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भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: इंजीनियरिंग निर्यात 2030 तक ₹28-30 करोड़ डॉलर पहुँचने का अनुमान

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भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: इंजीनियरिंग निर्यात 2030 तक ₹28-30 करोड़ डॉलर पहुँचने का अनुमान

सारांश

भारत-न्यूजीलैंड FTA के लागू होते ही ईईपीसी इंडिया ने इंजीनियरिंग निर्यात के दोगुना होने का अनुमान जताया है। ