एफआईआई ने शुक्रवार को भारतीय बाजार में ₹1,166 करोड़ का निवेश किया, साप्ताहिक बिकवाली घटी
सारांश
मुख्य बातें
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2026 को भारतीय इक्विटी बाजार में ₹1,166 करोड़ का शुद्ध निवेश किया — जो कई हफ्तों की भारी बिकवाली के बाद फंड प्रवाह के पलटने का स्पष्ट संकेत है। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में लौटी तेजी ने विदेशी निवेशकों को फिर से खरीदार की भूमिका में ला दिया।
साप्ताहिक आंकड़े: बिकवाली में बड़ी गिरावट
हालांकि, साप्ताहिक आधार पर एफआईआई अभी भी शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। बीते सप्ताह उन्होंने ₹8,991 करोड़ की बिकवाली की, जो इससे पिछले सप्ताह की ₹30,294 करोड़ की बिकवाली की तुलना में काफी कम है। विश्लेषकों का कहना है कि यह तीव्र गिरावट विदेशी निवेशकों के रुझान में बदलाव का संकेत देती है।
अक्टूबर 2026 के शुरू से 16 अक्टूबर तक एफआईआई कुल ₹48,769 करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस महीने विदेशी पूंजी का दबाव बाजार पर बना हुआ था।
डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला
दूसरी तरफ, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। बीते हफ्ते उन्होंने ₹7,813 करोड़ का इक्विटी में निवेश किया। हालाँकि, शुक्रवार को डीआईआई ने ₹3,661 करोड़ की बिकवाली की। अक्टूबर की शुरुआत से 16 अक्टूबर तक डीआईआई ने कुल ₹48,168 करोड़ का निवेश किया है, जो एफआईआई की बिकवाली के लगभग बराबर है और बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा रहा है।
बाजार सेंटिमेंट और जोखिम
विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को फंड प्रवाह का पलटना यह संकेत देता है कि बाजार का सेंटिमेंट स्थिर हो रहा है। गौरतलब है कि बीते सप्ताह निफ्टी ने लगातार दूसरे सप्ताह अपनी रिकवरी जारी रखी।
रुपए में मजबूती और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दिया। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का $105 प्रति बैरल के आसपास बने रहना महंगाई और बाहरी जोखिमों की चिंताओं को बनाए रखे हुए है, जो रिकवरी की गति को प्रभावित कर सकता है।
आगे किन कारकों पर नजर
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक अभी ब्रेंट क्रूड की कीमतों के रुझान और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं। घरेलू स्तर पर ध्यान वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों और सप्ताह के मध्य में आने वाले भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के मिनट्स पर केंद्रित है। ये दोनों कारक आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।