निर्मला सीतारमण का ऐलान: रायलसीमा को ₹1 लाख करोड़ के हॉर्टिकल्चर हब में बदलने की योजना, ग्रामीण आजीविका पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में निवेश तेज़ कर रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने रायलसीमा को एक विश्वस्तरीय ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी।
रायलसीमा के लिए ₹1 लाख करोड़ की परियोजना
वित्त मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ₹1 लाख करोड़ की एक महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना की है, जो रायलसीमा के 8 जिलों और 2 पड़ोसी जिलों सहित कुल 10 जिलों को कवर करेगी। इस परियोजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को 'रत्नाला सीमा' — यानी समृद्धि की भूमि — में बदलना है।
सीतारमण ने कहा कि इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के साथ-साथ विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB) और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त होगा। परियोजना के तहत आधुनिक कृषि तकनीकें अपनाई जाएंगी, जल उपयोग दक्षता बढ़ाई जाएगी और कृषि उत्पादकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डेयरी और मत्स्य पालन को मिलेगी नई ऊर्जा
वित्त मंत्री ने कहा कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की तैनाती और विभिन्न जिलों में पशु चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने से डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूती मिल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण भारत में कृषि-आधारित आय विविधीकरण की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से कृषि सेवाओं की पहुँच का विस्तार हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
जल संरक्षण और जलवायु-लचीली खेती पर ज़ोर
सीतारमण ने जल संरक्षण को कृषि विकास की प्रमुख आवश्यकता बताया और कहा कि सरकार जल संकट वाले क्षेत्रों में 'हर बूंद, अधिक फसल' के सिद्धांत पर काम कर रही है। इसके लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों और तकनीकी हस्तक्षेपों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक रूप से विकसित नई बीज किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो अत्यधिक गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम हैं।
किसान-केंद्रित योजनाओं का उल्लेख
वित्त मंत्री ने केंद्र की कई किसान-केंद्रित योजनाओं का ज़िक्र किया। गोबरधन योजना के तहत ग्रामीण अपशिष्ट को स्वच्छ बायोगैस में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और अतिरिक्त आय दोनों के अवसर पैदा हो रहे हैं। पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उन्हें भरोसेमंद और कम लागत वाली बिजली मिल रही है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से सुरक्षा प्रदान कर रही है और कृषि जोखिमों को कम करने में सहायक है।
आगे की राह
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण रोज़गार सृजन, जल संरक्षण, तकनीक-आधारित खेती और कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है। कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में समन्वित विकास से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।