भारत और दक्षिण कोरिया के बीच शिपबिल्डिंग कौशल विकास का ऐतिहासिक समझौता

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भारत और दक्षिण कोरिया के बीच शिपबिल्डिंग कौशल विकास का ऐतिहासिक समझौता

सारांश

भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जो शिपबिल्डिंग सेक्टर में कौशल विकास को प्रोत्साहित करेगा। यह करार देश के समुद्री क्षेत्र को मजबूत बनाने में सहायक होगा।

Key Takeaways

  • भारत और दक्षिण कोरिया के बीच कौशल विकास का समझौता
  • शिपबिल्डिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने का लक्ष्य
  • द्विपक्षीय कार्यशालाओं के माध्यम से अनुभव साझा करना
  • रोजगार के नए अवसरों का सृजन
  • भारत का समुद्री क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने अपने समुद्री क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दक्षिण कोरिया के साथ शिपबिल्डिंग सेक्टर में कौशल विकास के लिए एक नया समझौता किया है। सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि यह करार कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (केओआईसीए) के साथ संपन्न हुआ है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने बताया कि 2 अप्रैल को 'कार्यान्वयन योजना' पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के तहत किया गया है, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक समुद्री क्षेत्र में एक मजबूत स्थिति प्रदान करना है।

इस परियोजना के माध्यम से शिपबिल्डिंग और मरीन सेक्टर के लिए कुशल पेशेवरों की एक ठोस नींव स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में कौशल अंतर को पहचानकर मानव संसाधन विकास हेतु एक विस्तृत रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।

इस सहयोग के तहत केओआईसीए, कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग और अन्य संस्थान मिलकर भारत के शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग सेक्टर पर गहन अध्ययन करेंगे। इसमें कार्यबल मानचित्रण और कौशल आवश्यकताओं का विश्लेषण भी किया जाएगा।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने इस साझेदारी को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे देश में एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीक-आधारित कुशल कार्यबल तैयार करने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने और विशेष रूप से युवाओं के लिए नई रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायक होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री क्षेत्र को आर्थिक विकास और रणनीतिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहा है। दक्षिण कोरिया की उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर भारत अपने इस क्षेत्र को और मजबूत करने में सक्षम होगा।

इस परियोजना के अंतर्गत भारत और दक्षिण कोरिया में कार्यबल विकास पर द्विपक्षीय कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शिक्षाविद शामिल होंगे। इन बैठकों के माध्यम से बेहतर तकनीक और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

इसके अलावा, भारत में 'शिपबिल्डिंग कार्यबल विकास एवं तकनीकी सहयोग केंद्र' स्थापित करने की योजना भी अंतिम चरण में है। यह केंद्र उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करेगा और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगा।

यह पहल भारत को शिपबिल्डिंग और समुद्री सेवाओं के क्षेत्र में एक वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो देश में रोजगार, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई गति देगी।

Point of View

जिसका उद्देश्य शिपबिल्डिंग क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाना है। यह न केवल कौशल विकास में सहायक है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

यह समझौता किसके साथ हुआ है?
यह समझौता भारत और कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (केओआईसीए) के बीच हुआ है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य शिपबिल्डिंग सेक्टर में कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
इस परियोजना से भारत को क्या लाभ होगा?
इस परियोजना से भारत में एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम तैयार होगा।
क्या इस समझौते के तहत कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी?
हाँ, इस समझौते के तहत द्विपक्षीय कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
क्या इस परियोजना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे?
हाँ, यह परियोजना युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
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