भारत की एनर्जी स्टोरेज ज़रूरत वित्त वर्ष 2032 तक 8 गुना बढ़कर 411 GWh होगी: केयरएज रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में एनर्जी स्टोरेज की माँग वित्त वर्ष 2032 तक मौजूदा स्तर से लगभग 8 गुना बढ़कर करीब 411 गीगावाट घंटे (GWh) तक पहुँचने का अनुमान है। केयरएज रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक देश की परिचालन स्टोरेज क्षमता महज़ लगभग 54 GWh थी, जो इस लक्ष्य से कहीं पीछे है। यह रिपोर्ट 8 सितंबर 2026 को सार्वजनिक की गई।
निवेश का विशाल अवसर
केयरएज रेटिंग्स के आकलन के अनुसार, 411 GWh की लक्षित स्टोरेज क्षमता हासिल करने के लिए अगले छह वर्षों में ₹4 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी। रेटिंग एजेंसी ने इसे भारत के बुनियादी ढाँचे क्षेत्र में एक बड़े निवेश अवसर के रूप में रेखांकित किया है।
टेंडरिंग गतिविधि में भी उल्लेखनीय तेज़ी देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2025 में जहाँ 7 गीगावाट के स्टैंडअलोन-स्टोरेज आधारित टेंडर जारी हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह आँकड़ा लगभग 21 गीगावाट तक पहुँच गया — यानी तीन गुना से अधिक की वृद्धि।
ग्रिड इंटीग्रेशन की बढ़ती चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का पावर सेक्टर अब केवल क्षमता विस्तार की चुनौती से आगे बढ़कर ग्रिड इंटीग्रेशन की जटिल चुनौती का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी इंस्टॉल्ड क्षमता में 50 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, लेकिन वास्तविक बिजली उत्पादन में उनका योगदान केवल लगभग 29 प्रतिशत है। यह अंतर नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित प्रकृति और कम प्लांट लोड फैक्टर (PLF) को दर्शाता है।
एनर्जी स्टोरेज इस संदर्भ में एक अहम भूमिका निभाता है — यह दिन के समय अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहीत करता है और शाम के पीक घंटों में आपूर्ति करता है, जिससे नेट लोड कर्व संतुलित होता है, बिजली कटौती घटती है और रैम्पिंग की ज़रूरतें आसान होती हैं।
गहराता 'डक कर्व' और सौर ऊर्जा की कटौती
रिपोर्ट के अनुसार, सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ 'डक कर्व' और गहरा होता जा रहा है। सुबह के समय रैम्प-डाउन (बिजली माँग में कमी) मई 2025 में लगभग 28 गीगावाट से बढ़कर मई 2026 में लगभग 50 गीगावाट हो गया। इसी अवधि में शाम का रैम्प-अप लगभग 68 गीगावाट से बढ़कर लगभग 80 गीगावाट हो गया।
यह प्रवृत्ति पारंपरिक बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ा रही है। ट्रांसमिशन और ग्रिड-स्थिरता संबंधी चिंताओं के कारण वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में लगभग 8.1 टेरावाट घंटे (TWh) सौर बिजली की कटौती की गई — जो नवीकरणीय ऊर्जा के अपव्यय की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
केयरएज रेटिंग्स के कार्यकारी निदेशक और मुख्य रेटिंग अधिकारी सचिन गुप्ता ने कहा, "भारत का पावर सेक्टर रिन्यूएबल क्षमता बढ़ाने की चुनौती से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करने की ओर बढ़ रहा है कि रिन्यूएबल बिजली को ग्रिड में प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके। जैसे-जैसे सोलर और विंड क्षमता बढ़ेगी, अतिरिक्त ऊर्जा को स्टोर करने और पीक डिमांड के समय उसका इस्तेमाल करने की क्षमता अहम हो जाएगी।"
BESS और PSP: दोनों तकनीकें मिलकर करेंगी काम
रिपोर्ट में बताया गया है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंपेड स्टोरेज प्लांट (PSP) एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करेंगे। BESS की विशेषता है — मॉड्यूलरिटी, अधिक दक्षता और त्वरित तैनाती। वहीं PSP दीर्घकालिक स्टोरेज, संपत्ति की लंबी आयु और आयात पर कम निर्भरता की सुविधा देते हैं।
केयरएज रेटिंग्स ने दोनों तकनीकों के लिए स्टोरेज लागत लगभग ₹4.5–5 प्रति यूनिट आँकी है — इसमें इनपुट बिजली की लागत शामिल नहीं है, लेकिन साइकिल लॉस को ध्यान में रखा गया है। भारत की ऊर्जा संक्रमण यात्रा में अगले छह वर्ष निर्णायक साबित होंगे।