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भारत में डील गतिविधि तेज: Q3 FY2026 में 696 सौदे, कुल वैल्यू $36.9 अरब — ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट

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भारत में डील गतिविधि तेज: Q3 FY2026 में 696 सौदे, कुल वैल्यू $36.9 अरब — ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट

सारांश

वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत के डील बाज़ार ने 696 सौदों और $36.9 अरब की वैल्यू के साथ मज़बूती दिखाई। 60 IPO से रिकॉर्ड $9 अरब जुटाए गए और इनबाउंड निवेश आठ साल के शीर्ष पर पहुँचा — वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।

मुख्य बातें

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार Q3 FY2026 में कुल 696 सौदे हुए, जिनकी वैल्यू $36.9 अरब डॉलर रही।
IPO और QIP को छोड़कर 608 M&A और PE सौदे दर्ज हुए; सौदों की संख्या में तिमाही आधार पर 8 प्रतिशत वृद्धि।
60 आईपीओ के ज़रिए $9 अरब डॉलर जुटाए गए — किसी भी तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा IPO फंड जुटाव।
इनबाउंड निवेश 2.6 गुना बढ़कर $4.2 अरब डॉलर पहुँचा — पिछले 8 वर्षों का सर्वोच्च तिमाही वॉल्यूम ।
ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र $3 अरब डॉलर के साथ पहली बार 2026 में शीर्ष सेक्टर बना।
वॉल्यूम के लिहाज़ से रिटेल एवं कंज्यूमर सबसे सक्रिय रहा — 113 सौदे , वैल्यू $948 मिलियन डॉलर ।

भारत में संस्थागत डील बाज़ार ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY2026) में उल्लेखनीय गति दिखाई। ग्रांट थॉर्नटन भारत की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, विलय एवं अधिग्रहण (M&A), प्राइवेट इक्विटी (PE) और पब्लिक मार्केट्स को मिलाकर इस तिमाही में कुल 696 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी संयुक्त वैल्यू $36.9 अरब डॉलर रही। सौदों की संख्या में तिमाही-दर-तिमाही 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत देती है।

M&A और PE गतिविधि का विस्तृत चित्र

आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को छोड़कर Q3 में 608 M&A और PE सौदे संपन्न हुए, जिनकी कुल वैल्यू $23.1 अरब डॉलर रही। सौदों की संख्या तिमाही आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ी, हालाँकि वैल्यू में 36 प्रतिशत की गिरावट आई — जिसकी वजह पिछली तिमाही का ऊँचा आधार रहा।

M&A गतिविधियाँ मुख्य रूप से वॉल्यूम-केंद्रित रहीं। इस दौरान 255 M&A सौदे हुए, जिनकी कुल वैल्यू $13.2 अरब डॉलर रही। संख्या में तिमाही आधार पर 7 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि Q2 के उच्च आधार के कारण वैल्यू में 53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। Q3 में $5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले सौदों की कुल वैल्यू $7.9 अरब डॉलर रही, जिसमें सबसे बड़ा एकल सौदा $1.9 अरब डॉलर का था — Q2 के $11.8 अरब डॉलर के शीर्ष स्तर से कम।

इनबाउंड निवेश में ऐतिहासिक उछाल

इनबाउंड निवेश के मोर्चे पर इस तिमाही एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले आठ वर्षों का सबसे ऊँचा तिमाही सौदा वॉल्यूम रहा। इनबाउंड डील वैल्यू तिमाही आधार पर 2.6 गुना बढ़कर $4.2 अरब डॉलर तक पहुँच गई, जो विदेशी निवेशकों की भारत में गहरी दिलचस्पी को दर्शाती है।

इसके विपरीत, आउटबाउंड निवेश में कुछ नरमी देखी गई। Q2 की तुलना में आउटबाउंड डील वैल्यू 74 प्रतिशत घटकर $6.1 अरब डॉलर रह गई।

पब्लिक मार्केट्स में रिकॉर्ड IPO फंड जुटाव

पब्लिक मार्केट गतिविधियाँ भी इस तिमाही मज़बूत रहीं। 60 आईपीओ के ज़रिए $9 अरब डॉलर जुटाए गए — जो किसी भी एकल तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा IPO फंड जुटाव है। इसके अलावा 28 QIP के माध्यम से $4.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूँजी बाज़ार में आई। गौरतलब है कि इस रिकॉर्ड जुटाव ने भारतीय इक्विटी बाज़ार की गहराई और परिपक्वता को रेखांकित किया है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन: ऊर्जा सबसे आगे

