डोडला डेयरी का Q4 मुनाफा 2.3% घटकर ₹55.4 करोड़, EBITDA मार्जिन 8.2% से गिरकर 3.4% पर
सारांश
मुख्य बातें
डोडला डेयरी का वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) में समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 2.3 प्रतिशत घटकर ₹55.4 करोड़ रह गया, जबकि परिचालन मार्जिन में तीखी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह मुनाफा ₹56.7 करोड़ था।
राजस्व में उछाल, पर मुनाफा फिसला
तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय सालाना आधार पर 4.6 प्रतिशत बढ़कर ₹845 करोड़ हो गई, जो वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में ₹807.8 करोड़ थी। यह वृद्धि मुख्यतः कंपनी के डेयरी कारोबार में आई तेजी के कारण रही। हालाँकि, राजस्व में बढ़त के बावजूद लागत दबाव ने लाभप्रदता को सीमित कर दिया।
EBITDA में भारी संकुचन
परिचालन प्रदर्शन के मोर्चे पर तस्वीर चिंताजनक रही। कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 56.5 प्रतिशत की तीखी गिरावट के साथ ₹29 करोड़ पर आ गया, जो वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में ₹66.6 करोड़ था। इसी अनुपात में EBITDA मार्जिन भी 8.2 प्रतिशत से घटकर मात्र 3.4 प्रतिशत रह गया — यानी मार्जिन में करीब 480 आधार अंकों की गिरावट। यह ऐसे समय में आया है जब डेयरी उद्योग कच्चे दूध की लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च के दोहरे दबाव से जूझ रहा है।
लाभांश की घोषणा
तिमाही नतीजों के साथ-साथ कंपनी के बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए ₹10 अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर ₹5 के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है। यह प्रस्ताव आगामी 31वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है, जो 14 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे IST आयोजित होगी। लाभांश के पात्र शेयरधारकों के निर्धारण के लिए रिकॉर्ड तिथि 7 जुलाई 2026 तय की गई है।
शेयर बाज़ार पर असर
नतीजों की घोषणा से पहले ही शुक्रवार के कारोबारी सत्र में डोडला डेयरी के शेयर 2.5 प्रतिशत से अधिक गिरकर बंद हुए। पिछले छह महीनों में शेयर लगभग 15.6 प्रतिशत यानी करीब ₹200 टूट चुका है। वर्तमान बाज़ार भाव ₹1,025 है, जबकि 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹1,525 रहा है। गौरतलब है कि यह गिरावट व्यापक डेयरी क्षेत्र में मार्जिन दबाव की एक बड़ी प्रवृत्ति को दर्शाती है।
आगे क्या
निवेशकों की नज़र अब 14 जुलाई 2026 की एजीएम पर होगी, जहाँ प्रबंधन से मार्जिन सुधार की रणनीति पर स्पष्टता की उम्मीद है। कंपनी के लिए अगली तिमाही में इनपुट लागत नियंत्रण और मूल्य निर्धारण शक्ति दोनों अहम परीक्षाएँ होंगी।