भारत-अरब व्यापार 20 वर्षों में $500 अरब तक पहुँचने की उम्मीद, दिसंबर में दिल्ली में बड़ा कॉन्क्लेव
सारांश
मुख्य बातें
आईएसीसीआईए (भारत और अरब देशों का वाणिज्य, उद्योग और कृषि चैंबर) के महासचिव वाइल अव्वाद ने 14 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत और अरब देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार 150 अरब डॉलर से अधिक है, और अगले 10 से 20 वर्षों में इसे 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने की उम्मीद है। अव्वाद के अनुसार, यह लक्ष्य तभी संभव होगा जब भारत सरकार अरब निवेशकों को सही मंच और आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करे।
भारत अरब बिजनेस कॉन्क्लेव 2026
अव्वाद ने बताया कि 18-19 दिसंबर 2026 के बीच नई दिल्ली में 'भारत अरब बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 22 अरब देशों को आमंत्रित किया गया है। उनका कहना है कि यह आयोजन भारत और अरब जगत के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊँचाई देने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
उन्होंने कहा, 'कई मौके मौजूद हैं और भारत सरकार कई सेक्टर खोल रही है। अगर हम निवेशकों को सही प्लेटफॉर्म दें और भारत सरकार अच्छे इंसेंटिव एवं प्रोजेक्ट दे, तो मुझे यकीन है कि यह बहुत सफल होगा।'
अरब अर्थव्यवस्थाओं पर संकट का साया
यह कॉन्क्लेव ऐसे समय में हो रहा है जब अरब देशों की अर्थव्यवस्थाएँ गंभीर चुनौतियों से जूझ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी अक्टूबर 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने के कारण 2026 में मध्य पूर्व और मध्य एशिया क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 3.7 प्रतिशत से गिरकर -0.3 प्रतिशत रह सकती है।
गौरतलब है कि ऊर्जा उत्पादन और परिवहन पर निर्भर छोटे खाड़ी देशों को सर्वाधिक नुकसान होने का अनुमान है। आईएमएफ के आँकड़ों के अनुसार, 2026 में कुवैत की अर्थव्यवस्था 16.7 प्रतिशत, इराक की 16 प्रतिशत, कतर की 15.6 प्रतिशत और बहरीन की 11.3 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है।
2027 में तेज़ आर्थिक वापसी का अनुमान
आईएमएफ का मानना है कि यह संकट अस्थायी है। 2027 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत तक लौट सकती है। देश-स्तर पर देखें तो इराक 19 प्रतिशत, कतर 18.8 प्रतिशत, कुवैत 17.1 प्रतिशत और बहरीन 13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर सकते हैं।
यह संभावित पुनरुद्धार अरब निवेशकों के लिए भारत को एक स्थिर और आकर्षक गंतव्य के रूप में और अधिक प्रासंगिक बनाता है, क्योंकि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता लाने और नए बाज़ार तलाशने की जद्दोजहद में हैं।
भारत के लिए रणनीतिक अवसर
आलोचकों का कहना है कि भारत को इस भू-आर्थिक उथल-पुथल का लाभ उठाने के लिए नीतिगत स्तर पर त्वरित कदम उठाने होंगे। अव्वाद ने संकेत दिया कि अरब देशों के बड़े निवेशक भारत में बड़े पैमाने पर निवेश के इच्छुक हैं, बशर्ते उन्हें पारदर्शी नीतिगत माहौल और ठोस परियोजनाएँ मिलें। दिसंबर 2026 का कॉन्क्लेव इस दिशा में पहली ठोस परीक्षा होगी।