17 अगस्त 2026
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एलपीजी आपूर्ति सुरक्षा: केंद्र ने 21 रिफाइनरियों के लिए उत्पादन लक्ष्य तय किए, 63,810 टन/दिन की क्षमता निर्धारित

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एलपीजी आपूर्ति सुरक्षा: केंद्र ने 21 रिफाइनरियों के लिए उत्पादन लक्ष्य तय किए, 63,810 टन/दिन की क्षमता निर्धारित

सारांश

पश्चिम एशिया संकट से सबक लेते हुए केंद्र ने पहली बार 21 रिफाइनरियों के लिए बाध्यकारी एलपीजी उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं। 63,810 टन प्रतिदिन की यह क्षमता दैनिक खपत के 70% के बराबर है और होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता कम करने की दिशा में एक स्थायी ढाँचा तैयार करती है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 16 अगस्त 2026 को पहली बार 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम उत्पादकों के लिए एलपीजी उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए।
कुल संभावित उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन — भारत की दैनिक एलपीजी खपत का लगभग 70 प्रतिशत ।
भारत की वार्षिक एलपीजी खपत 3.32 करोड़ टन ; इसमें से 64% से अधिक आयात पर निर्भर, अधिकांश होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते।
18 सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य दिया गया।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान आपातकालीन उत्पादन 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुँचाया गया था।
नई व्यवस्था स्थायी है — सरकार आवश्यकता पड़ने पर इसे तत्काल सक्रिय कर सकती है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 16 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए पहली बार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की 21 रिफाइनरियों तथा अपस्ट्रीम तेल एवं गैस उत्पादकों के लिए रिफाइनरी-वार और कंपनी-वार एलपीजी उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इस ढाँचे के तहत कुल संभावित उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन तय की गई है, जो भारत की दैनिक एलपीजी खपत का लगभग 70 प्रतिशत है। यह कदम आयातित रसोई गैस की आपूर्ति में व्यवधान से उत्पन्न जोखिमों को स्थायी रूप से कम करने की दिशा में उठाया गया है।

नई व्यवस्था में क्या है खास

नए आदेश के अंतर्गत एक स्थायी उत्पादन-वृद्धि तंत्र तैयार किया गया है, जिसे सरकार तब सक्रिय कर सकती है जब पर्याप्त एलपीजी उपलब्धता और उचित वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक हो। 18 सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है, जबकि शेष क्षमता निजी क्षेत्र की इकाइयों और अपस्ट्रीम उत्पादकों से आएगी। यह पहला मौका है जब इस तरह का संरचित और बाध्यकारी उत्पादन ढाँचा अस्तित्व में आया है।

भारत की एलपीजी निर्भरता और आयात जोखिम

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 3.32 करोड़ टन (करीब 91,000 टन प्रतिदिन) एलपीजी की खपत होती है। इसमें से केवल 1.31 करोड़ टन का उत्पादन देश के भीतर होता है, जबकि 64 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। इनमें से अधिकांश एलपीजी की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होती है — एक ऐसा रणनीतिक समुद्री मार्ग जो भू-राजनीतिक तनाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।

पश्चिम एशिया संकट ने उजागर की कमज़ोरी

यह कदम हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद उठाया गया है, जिसने भारत की आयातित एलपीजी पर निर्भरता और उससे जुड़े जोखिमों को स्पष्ट रूप से उजागर किया। इस साल की शुरुआत में ईरान से जुड़े संकट के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट में व्यवधान आने पर सरकार को आपातकालीन उपाय करने पड़े थे। रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की धाराएँ एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ने का निर्देश दिया गया था, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की आपूर्ति सीमित की गई थी, और जहाँ सुविधा उपलब्ध थी, वहाँ घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की ओर प्रोत्साहित किया गया था।

संकट के दौरान क्या हुआ था

संकट के चरम पर घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर लगभग 55,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया था। आपूर्ति की स्थिति में सुधार होने के बाद आपातकालीन निर्देशों में धीरे-धीरे ढील दी गई। गौरतलब है कि उस संकट ने यह भी दर्शाया कि भारत की रिफाइनरियों में उत्पादन क्षमता मौजूद है, बशर्ते उसे समय पर सक्रिय किया जाए।

आगे क्या होगा

नई स्थायी व्यवस्था के तहत सरकार अब किसी भी आपूर्ति संकट की स्थिति में तत्काल उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकती है, बिना हर बार नए आपातकालीन निर्देश जारी किए। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यह ढाँचा भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति में एक दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार है, जो भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रभाव को सीमित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना किसी बाध्यकारी घरेलू उत्पादन योजना के। असली सवाल यह है कि क्या यह ढाँचा केवल संकट के समय सक्रिय होगा, या इसे दीर्घकालिक घरेलू उत्पादन बढ़ाने की नीति से जोड़ा जाएगा। 63,810 टन प्रतिदिन की क्षमता प्रभावशाली है, लेकिन सामान्य घरेलू उत्पादन अभी भी खपत के एक-तिहाई से अधिक नहीं है — और इस अंतर को पाटने के लिए लक्ष्य-निर्धारण पर्याप्त नहीं, बुनियादी ढाँचे में निवेश ज़रूरी है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र ने एलपीजी उत्पादन लक्ष्य क्यों तय किए हैं?
पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट से आपूर्ति में व्यवधान के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का 64% से अधिक आयात से पूरा करता है, जिसमें से अधिकांश होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है — इस निर्भरता को कम करना इस नीति का मूल उद्देश्य है।
नए ढाँचे के तहत कितनी एलपीजी उत्पादन क्षमता निर्धारित की गई है?
कुल संभावित उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन तय की गई है, जो भारत की दैनिक एलपीजी खपत (करीब 91,000 टन) का लगभग 70 प्रतिशत है। इसमें 18 सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों का हिस्सा 31,470 टन प्रतिदिन है।
भारत में एलपीजी की कुल खपत और घरेलू उत्पादन में कितना अंतर है?
भारत में सालाना करीब 3.32 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 1.31 करोड़ टन है। 64% से अधिक माँग आयात से पूरी की जाती है।
यह नई व्यवस्था पुरानी आपातकालीन व्यवस्था से कैसे अलग है?
पहले सरकार को हर संकट के समय नए आपातकालीन निर्देश जारी करने पड़ते थे। नई स्थायी व्यवस्था के तहत उत्पादन लक्ष्य पहले से निर्धारित हैं और सरकार आवश्यकता पड़ने पर इस ढाँचे को तत्काल सक्रिय कर सकती है।
संकट के दौरान घरेलू एलपीजी उत्पादन कितना बढ़ाया गया था?
इस साल की शुरुआत में ईरान से जुड़े संकट के चरम पर घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर लगभग 55,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया था। आपूर्ति सामान्य होने के बाद आपातकालीन निर्देशों में धीरे-धीरे ढील दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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