14 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी ने रिलायंस पावर की ₹2,032 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं, फेमा उल्लंघन का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी ने रिलायंस पावर की ₹2,032 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं, फेमा उल्लंघन का आरोप

सारांश

ईडी ने रिलायंस पावर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹2,032 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की हैं। आरोप है कि 2006 में जुटाए गए 30 करोड़ डॉलर को बीवीआई और केमैन आइलैंड्स की फर्जी कंपनियों के ज़रिए विदेश में छुपाया गया और दस्तावेज़ पिछली तारीख में तैयार किए गए।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 अक्टूबर 2026 को रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की ₹2,032.81 करोड़ की संपत्तियाँ फेमा के तहत जब्त कीं।
जब्त संपत्तियों में आरपीएल के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में हिस्सेदारी शामिल है।
जांच की शुरुआत सेबी की सूचना से हुई, जो आरपीएल द्वारा ₹2,101.46 करोड़ को बट्टे खाते में डालने से जुड़ी थी।
2006 में एफसीसीबी के ज़रिए जुटाए गए 30 करोड़ डॉलर में से 27.5 करोड़ डॉलर सिंगापुर की सहायक कंपनी में निवेश किए गए थे।
ईडी के अनुसार, बीवीआई कंपनियों के दस्तावेज़ पिछली तारीख में तैयार किए गए थे।
मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 अक्टूबर 2026 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की ₹2,032.81 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ जब्त की हैं। जब्त संपत्तियों में आरपीएल के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है।

क्या जब्त किया गया और क्यों

ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है जिसे कंपनी ने फेमा की धारा 4 का उल्लंघन करते हुए भारत के बाहर रखा था। जांच की शुरुआत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली उस जानकारी के आधार पर हुई, जो आरपीएल की लेखा पुस्तकों में ₹2,101.46 करोड़ की राशि को बट्टे खाते में डालने से जुड़ी थी।

यह राशि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थी। गौरतलब है कि इस साल 6 से 8 मार्च के बीच फेमा के तहत तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए गए और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए।

जांच में सामने आई वित्तीय संरचना

जांच में पाया गया कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड — जिसका बाद में आरपीएल में विलय हुआ — ने 2006 में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के ज़रिए 30 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ डॉलर उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की सहायक कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) पीटीई लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में निवेश किए गए थे।

आरएनआरएल-एस ने यह राशि जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा कराई थी। इस जमा राशि का उपयोग बीवीआई में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए ऋण की गारंटी के तौर पर किया गया। ईडी के अनुसार, इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा किया जाता था।

धन के उपयोग और कथित हेराफेरी का विवरण

जांच में आगे पता चला कि ऋण से प्राप्त राशि को मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से अस्थायी रूप से भारत वापस लाया गया और इसका इस्तेमाल रिलायंस अनिल अंबानी समूह के लाभ के लिए किया गया। धन का एक हिस्सा भारत के बाहर ही रखा गया।

बयान के अनुसार, डॉयचे बैंक द्वारा दिए गए ऋण को बीवीआई कंपनियाँ चुकाने में विफल रहीं। इस पर पर्दा डालने के लिए ऐसे दस्तावेज़ तैयार किए गए, जिनसे यह दिखाया जा सके कि आरएनआरएल-एस और आरपीएल की इंडोनेशिया स्थित सहायक कंपनियों ने वास्तविक कारोबारी उद्देश्यों के लिए इन बीवीआई कंपनियों को अग्रिम राशि दी थी। जांच में पाया गया कि इन दस्तावेजों को पिछली तारीख में तैयार किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियाँ पहले से ही वित्तीय दबाव में हैं और कई नियामकीय जांचों का सामना कर रही हैं। सेबी की शिकायत पर आधारित यह कार्रवाई देश के बड़े कॉर्पोरेट समूहों पर नियामकीय निगरानी की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।

आगे की जांच जारी

ईडी के बयान में स्पष्ट किया गया है कि मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जटिल बहुस्तरीय वित्तीय संरचना की पूरी पड़ताल में और समय लग सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनेवा, बीवीआई, केमैन आइलैंड्स और मॉरीशस जैसी कई न्यायक्षेत्रों की परतें बिछाई गई थीं। सेबी से मिली शिकायत के आधार पर शुरू हुई यह जांच बताती है कि दो नियामक एजेंसियाँ अब समन्वय से काम कर रही हैं — जो बड़े कॉर्पोरेट मामलों में पहले अक्सर नहीं दिखता था। असली सवाल यह है कि दो दशक पुराने इन लेनदेन पर कार्रवाई इतनी देर से क्यों हुई, और क्या दस्तावेज़ों की पिछली तारीख वाला पहलू आपराधिक जांच की ओर भी जाएगा।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने रिलायंस पावर की किन संपत्तियों को जब्त किया है?
ईडी ने रिलायंस पावर लिमिटेड के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी जब्त की है, जिनका कुल मूल्य ₹2,032.81 करोड़ है। यह जब्ती फेमा की धारा 4 के उल्लंघन के आरोप में की गई है।
रिलायंस पावर पर फेमा उल्लंघन का मामला क्या है?
आरोप है कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने 2006 में एफसीसीबी के ज़रिए जुटाए 27.5 करोड़ डॉलर को सिंगापुर की सहायक कंपनी के माध्यम से जिनेवा के डॉयचे बैंक में जमा कराया और उससे बीवीआई कंपनियों को ऋण दिलवाया, जो फेमा का उल्लंघन है। धन का उपयोग रिलायंस अनिल अंबानी समूह के लाभ के लिए किया गया बताया जा रहा है।
ईडी की यह जांच कब और कैसे शुरू हुई?
जांच सेबी से मिली उस जानकारी के आधार पर शुरू हुई जो आरपीएल की लेखा पुस्तकों में ₹2,101.46 करोड़ को बट्टे खाते में डालने से जुड़ी थी। इस वर्ष 6 से 8 मार्च के बीच फेमा के तहत तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें साक्ष्य जब्त हुए और बयान दर्ज किए गए।
इस मामले में दस्तावेज़ों की पिछली तारीख का क्या अर्थ है?
ईडी के अनुसार, बीवीआई कंपनियों को दी गई अग्रिम राशि को वास्तविक कारोबारी लेनदेन दिखाने के लिए दस्तावेज़ बाद में पुरानी तारीखों पर तैयार किए गए। यह मामले को और अधिक गंभीर बनाता है क्योंकि यह कथित तौर पर जानबूझकर साक्ष्यों को छुपाने का प्रयास दर्शाता है।
रिलायंस पावर मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच अभी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बहुस्तरीय अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना की पूरी पड़ताल में और समय लग सकता है और आगे और भी कार्रवाइयाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले