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सितंबर 2026 में FPI ने भारतीय बाज़ार से निकाले ₹45,536 करोड़, लार्ज-कैप वैल्यूएशन हुए आकर्षक

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सितंबर 2026 में FPI ने भारतीय बाज़ार से निकाले ₹45,536 करोड़, लार्ज-कैप वैल्यूएशन हुए आकर्षक

सारांश

सितंबर 2026 में FPI ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹45,536 करोड़ निकाले — अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और महँगे कच्चे तेल ने दबाव बनाया। लेकिन DII की रिकॉर्ड ₹76,030 करोड़ की खरीदारी ने बाज़ार को थामे रखा। अब नज़रें Q2 नतीजों पर हैं।

मुख्य बातें

FPI ने सितंबर 2026 में भारतीय इक्विटी बाज़ार से ₹45,536 करोड़ की निकासी की।
प्राथमिक बाज़ार में FPI का निवेश जारी रहा — सितंबर में ₹9,676 करोड़ लगाए।
28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार सत्रों में FPI ने ₹34,965 करोड़ की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की।
DII ने सितंबर में नकद इक्विटी बाज़ार में ₹76,030 करोड़ की खरीदारी कर बाज़ार को संभाला।
बाज़ार लगातार आठ सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ; कमज़ोर मानसून ( 13% कम बारिश ) ने भी धारणा पर असर डाला।
हालिया करेक्शन के बाद लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक हुए; Q2 नतीजे आगे की दिशा तय करेंगे।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर 2026 में भारतीय शेयर बाज़ार में बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हुए कुल ₹45,536 करोड़ के इक्विटी शेयर बेचे। हालाँकि, प्राथमिक बाज़ार में उनकी रुचि बनी रही और उन्होंने इसी अवधि में ₹9,676 करोड़ का निवेश किया, जो यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह मुँह नहीं मोड़ रहे, बल्कि निवेश के चयन में अधिक सतर्कता बरत रहे हैं।

बिकवाली के प्रमुख कारण

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, FPI की इस आक्रामक बिकवाली के पीछे दो प्रमुख वैश्विक कारक रहे — अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुँचना और कच्चे तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊँचे बने रहने की आशंका। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड इतनी ऊँचाई पर होती है, तो उभरते बाज़ारों जैसे भारत में निवेश की तुलनात्मक आकर्षकता घट जाती है और वैश्विक पूँजी 'सुरक्षित ठिकानों' की ओर पलायन करती है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि लगातार विदेशी बिकवाली ने भारतीय बाज़ार को काफी कमज़ोर किया है और बाज़ार लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट के साथ बंद हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमज़ोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा पर प्रतिकूल असर डाला।

महीने के अंत में बिकवाली और तेज़

28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार कारोबारी सत्रों में FPI ने लगभग ₹34,965 करोड़ की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की, जबकि इसी अवधि के लिए रिपोर्ट की गई निर्धारित इक्विटी बिकवाली ₹27,962 करोड़ रही। यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि महीने के अंतिम दिनों और अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी निवेशकों की निकासी और अधिक तेज़ हो गई।

गौरतलब है कि जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीद के चलते विदेशी निवेशकों का रुख कुछ समय के लिए सकारात्मक हुआ था, लेकिन वह रुझान अस्थायी साबित हुआ और बिकवाली का दबाव फिर लौट आया।

लार्ज-कैप शेयरों में निवेश का अवसर

हालिया करेक्शन के बाद बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में दीर्घकालिक निवेशकों के लिए संभावित अवसर बन सकते हैं।

चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौर ने कहा, 'द्वितीयक बाज़ार में बिकवाली और प्राथमिक बाज़ार में निवेश इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह दूर नहीं जा रहे, बल्कि निवेश के अवसरों के चयन में अधिक सावधानी बरत रहे हैं।' उनका मानना है कि यह रुझान अक्टूबर 2026 में भी जारी रह सकता है।

DII की मज़बूत खरीदारी ने संभाला बाज़ार

दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को मज़बूत समर्थन दिया। सितंबर 2026 में DII ने नकद इक्विटी बाज़ार में ₹76,030 करोड़ की खरीदारी की, जिसने FPI की बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया। बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों की सतत खरीदारी न होती, तो बाज़ार में और गहरी कमज़ोरी आ सकती थी।

आगे की राह और Q2 नतीजों का महत्व

विश्लेषकों के अनुसार, FPI की बिकवाली में ठहराव या वापसी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे सकारात्मक संकेत आवश्यक होंगे। आगे चलकर बाज़ार की दिशा काफी हद तक वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के कॉर्पोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे और जिनका प्रबंधन भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा, उनके शेयरों में निवेशकों की खरीदारी देखने को मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

536 करोड़ की यह निकासी महज़ एक महीने का आँकड़ा नहीं है — यह उस व्यापक वैश्विक पुनर्संरेखण का हिस्सा है जिसमें ऊँची अमेरिकी यील्ड उभरते बाज़ारों की पूँजी खींच रही है। चिंताजनक यह है कि आठ सप्ताह की लगातार गिरावट के बावजूद घरेलू नीति-निर्माताओं की ओर से कोई ठोस संकेत नहीं आया है। DII की ₹76,030 करोड़ की खरीदारी ने बाज़ार को थामने का काम किया, लेकिन यह घरेलू बचत पर बढ़ती निर्भरता को भी उजागर करती है। असली परीक्षा Q2 नतीजों की होगी — अगर कॉर्पोरेट आय निराश करती है, तो FPI वापसी की उम्मीद और दूर खिसक सकती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में FPI ने भारतीय बाज़ार से कितनी निकासी की?
FPI ने सितंबर 2026 में भारतीय द्वितीयक इक्विटी बाज़ार से कुल ₹45,536 करोड़ के शेयर बेचे। हालाँकि, उन्होंने प्राथमिक बाज़ार में ₹9,676 करोड़ का निवेश भी किया।
FPI की इतनी बड़ी बिकवाली की वजह क्या रही?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर जाना और कच्चे तेल की कीमतों के ऊँचे बने रहने की आशंका दो प्रमुख कारण रहे। इसके अलावा, इस वर्ष 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमज़ोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
DII ने सितंबर 2026 में कितनी खरीदारी की?
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने सितंबर 2026 में नकद इक्विटी बाज़ार में ₹76,030 करोड़ की खरीदारी की। इस मज़बूत घरेलू निवेश ने FPI की भारी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करने में मदद की।
क्या अब लार्ज-कैप शेयरों में निवेश का अच्छा मौका है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया बाज़ार करेक्शन के बाद लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अधिक आकर्षक हो गए हैं। गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में दीर्घकालिक निवेशकों के लिए संभावित अवसर बन सकते हैं, हालाँकि अंतिम निर्णय Q2 नतीजों के बाद और स्पष्ट होगा।
FPI की बिकवाली कब रुक सकती है?
विश्लेषकों का कहना है कि FPI की बिकवाली में ठहराव के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे सकारात्मक वैश्विक संकेत ज़रूरी होंगे। वित्त वर्ष 2026-27 की Q2 के कॉर्पोरेट नतीजे भी बाज़ार की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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