सोना ₹3,004 और चांदी ₹10,191 प्रति किलो सस्ती, IBJA के साप्ताहिक आँकड़े जारी
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹3,004 प्रति 10 ग्राम गिरकर ₹1,46,426 प्रति 10 ग्राम पर आ गई, जबकि चांदी ₹10,191 प्रति किलो टूटकर ₹2,10,918 प्रति किलो पर बंद हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर के मज़बूत होने और ब्याज दरों में इज़ाफे की आशंका ने दोनों कीमती धातुओं पर दबाव डाला।
सोने की साप्ताहिक कीमतें
24 कैरेट सोने का भाव पिछले सप्ताह ₹1,49,430 प्रति 10 ग्राम था, जो इस सप्ताह घटकर ₹1,46,426 प्रति 10 ग्राम रह गया। 22 कैरेट सोना ₹1,36,878 से गिरकर ₹1,34,126 प्रति 10 ग्राम पर आया, जबकि 18 कैरेट सोने का दाम ₹1,12,073 से घटकर ₹1,09,820 प्रति 10 ग्राम हो गया।
साप्ताहिक आधार पर, 24 कैरेट सोने का न्यूनतम भाव 15 अक्टूबर को सुबह के सत्र में ₹1,45,564 प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ, जबकि उच्चतम स्तर 12 अक्टूबर को सुबह के सत्र में ₹1,48,425 प्रति 10 ग्राम था।
चांदी की साप्ताहिक कीमतें
चांदी में इस सप्ताह और भी तीखी गिरावट रही। ₹2,21,109 प्रति किलो से टूटकर यह ₹2,10,918 प्रति किलो पर आ गई — यानी एक सप्ताह में ₹10,191 की कमी। सप्ताह का उच्चतम स्तर 12 अक्टूबर को सुबह के सत्र में ₹2,20,874 प्रति किलो और न्यूनतम स्तर 15 अक्टूबर को सुबह के सत्र में ₹2,07,098 प्रति किलो रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुख
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं पर दबाव दिखा। सोने का अंतरराष्ट्रीय भाव करीब $4,186 प्रति औंस और चांदी का भाव लगभग $57 प्रति औंस के आसपास रहा। गौरतलब है कि वैश्विक कमोडिटी बाज़ार में डॉलर की मज़बूती का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण डॉलर का महंगा होना है, जिससे दोनों धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना। इसके अलावा, महंगाई में उछाल के बाद ब्याज दरों में इज़ाफे की आशंका से निवेशक सोने और चांदी से दूरी बना रहे हैं, क्योंकि ऊँची ब्याज दरों के माहौल में इन धातुओं की अपील घट जाती है।
IBJA की कीमत-निर्धारण प्रणाली
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) प्रतिदिन सुबह और शाम दो सत्रों में सोने व चांदी की आधिकारिक कीमतें जारी करती है, जो देशभर के ज्वेलर्स और निवेशकों के लिए संदर्भ दर के रूप में काम आती हैं। आगे चलकर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत बैठकों और कच्चे तेल के उत्पादन संबंधी फैसलों पर दोनों धातुओं की दिशा निर्भर करेगी।