भारत में डील गतिविधि तेज: Q3 FY2026 में 696 सौदे, कुल वैल्यू $36.9 अरब — ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में संस्थागत डील बाज़ार ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY2026) में उल्लेखनीय गति दिखाई। ग्रांट थॉर्नटन भारत की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, विलय एवं अधिग्रहण (M&A), प्राइवेट इक्विटी (PE) और पब्लिक मार्केट्स को मिलाकर इस तिमाही में कुल 696 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी संयुक्त वैल्यू $36.9 अरब डॉलर रही। सौदों की संख्या में तिमाही-दर-तिमाही 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत देती है।
M&A और PE गतिविधि का विस्तृत चित्र
आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को छोड़कर Q3 में 608 M&A और PE सौदे संपन्न हुए, जिनकी कुल वैल्यू $23.1 अरब डॉलर रही। सौदों की संख्या तिमाही आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ी, हालाँकि वैल्यू में 36 प्रतिशत की गिरावट आई — जिसकी वजह पिछली तिमाही का ऊँचा आधार रहा।
M&A गतिविधियाँ मुख्य रूप से वॉल्यूम-केंद्रित रहीं। इस दौरान 255 M&A सौदे हुए, जिनकी कुल वैल्यू $13.2 अरब डॉलर रही। संख्या में तिमाही आधार पर 7 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि Q2 के उच्च आधार के कारण वैल्यू में 53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। Q3 में $5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले सौदों की कुल वैल्यू $7.9 अरब डॉलर रही, जिसमें सबसे बड़ा एकल सौदा $1.9 अरब डॉलर का था — Q2 के $11.8 अरब डॉलर के शीर्ष स्तर से कम।
इनबाउंड निवेश में ऐतिहासिक उछाल
इनबाउंड निवेश के मोर्चे पर इस तिमाही एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले आठ वर्षों का सबसे ऊँचा तिमाही सौदा वॉल्यूम रहा। इनबाउंड डील वैल्यू तिमाही आधार पर 2.6 गुना बढ़कर $4.2 अरब डॉलर तक पहुँच गई, जो विदेशी निवेशकों की भारत में गहरी दिलचस्पी को दर्शाती है।
इसके विपरीत, आउटबाउंड निवेश में कुछ नरमी देखी गई। Q2 की तुलना में आउटबाउंड डील वैल्यू 74 प्रतिशत घटकर $6.1 अरब डॉलर रह गई।
पब्लिक मार्केट्स में रिकॉर्ड IPO फंड जुटाव
पब्लिक मार्केट गतिविधियाँ भी इस तिमाही मज़बूत रहीं। 60 आईपीओ के ज़रिए $9 अरब डॉलर जुटाए गए — जो किसी भी एकल तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा IPO फंड जुटाव है। इसके अलावा 28 QIP के माध्यम से $4.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूँजी बाज़ार में आई। गौरतलब है कि इस रिकॉर्ड जुटाव ने भारतीय इक्विटी बाज़ार की गहराई और परिपक्वता को रेखांकित किया है।
सेक्टर-वार प्रदर्शन: ऊर्जा सबसे आगे
सेक्टर-आधारित विश्लेषण में ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र पहली बार 2026 में शीर्ष क्षेत्र के रूप में उभरा। इसमें 38 सौदे हुए जिनकी वैल्यू $3 अरब डॉलर रही — एक ऐसे दौर में जब भारत की ऊर्जा संक्रमण नीतियाँ वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट क्षेत्र में 26 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी वैल्यू $2.8 अरब डॉलर रही और सौदों की संख्या तिमाही आधार पर 30 प्रतिशत बढ़ी। वॉल्यूम के लिहाज़ से रिटेल एवं कंज्यूमर सेक्टर सबसे सक्रिय रहा, जहाँ 113 सौदे हुए और उनकी कुल वैल्यू $948 मिलियन डॉलर रही।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ग्रांट थॉर्नटन भारत की ग्रोथ पार्टनर शांति विजेता ने कहा कि 'विभिन्न माध्यमों में बढ़ती गतिविधियाँ इस बात का संकेत हैं कि भारत में निवेशकों का भरोसा कायम है और विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों की व्यापकता मौजूद है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता के बावजूद भारत एक स्थिर निवेश गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।
आगे चलकर, IPO पाइपलाइन और PE फंड की बढ़ती तैनाती यह संकेत देती है कि Q4 में भी डील गतिविधि की रफ़्तार बनी रह सकती है।