एलपीजी आपूर्ति सुरक्षा: केंद्र ने 21 रिफाइनरियों के लिए उत्पादन लक्ष्य तय किए, 63,810 टन/दिन की क्षमता निर्धारित
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 16 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए पहली बार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की 21 रिफाइनरियों तथा अपस्ट्रीम तेल एवं गैस उत्पादकों के लिए रिफाइनरी-वार और कंपनी-वार एलपीजी उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इस ढाँचे के तहत कुल संभावित उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन तय की गई है, जो भारत की दैनिक एलपीजी खपत का लगभग 70 प्रतिशत है। यह कदम आयातित रसोई गैस की आपूर्ति में व्यवधान से उत्पन्न जोखिमों को स्थायी रूप से कम करने की दिशा में उठाया गया है।
नई व्यवस्था में क्या है खास
नए आदेश के अंतर्गत एक स्थायी उत्पादन-वृद्धि तंत्र तैयार किया गया है, जिसे सरकार तब सक्रिय कर सकती है जब पर्याप्त एलपीजी उपलब्धता और उचित वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक हो। 18 सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है, जबकि शेष क्षमता निजी क्षेत्र की इकाइयों और अपस्ट्रीम उत्पादकों से आएगी। यह पहला मौका है जब इस तरह का संरचित और बाध्यकारी उत्पादन ढाँचा अस्तित्व में आया है।
भारत की एलपीजी निर्भरता और आयात जोखिम
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 3.32 करोड़ टन (करीब 91,000 टन प्रतिदिन) एलपीजी की खपत होती है। इसमें से केवल 1.31 करोड़ टन का उत्पादन देश के भीतर होता है, जबकि 64 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। इनमें से अधिकांश एलपीजी की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होती है — एक ऐसा रणनीतिक समुद्री मार्ग जो भू-राजनीतिक तनाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
पश्चिम एशिया संकट ने उजागर की कमज़ोरी
यह कदम हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद उठाया गया है, जिसने भारत की आयातित एलपीजी पर निर्भरता और उससे जुड़े जोखिमों को स्पष्ट रूप से उजागर किया। इस साल की शुरुआत में ईरान से जुड़े संकट के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट में व्यवधान आने पर सरकार को आपातकालीन उपाय करने पड़े थे। रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की धाराएँ एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ने का निर्देश दिया गया था, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की आपूर्ति सीमित की गई थी, और जहाँ सुविधा उपलब्ध थी, वहाँ घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की ओर प्रोत्साहित किया गया था।
संकट के दौरान क्या हुआ था
संकट के चरम पर घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर लगभग 55,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया था। आपूर्ति की स्थिति में सुधार होने के बाद आपातकालीन निर्देशों में धीरे-धीरे ढील दी गई। गौरतलब है कि उस संकट ने यह भी दर्शाया कि भारत की रिफाइनरियों में उत्पादन क्षमता मौजूद है, बशर्ते उसे समय पर सक्रिय किया जाए।
आगे क्या होगा
नई स्थायी व्यवस्था के तहत सरकार अब किसी भी आपूर्ति संकट की स्थिति में तत्काल उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकती है, बिना हर बार नए आपातकालीन निर्देश जारी किए। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यह ढाँचा भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति में एक दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार है, जो भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रभाव को सीमित कर सकता है।