डॉ. सुभाष चंद्रा पर्सनल गारंटी विवाद: एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को 100% मूलधन व 10% ब्याज सहित सेटलमेंट प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
एस्सेल ग्रुप के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी से जुड़े एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड लोन विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है — संबंधित चार कंपनियों ने 7 अक्टूबर 2026 को 100 प्रतिशत बकाया मूलधन के साथ 10 प्रतिशत ब्याज सहित पूर्ण सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को औपचारिक रूप से सौंपा गया है और इसे कर्ज समाधान प्रक्रिया में एक सकारात्मक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
वसंत सागर प्रॉपर्टीज लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से ₹500 करोड़ का ऋण लिया था। इसके अलावा डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्प्रिट इंफ्रापावर प्रोजेक्ट ने भी ₹480 करोड़ का ऋण इसी संस्था से लिया था।
सूत्रों के मुताबिक, इन चारों कंपनियों ने अब संयुक्त रूप से 100 प्रतिशत मूलधन और 10 प्रतिशत ब्याज के साथ संपूर्ण बकाया राशि चुकाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है — यही वे कंपनियाँ हैं जिनके ऋण के लिए डॉ. चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका निभाई थी।
डॉ. चंद्रा का पक्ष और पिछला विवाद
गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण (NCLT) के समक्ष लोन में 99.97 प्रतिशत हेयरकट के मामले को जब भारी-भरकम व्यक्तिगत कर्ज माफी के रूप में प्रस्तुत किया गया, तो डॉ. चंद्रा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका स्पष्ट कहना था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसी उधारदाता से कोई रकम नहीं ली थी — वे केवल एस्सेल ग्रुप की उधार लेने वाली कंपनियों के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर शामिल थे।
डॉ. चंद्रा ने यह भी स्पष्ट किया था कि ₹22,006 करोड़ का जो आँकड़ा सामने आया था, वह कार्यवाही में दाखिल दावों की कुल राशि को दर्शाता है, न कि उनका व्यक्तिगत बकाया ऋण।
दावों का ब्योरा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल ₹21,696 करोड़ के दावे स्वीकृत किए गए थे। इनमें से भुगतान योजना का विरोध करने वाले उधारदाताओं के दावे लगभग ₹3,992 करोड़ थे, जिनमें से ₹620 करोड़ के दावे पहले ही निपटाए जा चुके थे। इस प्रकार शेष राशि लगभग ₹3,372 करोड़ बचती है।
डॉ. चंद्रा के बयान के अनुसार, उधार लेने वाली कंपनियों ने आपत्ति जताने वाले कई उधारदाताओं को लगभग ₹1,113 करोड़ का भुगतान करने की पेशकश की थी और इस संबंध में बातचीत अभी जारी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कानूनी और वित्तीय विशेषज्ञों के एक वर्ग का कहना है कि 100 प्रतिशत मूलधन और 10 प्रतिशत ब्याज का यह प्रस्ताव, यदि स्वीकार होता है, तो यह उधारदाता के दृष्टिकोण से उल्लेखनीय माना जाएगा क्योंकि इसमें कोई हेयरकट नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब कॉर्पोरेट दिवालियापन और व्यक्तिगत गारंटी के मामलों में उधारदाताओं को प्रायः आंशिक वसूली से ही संतोष करना पड़ता है।
आगे क्या होगा
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की ओर से इस प्रस्ताव पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, सेटलमेंट प्रस्ताव की समीक्षा प्रक्रिया चल रही है और बातचीत के अगले दौर पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस मामले का अंतिम निपटारा न केवल डॉ. चंद्रा, बल्कि पर्सनल गारंटर की जवाबदेही तय करने वाली भावी NCLT कार्यवाहियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।