भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अप्रैल 2026 में भारत में $22.8 अरब के 220 सौदे, M&A वैल्यू मई 2022 के बाद सर्वाधिक

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भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अप्रैल 2026 में भारत में $22.8 अरब के 220 सौदे, M&A वैल्यू मई 2022 के बाद सर्वाधिक

सारांश

भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत का डील बाज़ार अप्रैल 2026 में दमदार रहा — $22.8 अरब के 220 सौदे, M&A वैल्यू मई 2022 के बाद सर्वोच्च, और भारतीय कंपनियों के $17.7 अरब के आउटबाउंड अधिग्रहण। ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट बताती है कि भारत वैश्विक अनिश्चितता में भी निवेश का मज़बूत केंद्र बना हुआ है।

मुख्य बातें

अप्रैल 2026 में भारत में 22.8 अरब डॉलर मूल्य के 220 सौदे दर्ज किए गए।
M&A सौदों की वैल्यू 18.7 अरब डॉलर रही — मई 2022 के बाद सर्वाधिक मासिक M&A वैल्यू।
महीने-दर-महीने M&A वैल्यू में करीब 1,000 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
21 आउटबाउंड ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए 17.7 अरब डॉलर का निवेश — भारतीय कंपनियों की वैश्विक महत्वाकांक्षा का संकेत।
फार्मास्युटिकल सेक्टर डील वैल्यू में अव्वल; रियल एस्टेट पहली बार M&A वॉल्यूम में शीर्ष पर।
6 IPO से 45 करोड़ डॉलर और 2 QIP से 54.8 करोड़ डॉलर जुटाए गए।

भारत के डील बाज़ार ने अप्रैल 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया — वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद देश में कुल 220 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी संयुक्त वैल्यू 22.8 अरब डॉलर रही। ग्रांट थॉर्नटन भारत की 13 मई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A) गतिविधियाँ डील मार्केट की मुख्य चालक शक्ति रहीं।

M&A गतिविधियाँ: मई 2022 के बाद सर्वोच्च स्तर

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में 18.7 अरब डॉलर मूल्य के 103 M&A सौदे दर्ज किए गए — जो मई 2022 के बाद किसी एकल महीने में सबसे अधिक M&A वैल्यू है। महीने-दर-महीने आधार पर M&A सौदों के मूल्य में करीब 1,000 प्रतिशत की उछाल आई, जबकि डील वॉल्यूम में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। गौरतलब है कि 5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के बड़े सौदों ने अकेले 17.4 अरब डॉलर यानी कुल डील वैल्यू का लगभग 80 प्रतिशत योगदान दिया।

आउटबाउंड सौदे: भारतीय कंपनियों की वैश्विक महत्वाकांक्षा

आउटबाउंड गतिविधियाँ इस महीने डील मार्केट में सबसे प्रभावशाली रहीं। अप्रैल में 17.7 अरब डॉलर मूल्य के 21 आउटबाउंड ट्रांज़ैक्शन हुए। ग्रांट थॉर्नटन भारत की शांति विजेता के अनुसार, भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए वैश्विक अधिग्रहण उनकी बढ़ती रणनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव के कारण कई अन्य उभरते बाज़ारों में निवेश गतिविधियाँ सुस्त पड़ी हैं।

प्राइवेट इक्विटी: कम सौदे, बड़ा निवेश

प्राइवेट इक्विटी (PE) निवेश के मामले में अप्रैल में 3.2 अरब डॉलर मूल्य के 109 सौदों की घोषणा की गई। हालाँकि PE डील वॉल्यूम घटकर साल के सबसे निचले मासिक स्तर पर आ गई, वहीं डील वैल्यू इस साल अब तक के दूसरे सर्वोच्च स्तर पर बनी रही। रिपोर्ट के अनुसार यह रुझान कम लेकिन बड़े लेन-देन की ओर स्पष्ट बदलाव का संकेत देता है।

