वैश्विक सहयोग की आवश्यकता, घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर ध्यान केंद्रित करें: विशेषज्ञ

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वैश्विक सहयोग की आवश्यकता, घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर ध्यान केंद्रित करें: विशेषज्ञ

सारांश

बेंगलुरु में उद्योग जगत और वैश्विक विशेषज्ञों ने भू-राजनीतिक तनावों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्य पूर्व संघर्ष का समाधान शीघ्र निकलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था और सामान्य जनजीवन पर पड़ रहे प्रभाव को कम किया जा सके।

Key Takeaways

  • भू-राजनीतिक तनाव पर चिंता जताई गई है।
  • मध्य पूर्व संघर्ष का शीघ्र समाधान आवश्यक है।
  • प्रवासी भारतीय भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • एआई का सही उपयोग नए अवसर पैदा कर सकता है।
  • भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देना चाहिए।

बेंगलुरु, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उद्योग क्षेत्र के प्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सोमवार को वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्य पूर्व के संघर्ष में कोई और वृद्धि नहीं होगी और इसका समाधान शीघ्र निकलेगा, क्योंकि इसका अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पहले से ही नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

बेंगलुरु में आयोजित 'इंडिआस्पोरा फोरम 2026' में बात करते हुए इंफोसिस के पूर्व सीईओ क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि दुनिया भर में फैला भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी भारतीय समुदाय) अब देश की एक महत्वपूर्ण ताकत बन चुका है। भले ही ये लोग भारत से दूर रह रहे हों, लेकिन उनका दिल भारत में बसा है और वे कई तरीकों से देश के विकास में योगदान कर रहे हैं।

गोपालकृष्णन ने कहा कि प्रवासी भारतीय न केवल भारत में निवेश कर रहे हैं, बल्कि अपने अनुभव, ज्ञान और नए विचार भी देश तक पहुँचा रहे हैं। साथ ही, वे अपने-अपने देशों की सरकारों के साथ संवाद करके भारत के हितों को भी आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डायस्पोरा को एक मजबूत शक्ति के रूप में विकसित किया है, जिसका लाभ भारत को मिल रहा है।

उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी तनावों और युद्ध जैसी स्थिति पर चिंता व्यक्त की, यह बताते हुए कि इसका असर केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि आम आदमी भी इससे प्रभावित हो रहा है।

गोपालकृष्णन ने बताया कि एलपीजी की कमी के कारण छोटे होटल और सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और कई जगह लोग पारंपरिक ईंधनों जैसे लकड़ी का उपयोग करने लगे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं और वहाँ से आने वाली रेमिटेंस (विदेश से भेजी जाने वाली रकम) भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि यह क्षेत्र प्रभावित होता है, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और यात्रा पर भी पड़ेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रभावी तकनीक के लिए उचित नियम और रेगुलेशन आवश्यक हैं। उन्होंने माना कि हर नई तकनीक के आगमन पर नौकरियों को लेकर चिंता होती है, लेकिन इतिहास यह दिखाता है कि इससे नए अवसर भी उत्पन्न होते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 45 वर्षों में अर्थव्यवस्था कई गुना बढ़ी है और रोजगार भी बढ़े हैं, इसलिए एआई के साथ भी ऐसा ही होगा। हालांकि, लोगों को नई स्किल सीखनी होगी। उन्होंने विशेष रूप से आईटी क्षेत्र में लगभग 55 लाख कर्मचारियों के लिए एआई में प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि जो लोग एआई को अपनाएंगे, उनकी उत्पादकता और आय दोनों बढ़ेंगी।

इसके अलावा, इंडिआस्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि इंडिआस्पोरा का उद्देश्य वैश्विक भारतीय समुदाय को एक सकारात्मक शक्ति के रूप में स्थापित करना और दुनिया भर के प्रवासी भारतीय नेताओं को भारत से जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से व्यापार, निवेश, संस्कृति, परोपकार और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में डायस्पोरा की भूमिका को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा हो रही है।

इस बार फोरम में सबसे बड़े मुद्दे जियोपॉलिटिक्स (वैश्विक राजनीति) और एआई हैं। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया और भारतीय डायस्पोरा पर पड़ रहा है।

इसके अलावा, इंडो-अमेरिकन इकोनॉमिस्ट और आईएमएफ की पूर्व उप निदेशक गीता गोपीनाथ ने कहा कि मौजूदा हालात में यह स्पष्ट नहीं है कि युद्ध कब तक चलेगा और तेल की कीमतें कहाँ तक जाएँगी।

उन्होंने कहा, "यह समय वैश्विक सहयोग के लिए बहुत जटिल है। कई परिवर्तन एक साथ हो रहे हैं, भू-राजनीति और युद्ध के अलावा, एआई का विकास, टैरिफ लागू होने और कई देशों द्वारा रक्षा तैयारियों पर अधिक खर्च हो रहा है। दुनिया भर में कर्ज का स्तर बहुत ऊँचा है, इसलिए कई महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, और इन सभी पहलुओं से निपटना नीति निर्माताओं के लिए एक कठिन कार्य है। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए यदि दुनिया एकजुट होकर काम करे तो सहायता मिलेगी।"

गोपीनाथ ने सुझाव दिया कि भारत को इस चुनौतीपूर्ण समय में अपने घरेलू सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें व्यापार करना आसान बनाना, निवेश बढ़ाना, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर काम करना शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सहयोग आवश्यक है, लेकिन भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

Point of View

NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

भू-राजनीतिक तनावों का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर है?
भू-राजनीतिक तनावों से रेमिटेंस में कमी, महंगाई और निवेश में बाधाएं आ सकती हैं।
प्रवासी भारतीयों की भूमिका क्या है?
प्रवासी भारतीय न केवल भारत में निवेश करते हैं, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान से देश के विकास में योगदान देते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्या महत्व है?
एआई नई तकनीक है, जिसके लिए उचित नियम और प्रशिक्षण की आवश्यकता है ताकि नए अवसर उत्पन्न हो सकें।
मध्य पूर्व के तनावों का क्या प्रभाव होगा?
यदि तनाव बढ़ता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था, यात्रा और रेमिटेंस को प्रभावित कर सकता है।
भारत को किन सुधारों पर ध्यान देना चाहिए?
भारत को घरेलू सुधारों, जैसे निवेश बढ़ाना और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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