ईडी ने रिलायंस पावर की ₹2,032 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं, फेमा उल्लंघन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 अक्टूबर 2026 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की ₹2,032.81 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ जब्त की हैं। जब्त संपत्तियों में आरपीएल के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है।
क्या जब्त किया गया और क्यों
ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है जिसे कंपनी ने फेमा की धारा 4 का उल्लंघन करते हुए भारत के बाहर रखा था। जांच की शुरुआत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली उस जानकारी के आधार पर हुई, जो आरपीएल की लेखा पुस्तकों में ₹2,101.46 करोड़ की राशि को बट्टे खाते में डालने से जुड़ी थी।
यह राशि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थी। गौरतलब है कि इस साल 6 से 8 मार्च के बीच फेमा के तहत तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए गए और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए।
जांच में सामने आई वित्तीय संरचना
जांच में पाया गया कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड — जिसका बाद में आरपीएल में विलय हुआ — ने 2006 में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के ज़रिए 30 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ डॉलर उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की सहायक कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) पीटीई लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में निवेश किए गए थे।
आरएनआरएल-एस ने यह राशि जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा कराई थी। इस जमा राशि का उपयोग बीवीआई में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए ऋण की गारंटी के तौर पर किया गया। ईडी के अनुसार, इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा किया जाता था।
धन के उपयोग और कथित हेराफेरी का विवरण
जांच में आगे पता चला कि ऋण से प्राप्त राशि को मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से अस्थायी रूप से भारत वापस लाया गया और इसका इस्तेमाल रिलायंस अनिल अंबानी समूह के लाभ के लिए किया गया। धन का एक हिस्सा भारत के बाहर ही रखा गया।
बयान के अनुसार, डॉयचे बैंक द्वारा दिए गए ऋण को बीवीआई कंपनियाँ चुकाने में विफल रहीं। इस पर पर्दा डालने के लिए ऐसे दस्तावेज़ तैयार किए गए, जिनसे यह दिखाया जा सके कि आरएनआरएल-एस और आरपीएल की इंडोनेशिया स्थित सहायक कंपनियों ने वास्तविक कारोबारी उद्देश्यों के लिए इन बीवीआई कंपनियों को अग्रिम राशि दी थी। जांच में पाया गया कि इन दस्तावेजों को पिछली तारीख में तैयार किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियाँ पहले से ही वित्तीय दबाव में हैं और कई नियामकीय जांचों का सामना कर रही हैं। सेबी की शिकायत पर आधारित यह कार्रवाई देश के बड़े कॉर्पोरेट समूहों पर नियामकीय निगरानी की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।
आगे की जांच जारी
ईडी के बयान में स्पष्ट किया गया है कि मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जटिल बहुस्तरीय वित्तीय संरचना की पूरी पड़ताल में और समय लग सकता है।