3 अक्टूबर 2026
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रायलसीमा में ₹1 लाख करोड़ का ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब, CM नायडू ने मदनपल्ले में रखी आधारशिला

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रायलसीमा में ₹1 लाख करोड़ का ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब, CM नायडू ने मदनपल्ले में रखी आधारशिला

सारांश

रायलसीमा की पहचान हमेशा सूखे से रही है — अब चंद्रबाबू नायडू इसे बदलने निकले हैं। ₹1 लाख करोड़ के ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब से 10 जिले, 9.6 लाख किसान और 435 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य — यह आंध्र प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा कृषि दांव है।

मुख्य बातें

CM चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2 अक्टूबर 2026 को मदनपल्ले में ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की आधारशिला रखी।
परियोजना में कुल ₹1 लाख करोड़ का निवेश; केंद्र सरकार ₹40,352 करोड़ देगी, निजी क्षेत्र से ₹60,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य।
आंध्र प्रदेश के 10 जिलों , 303 मंडलों और 5,869 गाँवों में 201 क्लस्टरों के ज़रिए क्रियान्वयन।
बागवानी उत्पादन 222 लाख टन से बढ़ाकर 435 लाख टन करने का लक्ष्य; 9.6 लाख किसान प्रत्यक्ष लाभार्थी।
खेती का क्षेत्र 8.41 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 14.41 लाख हेक्टेयर करने की योजना।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 2 अक्टूबर 2026 को अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले में ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की आधारशिला रखते हुए ऐलान किया कि ₹1 लाख करोड़ के निवेश से विकसित होने वाला यह केंद्र रायलसीमा को सूखाग्रस्त भूमि से समृद्धि की भूमि में बदल देगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मिलकर नायडू ने इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर का भी शुभारंभ किया, जो इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

परियोजना का ढाँचा और निवेश

ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। कुल ₹1 लाख करोड़ के अनुमानित निवेश में से केंद्र सरकार ₹40,352 करोड़ का योगदान देगी, जबकि शेष ₹60,000 करोड़ निजी क्षेत्र से जुटाने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना अनंतपुर, अन्नामय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंद्याल, श्री सत्य साईं, तिरूपति, कडप्पा, प्रकाशम और मार्कापुरम — कुल 10 जिलों — को कवर करेगी।

इन जिलों के 303 मंडलों और 5,869 गाँवों में 201 क्लस्टरों के माध्यम से विकास कार्य संचालित होंगे। सरकार की योजना बागवानी की मौजूदा खेती के क्षेत्र को 8.41 लाख हेक्टेयर से 6 लाख हेक्टेयर और बढ़ाकर कुल 14.41 लाख हेक्टेयर करने की है।

किसानों पर प्रभाव और उत्पादन लक्ष्य

परियोजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी उत्पादन को वर्तमान 222 लाख टन से बढ़ाकर 435 लाख टन तक पहुँचाना है। इससे 9.6 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। इसके अलावा, 9 लाख एकड़ का अतिरिक्त अय्याकट (कमांड एरिया) विकसित किया जाएगा और 4.3 लाख एकड़ में सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

गौरतलब है कि रायलसीमा का यह क्षेत्र वर्षों से अनियमित वर्षा और सूखे की मार झेलता रहा है, जिसके कारण यहाँ के किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे हैं। यह परियोजना उस निर्भरता को तोड़ने का प्रयास है।

मुख्यमंत्री का संबोधन

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि सरकार रायलसीमा के किसानों की किस्मत बदलने के अपने वादे को पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि रायलसीमा के किसान अब सेब और स्ट्रॉबेरी से लेकर केले, एवोकाडो, कीवी और खजूर तक सब कुछ उगा सकते हैं। नायडू ने विश्वास जताया कि ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के साथ रायलसीमा एक वैश्विक 'फलों के कटोरे' के रूप में उभरेगा।

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने भी इस अवसर पर जनसभा को संबोधित किया, जो इस परियोजना के प्रति राज्य सरकार की व्यापक राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

क्या होगा आगे

परियोजना के तीन चरणों में क्रियान्वयन की समयसीमा और प्रत्येक क्लस्टर के लिए विस्तृत कार्य-योजना आने वाले महीनों में जारी होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य, दोनों कृषि आय को दोगुना करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। निजी निवेशकों की भागीदारी और उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण पर नज़र रखना अब इस परियोजना की सफलता की कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा निजी क्षेत्र के ₹60,000 करोड़ के निवेश को ज़मीन पर उतारने में होगी — क्योंकि कृषि परियोजनाओं में निजी पूंजी खींचना हमेशा सबसे कठिन कड़ी रही है। 201 क्लस्टरों में समन्वय और 10 जिलों में एक साथ क्रियान्वयन एक जटिल प्रशासनिक चुनौती है जिसका अनुभव राज्य को अभी हासिल करना है। यह भी उल्लेखनीय है कि बागवानी उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य तभी अर्थपूर्ण होगा जब कोल्ड चेन, प्रसंस्करण और निर्यात बुनियादी ढाँचे में समानांतर निवेश हो — जिसका अभी कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रायलसीमा ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब क्या है?
यह आंध्र प्रदेश सरकार की ₹1 लाख करोड़ की परियोजना है, जिसकी आधारशिला 2 अक्टूबर 2026 को मदनपल्ले में रखी गई। इसका उद्देश्य रायलसीमा के 10 जिलों में बागवानी को बढ़ावा देकर क्षेत्र को कृषि समृद्धि के केंद्र के रूप में विकसित करना है।
इस परियोजना में कितना निवेश होगा और कहाँ से आएगा?
कुल ₹1 लाख करोड़ के निवेश में केंद्र सरकार ₹40,352 करोड़ देगी और निजी क्षेत्र से ₹60,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य है। परियोजना तीन चरणों में लागू होगी।
इस परियोजना से कितने किसानों को फायदा होगा?
परियोजना से 9.6 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। बागवानी उत्पादन वर्तमान 222 लाख टन से बढ़ाकर 435 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब कितने जिलों और गाँवों में फैला होगा?
यह परियोजना अनंतपुर, अन्नामय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंद्याल, श्री सत्य साईं, तिरूपति, कडप्पा, प्रकाशम और मार्कापुरम सहित 10 जिलों को कवर करेगी। 303 मंडलों के 5,869 गाँवों में 201 क्लस्टरों के ज़रिए काम होगा।
रायलसीमा में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाएंगी?
CM नायडू के अनुसार, इस परियोजना के तहत रायलसीमा के किसान सेब, स्ट्रॉबेरी, केला, एवोकाडो, कीवी और खजूर जैसी विविध फसलें उगा सकेंगे। सरकार का लक्ष्य रायलसीमा को वैश्विक 'फलों के कटोरे' के रूप में स्थापित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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