2033 तक भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि की संभावना: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- 2033 तक ऊर्जा भंडारण क्षमता 346 जीडब्ल्यूएच तक पहुंचने की संभावना।
- बैटरी ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम की बढ़ती मांग।
- सरकारी नीतियों का सकारात्मक प्रभाव।
- पंप्ड हाइड्रो एनर्जी स्टोरेज में महत्वपूर्ण वृद्धि।
- भारत को वैश्विक ऊर्जा भंडारण बाजार में मजबूत स्थान दिलाने का प्रयास।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत का स्थिर ऊर्जा भंडारण (स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज) क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है। शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) परियोजनाओं की कुल पाइपलाइन क्षमता 92 गीगावाट-घंटा (जीडब्ल्यूएच) के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्तमान में स्थापित क्षमता 1 गीगावाट-घंटे से भी कम है, लेकिन 2033 तक यह 346 जीडब्ल्यूएच तक पहुंचने की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले वर्ष में इस क्षेत्र में गति आई है। इस दौरान 69 नए बीईएसएस टेंडर जारी किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 102 जीडब्ल्यूएच है, जो 2024 की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में 2033 तक ऊर्जा भंडारण क्षमता 346 जीडब्ल्यूएच तक पहुंचने की संभावना है। यदि सरकार की नीतियों का समर्थन इसी तरह बना रहा, तो यह 544 जीडब्ल्यूएच तक भी बढ़ सकती है।
इसके अतिरिक्त, पंप्ड हाइड्रो एनर्जी स्टोरेज में भी महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है। इसकी क्षमता 2025 में 7 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर 2033 तक 107 जीडब्ल्यू तक पहुंचने का अनुमान है।
ग्रिड इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एस. सी. सक्सेना ने कहा कि बिजली की मांग में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण अब अत्यंत आवश्यक हो गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि लागत में कमी और सरकार की सहायक नीतियों के चलते बैटरी और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज के उपयोग में तेजी आई है।
आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा कि यह रिपोर्ट भारत को 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन (नॉन-फॉसिल फ्यूल) क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी, जिसमें ऊर्जा भंडारण की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस क्षेत्र की वृद्धि में कई सरकारी नीतियों का योगदान है, जैसे एनर्जी स्टोरेज ऑब्लिगेशन, वायबिलिटी गैप फंडिंग और ट्रांसमिशन चार्ज में छूट जैसी सुविधाएं, जिससे निवेश में वृद्धि हुई है।
2026 में लगभग 5 जीडब्ल्यूएच नई क्षमता के शुरू होने की उम्मीद है, जिससे यह क्षेत्र तेजी से विस्तार के दौर में प्रवेश करेगा और भारत को वैश्विक ऊर्जा भंडारण बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाएगा।
यह रिपोर्ट स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज इंडिया (एसईएसआई) 2026 सम्मेलन में प्रस्तुत की गई थी।