जम्मू-कश्मीर ACB का बड़ा एक्शन: कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर नसीर अहमद खान रिश्वत लेते गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 30 सितंबर 2026 को एक ट्रैप कार्रवाई में कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (लॉ एनफोर्समेंट) नसीर अहमद खान को एक बीज कारोबारी से ₹50,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा। उनके साथ कथित दलाल मोहम्मद ओवैस भट को भी मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
ACB को एक बीज कारोबारी की लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि डिप्टी डायरेक्टर नसीर अहमद खान ने उसकी दुकान पर पौधों के बीज बेचने की अनुमति देने के एवज में ₹2 लाख की रिश्वत माँगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, दबाव में आकर वह पहले ही ₹1 लाख अदा कर चुका था। बातचीत के बाद शेष राशि ₹50-50 हजार की दो किस्तों में चुकाने पर सहमति बनी थी।
और अधिक रिश्वत देने में असमर्थ शिकायतकर्ता ने कानूनी सहायता के लिए ACB का दरवाज़ा खटखटाया। सत्यापन के दौरान आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
पुलिस स्टेशन ACB श्रीनगर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 7ए तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के अंतर्गत एफआईआर संख्या 16/2026 दर्ज की गई। इसके बाद ACB ने 30 सितंबर को विशेष ट्रैप टीम गठित की।
ट्रैप कार्रवाई और गिरफ्तारी
ट्रैप ऑपरेशन के दौरान नसीर अहमद खान और उनके कथित दलाल मोहम्मद ओवैस भट — जो क़मरवारी के रहने वाले बताए गए हैं — को शिकायतकर्ता से ₹50,000 की अवैध रिश्वत माँगते और स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया और रिश्वत की ₹50,000 की राशि मौके से बरामद की गई।
मेडिको-लीगल औपचारिकताएँ पूरी कराने के बाद दोनों आरोपियों को श्रीनगर के शहीदगंज पुलिस स्टेशन में रखा गया है।
ACB की भूमिका और इतिहास
जम्मू-कश्मीर एंटी करप्शन ब्यूरो केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख विशेष कानून प्रवर्तन एजेंसी है, जो सरकारी कर्मचारियों के बीच रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जाँच करती है। इस संस्था की स्थापना 1962 में 'एंटी करप्शन ऑर्गनाइजेशन' के रूप में हुई थी। 1983 में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट के तहत इसका नाम 'स्टेट विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन' किया गया और बाद में यह ACB के रूप में विकसित हुई।
आगे की जाँच
ACB ने पुष्टि की है कि इस मामले में जाँच आगे भी जारी रहेगी। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब जम्मू-कश्मीर में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एजेंसी की सक्रियता बढ़ी है। आने वाले दिनों में इस मामले में अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भी पड़ताल की जा सकती है।