रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी उछाल: Q1 2026 में डील गतिविधि 14%25 बढ़कर 32 सौदों पर पहुंची
सारांश
Key Takeaways
- Q1 2026 में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में 32 सौदे हुए, जो सालाना आधार पर 14%25 की वृद्धि है।
- डील की कुल वैल्यू 763 मिलियन डॉलर रही; बड़े सौदों की अनुपस्थिति में वैल्यू में हल्की नरमी आई।
- M&A सेगमेंट 19 सौदों के साथ शीर्ष पर रहा, वैल्यू 305 मिलियन डॉलर रही।
- PE-VC सेगमेंट में 13 सौदे और 458 मिलियन डॉलर — एक साल की सर्वाधिक तिमाही मात्रा।
- निवेशक छोटे-मझोले सौदों और REIT आधारित आय-उत्पादक संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- ग्रांट थॉर्नटन की शबाला शिंदे के अनुसार घरेलू निवेश मजबूत और वाणिज्यिक संपत्तियों में रुझान बढ़ा।
भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान डील गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। ग्रांट थॉर्नटन भारत की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में कुल 32 सौदे संपन्न हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में हुए 28 सौदों की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक हैं। यह रिपोर्ट 24 अप्रैल 2026 को जारी की गई।
डील संख्या में वृद्धि, लेकिन वैल्यू में नरमी
हालांकि सौदों की संख्या में बढ़ोतरी उत्साहजनक है, लेकिन डील की कुल वैल्यू मार्च तिमाही में 763 मिलियन डॉलर पर रही। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इस दौरान कोई बड़ा मेगा-डील न होने के कारण कुल मूल्य में हल्की गिरावट आई। इससे पिछली तिमाही में डील की संख्या 26 थी, यानी तिमाही-दर-तिमाही भी सुधार देखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संख्या में वृद्धि और वैल्यू में कमी का यह संयोजन बाज़ार में एक नई प्रवृत्ति का संकेत देता है — निवेशक अब छोटे और मध्यम आकार के सौदों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो जोखिम प्रबंधन की दृष्टि से अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।
विलय-अधिग्रहण सेगमेंट शीर्ष पर, PE-VC में भी रिकॉर्ड
विलय और अधिग्रहण (M&A) सेगमेंट इस तिमाही में 19 सौदों के साथ सबसे आगे रहा। हालांकि, बड़े सौदों की अनुपस्थिति में इस सेगमेंट की कुल वैल्यू घटकर 305 मिलियन डॉलर रह गई।
प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल (PE-VC) क्षेत्र में 13 सौदे दर्ज हुए, जिनका कुल मूल्य 458 मिलियन डॉलर रहा। यह पिछले एक वर्ष में किसी भी तिमाही की सर्वाधिक मात्रा है। हालांकि, पिछली तिमाही के बड़े सौदों की तुलना में मूल्य में 71 प्रतिशत की क्रमिक गिरावट भी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों की राय: घरेलू निवेश का दबदबा
ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर और रियल एस्टेट उद्योग प्रमुख शबाला शिंदे ने कहा कि इस तिमाही में मध्यम आकार की आय-उत्पादक संपत्तियों की ओर स्पष्ट रुझान देखा गया। उन्होंने बताया कि घरेलू गतिविधि का दबदबा बना रहा और निजी इक्विटी पूंजी प्रमुख निवेश स्रोत बनी रही।
शिंदे ने यह भी कहा कि वाणिज्यिक संपत्तियों, विशेष रूप से कार्यालय और खुदरा प्लेटफॉर्मों के प्रति मजबूत रुझान देखा गया, जो स्थिर यील्ड और नकदी प्रवाह से समर्थित है। इसके साथ ही आरईआईटी (REIT) नेतृत्व वाले लेनदेन ने उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियों में संस्थागत विश्वास को और मजबूत किया है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सतर्क निवेशक
शिंदे ने आगे कहा कि वैश्विक व्यापारिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद सौदों का माहौल लचीला बना रहा। निवेशक अधिक चयनात्मक दृष्टिकोण अपना रहे हैं और संपत्ति-स्तर के प्रदर्शन व निष्पादन की निश्चितता को प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह प्रवृत्ति वैश्विक स्तर पर भी देखी जा रही है जहां अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और ब्याज दरों की अनिश्चितता के बीच निवेशक रक्षात्मक रणनीति अपना रहे हैं। भारत का रियल एस्टेट बाज़ार इस परिप्रेक्ष्य में अपेक्षाकृत स्थिर दिख रहा है।
आगे की राह: क्या रहेगा रुझान?
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में यदि वैश्विक अनिश्चितता कम होती है और घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है, तो बड़े सौदों की वापसी संभव है। आरईआईटी बाज़ार के विस्तार और सरकार की बुनियादी ढांचे में निवेश की नीतियां भी रियल एस्टेट सेक्टर को गति दे सकती हैं। अगली तिमाही के आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि यह सतर्क लेकिन सक्रिय निवेश रुझान कितना टिकाऊ है।