पूंजी बाज़ार: IPO और QIP में सक्रियता

सार्वजनिक पूंजी बाज़ार भी अप्रैल में सक्रिय रहे। 6 IPO के ज़रिए 45 करोड़ डॉलर जुटाए गए, जबकि 2 क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) से 54.8 करोड़ डॉलर की पूँजी जुटाई गई। शांति विजेता के अनुसार, IPO और QIP में यह लगातार सक्रियता भारत के मज़बूत पूंजी बाज़ार तंत्र को रेखांकित करती है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन

फार्मास्युटिकल सेक्टर डील वैल्यू के लिहाज़ से सबसे आगे रहा। इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बड़े सौदों के ज़रिए मज़बूत गतिविधियाँ देखी गईं। डील मात्रा के हिसाब से रिटेल एवं कंज्यूमर और IT एवं ITES सेक्टर सबसे सक्रिय रहे। उल्लेखनीय रूप से, रियल एस्टेट सेक्टर पहली बार M&A वॉल्यूम में शीर्ष पर उभरा और ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन सेक्टर के साथ संयुक्त रूप से 16-16 सौदों के साथ पहले स्थान पर रहा। यह प्रवृत्ति भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ती संस्थागत रुचि की ओर इशारा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुल वैल्यू का 80 प्रतिशत मात्र कुछ बड़े सौदों से आया — जो बाज़ार की व्यापकता नहीं, बल्कि उसकी संकेंद्रित प्रकृति को उजागर करता है। M&A में 1,000 प्रतिशत की उछाल आँकड़े में चौंकाने वाली है, लेकिन यह पिछले महीने के असाधारण रूप से निचले आधार का भी परिणाम हो सकती है। आउटबाउंड अधिग्रहणों में तेज़ी भारतीय कॉर्पोरेट जगत की परिपक्वता दर्शाती है, परंतु वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में इन अधिग्रहणों का दीर्घकालिक मूल्य सृजन अभी परखा जाना बाकी है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल 2026 में भारत में कितने और कितने मूल्य के सौदे हुए?
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत में कुल 220 सौदे दर्ज किए गए जिनकी संयुक्त वैल्यू 22.8 अरब डॉलर रही। इनमें से 5 अरब डॉलर से अधिक के बड़े सौदों ने कुल वैल्यू का करीब 80 प्रतिशत योगदान दिया।
अप्रैल 2026 में M&A गतिविधियाँ इतनी उल्लेखनीय क्यों रहीं?
अप्रैल 2026 में 18.7 अरब डॉलर मूल्य के 103 M&A सौदे दर्ज हुए, जो मई 2022 के बाद किसी एकल महीने की सर्वाधिक M&A वैल्यू है। महीने-दर-महीने आधार पर M&A वैल्यू में करीब 1,000 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारतीय कंपनियों के आउटबाउंड सौदों का क्या महत्व है?
अप्रैल में 17.7 अरब डॉलर मूल्य के 21 आउटबाउंड ट्रांज़ैक्शन हुए, जो भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं। ग्रांट थॉर्नटन की शांति विजेता के अनुसार, ये अधिग्रहण भारत के कॉर्पोरेट जगत की परिपक्वता का प्रमाण हैं।
अप्रैल 2026 में कौन-से सेक्टर सबसे सक्रिय रहे?
डील वैल्यू के लिहाज़ से फार्मास्युटिकल सेक्टर सबसे आगे रहा, जबकि डील मात्रा में रिटेल एवं कंज्यूमर और IT एवं ITES सेक्टर अग्रणी रहे। रियल एस्टेट सेक्टर पहली बार M&A वॉल्यूम में शीर्ष पर उभरा।
अप्रैल 2026 में भारत के पूंजी बाज़ार में क्या हुआ?
अप्रैल 2026 में 6 IPO के ज़रिए 45 करोड़ डॉलर और 2 QIP के ज़रिए 54.8 करोड़ डॉलर जुटाए गए। यह सक्रियता भारत के मज़बूत पूंजी बाज़ार तंत्र को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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