क्या सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया भारत में कर्मचारियों की संख्या कम करने जा रही है?
सारांश
Key Takeaways
- सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने लगभग 100 कर्मचारियों की कटौती की योजना बनाई है।
- कंपनी का मुनाफा पिछले वर्ष की तुलना में कम हुआ है।
- मार्केटिंग, विज्ञापन बिक्री, और ब्रॉडकास्ट ऑपरेशंस में नौकरियों में कटौती की जाएगी।
- कंपनी ने सीनियर एग्जीक्यूटिव्स को नई जिम्मेदारियां देने की योजना बनाई है।
- डिजिटल भागीदारी में वृद्धि के कारण ग्रोथ की संभावनाएं हैं।
मुंबई, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (एसपीएनआई), जिसे आधिकारिक तौर पर कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने ऑपरेशंस की लागत को कम करने के लिए लगभग 100 से अधिक कर्मचारियों को निकालने और सीनियर मैनेजमेंट में फेरबदल करने की योजना बनाई है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नौकरी में कटौती का बड़ा हिस्सा सोनीलिव की पोस्ट-प्रोडक्शन टीम से होगा, जिसे अब कंपनी आउटसोर्स करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, मार्केटिंग, विज्ञापन बिक्री, ब्रॉडकास्ट ऑपरेशंस और नेटवर्क इंजीनियरिंग विभागों में भी नौकरियों में कटौती की जाएगी।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब कंपनी लगातार वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। वित्त वर्ष 25 में कंपनी का मुनाफा 456 करोड़ रुपए रह गया है, जो कि एक वर्ष पहले 843 करोड़ रुपए था। आय में लगभग 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक टीवी की व्यूअरशिप में गिरावट और डिजिटल माध्यमों से आय की कमी के कारण कंपनियों की स्थिरता पर संकट बना हुआ है।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कंपनी ने महीने के अंत तक एक नया ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर लागू करने के लिए सीनियर एग्जीक्यूटिव्स को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने की योजना बनाई है।
अगस्त 2024 में गौरव बनर्जी के सीईओ बनने के बाद, यह आने वाला ऑर्गनाइजेशनल बदलाव और छंटनी पहला बड़ा रणनीतिक रीअलाइनमेंट होगा।
पिछले दो सालों में कंपनी के कई सीनियर लोगों ने इस्तीफा दिया है, जिनमें पूर्व सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के हेड नीरज व्यास, टीवी एड सेल्स हेड संदीप मेहरोत्रा, और हाल ही में सोनीलिव के हेड दानिश खान शामिल हैं।
सोनी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी जिओसिनेमा और जीएंटरटेनमेंट ने भी मुनाफे को बढ़ाने के लिए हाल के दिनों में ऐसे ही कदम उठाए हैं।
पीडब्ल्यूसी इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ग्रोथ बढ़ती डिजिटल भागीदारी, बड़ी युवा आबादी, बढ़ते ब्रॉडबैंड पहुंच और ऑनलाइन कंटेंट की अधिक खपत के कारण होगी।