भारत की GDP 2026 में 7% बढ़ने का अनुमान, ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद: BofA सिक्योरिटीज
सारांश
मुख्य बातें
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 2026 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है — जो अप्रैल में जारी 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से काफी ऊपर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 की दूसरी छमाही में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 72 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है, बशर्ते पश्चिम एशिया में स्थिरता बनी रहे।
भारत के लिए संशोधित GDP अनुमान
BofA सिक्योरिटीज ने भारत की वृद्धि दर का अनुमान न केवल 2026 बल्कि 2027 के लिए भी 7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर GDP आँकड़े, अमेरिका-ईरान शांति समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार ने इस संशोधन की ज़मीन तैयार की। गौरतलब है कि यह अनुमान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है।
वैश्विक विकास दर और महंगाई का आकलन
इस ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 3.2 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.5 प्रतिशत कर दिया है — दोनों वर्षों के लिए अप्रैल के अनुमान से 10 आधार अंक अधिक। महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया, "हम इस साल के लिए वैश्विक महंगाई दर का अनुमान घटाकर 3 प्रतिशत कर रहे हैं। इसके 2027 में घटकर 2.4 प्रतिशत और 2028 में 2.5 प्रतिशत होने का अनुमान है।"
कच्चे तेल की कीमतें और होर्मुज स्ट्रेट
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के उच्चतम स्तर से कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 42 प्रतिशत की गिरावट आई है और ये 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं। 2027 में ब्रेंट क्रूड के 65 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद जताई गई है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने के बाद 24 जून को वहाँ से गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या ने एक नया दैनिक रिकॉर्ड बनाया — उस दिन 78 जहाज़ गुज़रे, जो युद्ध-पूर्व के दैनिक वॉल्यूम का 57 प्रतिशत है।
उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर नज़र
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि चीन को छोड़कर उभरती हुई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर 2026 में 5.9 प्रतिशत और 2027 में 5.8 प्रतिशत रहेगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देने वाले कारकों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियाँ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तीव्र विकास, चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, राजकोषीय असंतुलन और वैश्विक स्तर पर अधिक तरलता (लिक्विडिटी) शामिल हैं।
फेडरल रिज़र्व और वित्तीय जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका से पैदा होने वाली सख्त वित्तीय स्थितियाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था की परीक्षा ले सकती हैं। अनुमान है कि फेडरल रिज़र्व सितंबर 2026 से ब्याज दरों में 75 आधार अंक की बढ़ोतरी शुरू करेगा। यह कदम वैश्विक पूँजी प्रवाह और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव डाल सकता है।