अक्टूबर में FPI ने ₹53,337 करोड़ की इक्विटी बिकवाली की, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार बना बाधा
सारांश
मुख्य बातें
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹53,337 करोड़ निकाल लिए हैं, क्योंकि बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, यह लगातार 10वाँ हफ्ता है जब FPI शुद्ध बिकवाल रहे हैं, हालाँकि 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में बिकवाली की रफ्तार में कुछ कमी देखी गई।
मुख्य घटनाक्रम
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने बताया कि इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए FPI की कुल बिकवाली ₹3,69,164 करोड़ तक पहुँच चुकी है। हालाँकि, उल्लेखनीय है कि इसी दौरान FPI ने भारतीय IPO बाज़ार में ₹5,281 करोड़ का निवेश किया, जो प्राथमिक बाज़ार के प्रति उनकी रुचि बनाए रखने का संकेत देता है।
गौरतलब है कि 23 अक्टूबर के सप्ताह में FPI की बिकवाली में उल्लेखनीय कमी आई और दो दिन तो वे खरीदार भी बन गए — जो मनोवैज्ञानिक रूप से एक सकारात्मक संकेत है।
बिकवाली में कमी के कारण
विश्लेषकों के अनुसार कई कारकों ने FPI की बिकवाली को सीमित करने में भूमिका निभाई। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.36 प्रतिशत से घटकर लगभग 5 प्रतिशत पर आ गई। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत होकर 84.94 पर पहुँचा, और लार्ज-कैप शेयरों का वैल्यूएशन तुलनात्मक रूप से कम दिखने लगा।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप पर भारी दबाव
इस सप्ताह व्यापक बाज़ार में भारी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिड-कैप 100 में 5.6 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 में 7.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 50 ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए केवल 2.35 प्रतिशत की गिरावट झेली। जानकारों का मानना है कि व्यापक बाज़ार में इस गिरावट की एक वजह 'मार्जिन-फंडेड लॉन्ग पोज़ीशन' की 'फोर्सड लिक्विडेशन' हो सकती है।
घरेलू निवेशकों ने थामा बाज़ार
लार्ज-कैप शेयरों में अपेक्षाकृत स्थिरता का श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) को जाता है, जिन्होंने इन शेयरों में सक्रिय खरीदारी की। DII के पास निवेश के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध हैं, जिसने FPI की बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें अर्थव्यवस्था और बाज़ार के लिए बड़ी बाधा बनी हुई हैं। FII की बिकवाली में धीरे-धीरे कमी आना राहत की बात ज़रूर है, लेकिन जब तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहेगा और व्यापक बाज़ार में कमज़ोरी जारी रहेगी, गिरावट का जोखिम बरकरार रहेगा। बाज़ार की आगे की दिशा काफी हद तक वैश्विक ऊर्जा कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के रुझान पर निर्भर करेगी।