रायलसीमा में ₹1 लाख करोड़ का ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब, CM नायडू ने मदनपल्ले में रखी आधारशिला
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 2 अक्टूबर 2026 को अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले में ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की आधारशिला रखते हुए ऐलान किया कि ₹1 लाख करोड़ के निवेश से विकसित होने वाला यह केंद्र रायलसीमा को सूखाग्रस्त भूमि से समृद्धि की भूमि में बदल देगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मिलकर नायडू ने इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर का भी शुभारंभ किया, जो इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
परियोजना का ढाँचा और निवेश
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। कुल ₹1 लाख करोड़ के अनुमानित निवेश में से केंद्र सरकार ₹40,352 करोड़ का योगदान देगी, जबकि शेष ₹60,000 करोड़ निजी क्षेत्र से जुटाने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना अनंतपुर, अन्नामय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंद्याल, श्री सत्य साईं, तिरूपति, कडप्पा, प्रकाशम और मार्कापुरम — कुल 10 जिलों — को कवर करेगी।
इन जिलों के 303 मंडलों और 5,869 गाँवों में 201 क्लस्टरों के माध्यम से विकास कार्य संचालित होंगे। सरकार की योजना बागवानी की मौजूदा खेती के क्षेत्र को 8.41 लाख हेक्टेयर से 6 लाख हेक्टेयर और बढ़ाकर कुल 14.41 लाख हेक्टेयर करने की है।
किसानों पर प्रभाव और उत्पादन लक्ष्य
परियोजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी उत्पादन को वर्तमान 222 लाख टन से बढ़ाकर 435 लाख टन तक पहुँचाना है। इससे 9.6 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। इसके अलावा, 9 लाख एकड़ का अतिरिक्त अय्याकट (कमांड एरिया) विकसित किया जाएगा और 4.3 लाख एकड़ में सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
गौरतलब है कि रायलसीमा का यह क्षेत्र वर्षों से अनियमित वर्षा और सूखे की मार झेलता रहा है, जिसके कारण यहाँ के किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे हैं। यह परियोजना उस निर्भरता को तोड़ने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री का संबोधन
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि सरकार रायलसीमा के किसानों की किस्मत बदलने के अपने वादे को पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि रायलसीमा के किसान अब सेब और स्ट्रॉबेरी से लेकर केले, एवोकाडो, कीवी और खजूर तक सब कुछ उगा सकते हैं। नायडू ने विश्वास जताया कि ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के साथ रायलसीमा एक वैश्विक 'फलों के कटोरे' के रूप में उभरेगा।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने भी इस अवसर पर जनसभा को संबोधित किया, जो इस परियोजना के प्रति राज्य सरकार की व्यापक राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
क्या होगा आगे
परियोजना के तीन चरणों में क्रियान्वयन की समयसीमा और प्रत्येक क्लस्टर के लिए विस्तृत कार्य-योजना आने वाले महीनों में जारी होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य, दोनों कृषि आय को दोगुना करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। निजी निवेशकों की भागीदारी और उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण पर नज़र रखना अब इस परियोजना की सफलता की कुंजी होगी।