तरह के बयान वैश्विक तेल बाज़ार में आपूर्ति संकट की आशंका को और गहरा कर देते हैं।
हूती हमलों से सऊदी आपूर्ति पर ख़तरा
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार जारी हमलों ने कच्चे तेल बाज़ार में आपूर्ति को लेकर अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा कर दी है। यह खाड़ी क्षेत्र से गुज़रने वाली प्रमुख तेल आपूर्ति शृंखलाओं पर दोहरा दबाव है — एक तरफ अमेरिका-ईरान की तनातनी और दूसरी तरफ यमन संघर्ष का असर। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए यह तेज़ी घरेलू ईंधन कीमतों पर भी असर डाल सकती है।
आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, जब तक मध्य पूर्व में राजनयिक तनाव कम नहीं होता, तेल कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। OPEC+ की अगली बैठक और अमेरिका की आगामी विदेश नीति से जुड़े घटनाक्रम बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।