सितंबर 2026 में FPI ने भारतीय बाज़ार से निकाले ₹45,536 करोड़, लार्ज-कैप वैल्यूएशन हुए आकर्षक
सारांश
मुख्य बातें
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर 2026 में भारतीय शेयर बाज़ार में बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हुए कुल ₹45,536 करोड़ के इक्विटी शेयर बेचे। हालाँकि, प्राथमिक बाज़ार में उनकी रुचि बनी रही और उन्होंने इसी अवधि में ₹9,676 करोड़ का निवेश किया, जो यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह मुँह नहीं मोड़ रहे, बल्कि निवेश के चयन में अधिक सतर्कता बरत रहे हैं।
बिकवाली के प्रमुख कारण
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, FPI की इस आक्रामक बिकवाली के पीछे दो प्रमुख वैश्विक कारक रहे — अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुँचना और कच्चे तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊँचे बने रहने की आशंका। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड इतनी ऊँचाई पर होती है, तो उभरते बाज़ारों जैसे भारत में निवेश की तुलनात्मक आकर्षकता घट जाती है और वैश्विक पूँजी 'सुरक्षित ठिकानों' की ओर पलायन करती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि लगातार विदेशी बिकवाली ने भारतीय बाज़ार को काफी कमज़ोर किया है और बाज़ार लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट के साथ बंद हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमज़ोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा पर प्रतिकूल असर डाला।
महीने के अंत में बिकवाली और तेज़
28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार कारोबारी सत्रों में FPI ने लगभग ₹34,965 करोड़ की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की, जबकि इसी अवधि के लिए रिपोर्ट की गई निर्धारित इक्विटी बिकवाली ₹27,962 करोड़ रही। यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि महीने के अंतिम दिनों और अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी निवेशकों की निकासी और अधिक तेज़ हो गई।
गौरतलब है कि जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीद के चलते विदेशी निवेशकों का रुख कुछ समय के लिए सकारात्मक हुआ था, लेकिन वह रुझान अस्थायी साबित हुआ और बिकवाली का दबाव फिर लौट आया।
लार्ज-कैप शेयरों में निवेश का अवसर
हालिया करेक्शन के बाद बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में दीर्घकालिक निवेशकों के लिए संभावित अवसर बन सकते हैं।
चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौर ने कहा, 'द्वितीयक बाज़ार में बिकवाली और प्राथमिक बाज़ार में निवेश इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह दूर नहीं जा रहे, बल्कि निवेश के अवसरों के चयन में अधिक सावधानी बरत रहे हैं।' उनका मानना है कि यह रुझान अक्टूबर 2026 में भी जारी रह सकता है।
DII की मज़बूत खरीदारी ने संभाला बाज़ार
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को मज़बूत समर्थन दिया। सितंबर 2026 में DII ने नकद इक्विटी बाज़ार में ₹76,030 करोड़ की खरीदारी की, जिसने FPI की बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया। बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों की सतत खरीदारी न होती, तो बाज़ार में और गहरी कमज़ोरी आ सकती थी।
आगे की राह और Q2 नतीजों का महत्व
विश्लेषकों के अनुसार, FPI की बिकवाली में ठहराव या वापसी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे सकारात्मक संकेत आवश्यक होंगे। आगे चलकर बाज़ार की दिशा काफी हद तक वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के कॉर्पोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे और जिनका प्रबंधन भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा, उनके शेयरों में निवेशकों की खरीदारी देखने को मिल सकती है।