भारत के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में 2029 तक ₹4.2 लाख करोड़ निवेश की संभावना: ब्रिकवर्क रेटिंग्स
सारांश
मुख्य बातें
भारत के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वर्ष 2029 तक ₹4.2 लाख करोड़ तक का निवेश आने का अनुमान है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की 29 जून 2026 को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है, जो रिकॉर्ड यात्री संख्या, नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और सरकारी नीतिगत समर्थन को इस उछाल का प्रमुख कारण मानती है।
निवेश का ब्योरा
रिपोर्ट के अनुसार, कुल अनुमानित निवेश में वित्त वर्ष 2026 तक घोषित और क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं की ₹3.7 लाख करोड़ की हिस्सेदारी है। इसके अतिरिक्त, 2029 तक शुरू होने वाली नई परियोजनाओं में ₹50,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश होने की संभावना जताई गई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय विमानन उद्योग लगातार विस्तार की राह पर है और टियर-2 शहरों में एयरपोर्ट नेटवर्क तेज़ी से फैल रहा है।
परिचालन आय और मार्जिन में सुधार
रिपोर्ट में बताया गया है कि रिकॉर्ड यात्री संख्या और एयरपोर्ट शुल्क (टैरिफ) में बढ़ोतरी के कारण वित्त वर्ष 2026 में एयरपोर्ट सेक्टर की परिचालन आय में मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई। एयरपोर्ट ऑपरेटरों का परिचालन मार्जिन वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 53.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 44.4 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2027 में यह मार्जिन और बढ़कर 54.5 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है, क्योंकि विस्तारित टर्मिनलों से रिटेल, व्यावसायिक सेवाओं और शुल्क से आय बढ़ेगी।
घरेलू यात्रा की रफ़्तार और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियाँ
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर (रेटिंग्स) नीरज राठी ने कहा कि घरेलू हवाई यात्रा में मज़बूत माँग, टियर-2 शहरों में नेटवर्क विस्तार और नवी मुंबई तथा जेवर जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के संचालन शुरू होने से हवाई यात्री यातायात में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। उनके अनुसार, यह घरेलू बढ़त अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में आई सुस्ती के असर को काफी हद तक संतुलित कर देगी।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की वृद्धि फिलहाल धीमी पड़ी है — उड़ानों पर प्रतिबंध, ईंधन की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री संख्या में 38 से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले पश्चिम एशिया की है, जिससे इस क्षेत्र की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय विमानन उद्योग पर पड़ रहा है।
वित्त वर्ष 2027 की संभावनाएँ
नीरज राठी ने कहा कि इन चुनौतियों के कारण वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में वृद्धि सीमित रह सकती है। हालाँकि, दूसरी छमाही में शीतकालीन यात्रा सीजन के लिए नई उड़ानें शुरू होने और नए एयरपोर्ट पूरी क्षमता से संचालन में आने के बाद यात्री संख्या और माँग में तेज़ सुधार देखने को मिल सकता है।
सरकारी नीति और क्रेडिट आउटलुक
रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरपोर्ट सेक्टर को सरकार की उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना से बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2036 तक ₹2.88 लाख करोड़ के पूँजीगत निवेश का प्रावधान है। इसके अलावा, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति भी इस क्षेत्र में निवेश की गति को और तेज़ करेगी। सेक्टर का क्रेडिट आउटलुक स्थिर बताया गया है, हालाँकि नए टर्मिनलों और विस्तार परियोजनाओं पर भारी पूँजी खर्च के कारण निकट भविष्य में नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) पर दबाव बने रहने की आशंका है।