पेपर लीक बिल पर सुरजेवाला का तंज: 'कानून बनाने से नहीं, माफिया का संरक्षण खत्म करने से रुकेगा लीक'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 28 जुलाई को पेपर लीक रोधी विधेयक पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से परीक्षा पेपर लीक की घटनाएँ नहीं रुकेंगी, जब तक सत्ता में बैठे लोगों और लीक माफिया के बीच के रिश्ते नहीं तोड़े जाते। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
सुरजेवाला ने कहा, 'सच्चाई यह है कि सत्ता में बैठे मठाधीश माफिया को संरक्षण दे रहे हैं। गुजरात हो या पंजाब या फिर महाराष्ट्र, मंडी में बच्चों के भविष्य की बोली लगाकर बेचा जा रहा है। यह लड़ाई कानून बनाने की नहीं, कमेटी बनाने की नहीं, बल्कि सत्ताधीश मठाधीशों से उनका रिश्ता खत्म करने की है।' उन्होंने कहा कि देश में लगभग हर दिन पेपर लीक की घटनाएँ हो रही हैं और कोई भी नई समिति या कानून तब तक कारगर नहीं होगा जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति न हो।
विपक्ष की अन्य माँगें
नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि विपक्ष पेपर लीक विरोधी बिल पर सार्थक चर्चा चाहता है, लेकिन साथ ही 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कथित हिंसा और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों पर भी सरकार को जवाब देना होगा। उन्होंने माँग की कि छात्रों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएँ और कहा कि 'जैसे अभी सरकार को पीछे हटना पड़ा, वैसे ही आगे भी पड़ेगा।'
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने केंद्रीय गृह मंत्री से छात्रों के साथ हुई 'क्रूरता' के लिए सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी इस घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और देश के युवाओं को न्याय मिलना सुनिश्चित किया जाए।
सरकार पर जवाबदेही का दबाव
सुरजेवाला ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के साथ देश का युवा खड़ा है और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। आलोचकों का कहना है कि पेपर लीक माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है, इसीलिए बार-बार कानून बनने के बावजूद स्थिति नहीं बदली। यह ऐसे समय में आया है जब संसद में पेपर लीक रोधी विधेयक पर चर्चा जारी है और विपक्ष इसे महज दिखावा बता रहा है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि पेपर लीक की घटनाएँ पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं और इस पर कई राज्यों में जाँच समितियाँ गठित हो चुकी हैं। विपक्ष का रुख स्पष्ट है — वह विधेयक के साथ-साथ छात्रों पर हुई कार्रवाई और माफिया के राजनीतिक संरक्षण पर भी जवाब चाहता है। संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना बनी हुई है।