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अक्टूबर में FPI ने ₹53,337 करोड़ की इक्विटी बिकवाली की, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार बना बाधा

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अक्टूबर में FPI ने ₹53,337 करोड़ की इक्विटी बिकवाली की, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार बना बाधा

सारांश

अक्टूबर में FPI की ₹53,337 करोड़ की इक्विटी बिकवाली और ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर के पार बने रहना भारतीय बाज़ार पर भारी पड़ रहा है। निफ्टी स्मॉल-कैप 7.3% टूटा, लेकिन DII की खरीदारी ने लार्ज-कैप को संभाला। बिकवाली धीमी होने के संकेत हैं, पर जोखिम अभी टला नहीं।

मुख्य बातें

FPI ने अक्टूबर 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी से ₹53,337 करोड़ निकाले; यह लगातार 10वाँ हफ्ता है जब वे शुद्ध बिकवाल हैं।
इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए FPI की कुल बिकवाली ₹3,69,164 करोड़ तक पहुँची — डॉ.
विजयकुमार , जियोजित इन्वेस्टमेंट्स।
FPI ने इसी अवधि में IPO बाज़ार में ₹5,281 करोड़ का निवेश किया।
निफ्टी स्मॉल-कैप 100 में 7.3% , निफ्टी मिड-कैप 100 में 5.6% और निफ्टी 50 में 2.35% की साप्ताहिक गिरावट।
अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.36% से घटकर 5% के करीब आना और रुपए का मज़बूत होकर 84.94 पर पहुँचना बिकवाली रोकने में सहायक।
DII की सक्रिय लार्ज-कैप खरीदारी ने बाज़ार को आंशिक सहारा दिया।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹53,337 करोड़ निकाल लिए हैं, क्योंकि बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, यह लगातार 10वाँ हफ्ता है जब FPI शुद्ध बिकवाल रहे हैं, हालाँकि 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में बिकवाली की रफ्तार में कुछ कमी देखी गई।

मुख्य घटनाक्रम

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने बताया कि इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए FPI की कुल बिकवाली ₹3,69,164 करोड़ तक पहुँच चुकी है। हालाँकि, उल्लेखनीय है कि इसी दौरान FPI ने भारतीय IPO बाज़ार में ₹5,281 करोड़ का निवेश किया, जो प्राथमिक बाज़ार के प्रति उनकी रुचि बनाए रखने का संकेत देता है।

गौरतलब है कि 23 अक्टूबर के सप्ताह में FPI की बिकवाली में उल्लेखनीय कमी आई और दो दिन तो वे खरीदार भी बन गए — जो मनोवैज्ञानिक रूप से एक सकारात्मक संकेत है।

बिकवाली में कमी के कारण

विश्लेषकों के अनुसार कई कारकों ने FPI की बिकवाली को सीमित करने में भूमिका निभाई। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.36 प्रतिशत से घटकर लगभग 5 प्रतिशत पर आ गई। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत होकर 84.94 पर पहुँचा, और लार्ज-कैप शेयरों का वैल्यूएशन तुलनात्मक रूप से कम दिखने लगा।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप पर भारी दबाव

इस सप्ताह व्यापक बाज़ार में भारी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिड-कैप 100 में 5.6 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 में 7.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 50 ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए केवल 2.35 प्रतिशत की गिरावट झेली। जानकारों का मानना है कि व्यापक बाज़ार में इस गिरावट की एक वजह 'मार्जिन-फंडेड लॉन्ग पोज़ीशन' की 'फोर्सड लिक्विडेशन' हो सकती है।

घरेलू निवेशकों ने थामा बाज़ार

लार्ज-कैप शेयरों में अपेक्षाकृत स्थिरता का श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) को जाता है, जिन्होंने इन शेयरों में सक्रिय खरीदारी की। DII के पास निवेश के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध हैं, जिसने FPI की बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया।

आगे क्या होगा

विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें अर्थव्यवस्था और बाज़ार के लिए बड़ी बाधा बनी हुई हैं। FII की बिकवाली में धीरे-धीरे कमी आना राहत की बात ज़रूर है, लेकिन जब तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहेगा और व्यापक बाज़ार में कमज़ोरी जारी रहेगी, गिरावट का जोखिम बरकरार रहेगा। बाज़ार की आगे की दिशा काफी हद तक वैश्विक ऊर्जा कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के रुझान पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

337 करोड़ की बिकवाली का यह आँकड़ा केवल एक महीने का है, लेकिन पूरे साल की ₹3,69,164 करोड़ की निकासी यह बताती है कि यह कोई अल्पकालिक झटका नहीं, बल्कि संरचनात्मक पुनर्संतुलन है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है, वह यह है कि DII की खरीदारी भले ही गिरावट को थाम रही हो, पर घरेलू रिटेल निवेशकों की SIP-आधारित पूँजी का इस्तेमाल विदेशी निकासी की भरपाई के लिए हो रहा है — यह दीर्घकालिक रूप से चिंताजनक हो सकता है। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें मुद्रास्फीति, चालू खाते के घाटे और RBI की नीति — तीनों को एक साथ प्रभावित करती हैं, इसलिए यह केवल बाज़ार की नहीं, समग्र अर्थव्यवस्था की परीक्षा है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्टूबर 2026 में FPI ने भारतीय इक्विटी से कितने पैसे निकाले?
अक्टूबर 2026 में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹53,337 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है। यह लगातार 10वाँ सप्ताह है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शुद्ध बिकवाल बने रहे।
FPI की बिकवाली का मुख्य कारण क्या है?
विश्लेषकों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना FPI की बिकवाली का प्रमुख कारण है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊँचे स्तर पर रहना और वैश्विक अनिश्चितता भी निवेशकों को उभरते बाज़ारों से दूर कर रही है।
इस हफ्ते निफ्टी मिड-कैप और स्मॉल-कैप में कितनी गिरावट आई?
23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में निफ्टी स्मॉल-कैप 100 में 7.3 प्रतिशत और निफ्टी मिड-कैप 100 में 5.6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज हुई। इसके विपरीत, निफ्टी 50 में केवल 2.35 प्रतिशत की गिरावट रही।
DII (घरेलू संस्थागत निवेशक) की क्या भूमिका रही?
DII ने लार्ज-कैप शेयरों में सक्रिय खरीदारी कर FPI की बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया। उनके पास पर्याप्त निवेश फंड उपलब्ध है, जिसने बाज़ार को बड़ी गिरावट से बचाने में मदद की।
FPI की बिकवाली कब तक रुक सकती है?
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.36 प्रतिशत से घटकर लगभग 5 प्रतिशत पर आना और रुपए का मज़बूत होना सकारात्मक संकेत हैं। हालाँकि, जब तक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहेंगी, बिकवाली का दबाव पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है।
राष्ट्र प्रेस
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