आईएमएफ ने भारत की 2027 विकास दर अनुमान बढ़ाकर 7% किया, अर्थशास्त्रियों ने बताई ये वजहें
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2027 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.4 प्रतिशत था। यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब पश्चिम में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और नीतिगत परिपक्वता का प्रमाण है।
अर्थशास्त्री मिताली नीलकोर का विश्लेषण
अर्थशास्त्री मिताली नीलकोर ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद आईएमएफ द्वारा विकास अनुमान में वृद्धि देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है। उनके अनुसार, इस तेज़ विकास दर के पीछे सबसे बड़ा कारण बीते 10 वर्षों में बुनियादी ढाँचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर किया गया व्यापक निवेश है।
नीलकोर ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका की ओर से लगातार टैरिफ और व्यापारिक व्यवधानों के बावजूद भारत ने अपने ट्रेड बास्केट में विविधता लाकर खुद को सुरक्षित रखा है। यूके, ओमान और अन्य देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) ने इस प्रक्रिया को और मजबूत किया है।
अर्थशास्त्री विनोद रावल की राय
अर्थशास्त्री विनोद रावल ने आईएमएफ के इस अनुमान को देश के लिए 'गर्व की बात' बताया। उनके अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रही है और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति सुदृढ़ बनी हुई है।
रावल ने कहा कि सरकार के ₹12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर राहत के फैसले से उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सकारात्मक असर समग्र अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
सेमीकंडक्टर और नए तकनीकी क्षेत्रों की भूमिका
रावल ने विशेष रूप से देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर के तेज़ी से उभरने का उल्लेख किया और कहा कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देते हुए कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि घरेलू माँग में मजबूती, सुचिंतित सरकारी नीतियाँ और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में हो रहा विस्तार — तीनों मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक हैं।
वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर धीमी पड़ रही है, ऐसे में आईएमएफ द्वारा भारत के अनुमान में उर्ध्वगामी संशोधन विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह प्रदर्शन केवल अल्पकालिक नहीं है — बल्कि संरचनात्मक सुधारों, व्यापार विविधीकरण और घरेलू उपभोग में मज़बूती के संयोजन से उपजा है। आगामी वर्षों में भारत की विकास गाथा और अधिक सुदृढ़ होने की संभावना जताई जा रही है।