सेक्टर-आधारित विश्लेषण में ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र पहली बार 2026 में शीर्ष क्षेत्र के रूप में उभरा। इसमें 38 सौदे हुए जिनकी वैल्यू $3 अरब डॉलर रही — एक ऐसे दौर में जब भारत की ऊर्जा संक्रमण नीतियाँ वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट क्षेत्र में 26 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी वैल्यू $2.8 अरब डॉलर रही और सौदों की संख्या तिमाही आधार पर 30 प्रतिशत बढ़ी। वॉल्यूम के लिहाज़ से रिटेल एवं कंज्यूमर सेक्टर सबसे सक्रिय रहा, जहाँ 113 सौदे हुए और उनकी कुल वैल्यू $948 मिलियन डॉलर रही।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ग्रांट थॉर्नटन भारत की ग्रोथ पार्टनर शांति विजेता ने कहा कि 'विभिन्न माध्यमों में बढ़ती गतिविधियाँ इस बात का संकेत हैं कि भारत में निवेशकों का भरोसा कायम है और विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों की व्यापकता मौजूद है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता के बावजूद भारत एक स्थिर निवेश गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

आगे चलकर, IPO पाइपलाइन और PE फंड की बढ़ती तैनाती यह संकेत देती है कि Q4 में भी डील गतिविधि की रफ़्तार बनी रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैल्यू में 36 प्रतिशत की गिरावट यह दर्शाती है कि बड़े 'मेगा डील' अभी भी अपवाद हैं, नियम नहीं। IPO बाज़ार का रिकॉर्ड प्रदर्शन उत्साहजनक है, परंतु यह भी देखना होगा कि ये कंपनियाँ लिस्टिंग के बाद दीर्घकालिक मूल्य बना पाती हैं या नहीं। इनबाउंड निवेश में आठ साल का उच्च स्तर भारत की वैश्विक आकर्षण क्षमता की पुष्टि करता है, लेकिन आउटबाउंड निवेश में 74 प्रतिशत की गिरावट बताती है कि भारतीय कंपनियाँ अभी सावधानी से वैश्विक विस्तार कर रही हैं। असली परीक्षा यह होगी कि यह गति Q4 में भी बनी रहती है या मौसमी उछाल साबित होती है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q3 FY2026 में भारत में कितने डील हुए और उनकी कुल वैल्यू क्या थी?
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, Q3 FY2026 में M&A, PE और पब्लिक मार्केट्स को मिलाकर कुल 696 सौदे हुए, जिनकी संयुक्त वैल्यू $36.9 अरब डॉलर रही। सौदों की संख्या तिमाही आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ी।
इस तिमाही IPO बाज़ार का प्रदर्शन कैसा रहा?
Q3 FY2026 में 60 आईपीओ के ज़रिए $9 अरब डॉलर जुटाए गए, जो किसी भी एकल तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा IPO फंड जुटाव है। इसके अतिरिक्त 28 QIP के माध्यम से $4.8 अरब डॉलर की पूँजी जुटाई गई।
इनबाउंड निवेश में इस तिमाही क्या खास रहा?
Q3 FY2026 में इनबाउंड डील वैल्यू तिमाही आधार पर 2.6 गुना बढ़कर $4.2 अरब डॉलर तक पहुँच गई। रिपोर्ट के अनुसार यह पिछले आठ वर्षों का सबसे ऊँचा तिमाही सौदा वॉल्यूम है।
Q3 में कौन सा सेक्टर सबसे बड़ा रहा?
सेक्टर-आधारित विश्लेषण में ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र पहली बार 2026 में शीर्ष स्थान पर रहा, जिसमें 38 सौदे हुए और वैल्यू $3 अरब डॉलर रही। वॉल्यूम के लिहाज़ से रिटेल एवं कंज्यूमर सेक्टर सबसे सक्रिय रहा जहाँ 113 सौदे दर्ज हुए।
M&A गतिविधियों में वैल्यू क्यों घटी, जबकि संख्या बढ़ी?
Q3 में 255 M&A सौदे हुए जो संख्या में 7 प्रतिशत अधिक थे, लेकिन वैल्यू 53 प्रतिशत घटकर $13.2 अरब डॉलर रह गई। इसकी मुख्य वजह Q2 का असाधारण रूप से ऊँचा आधार था, जिसमें बड़े मेगा डील शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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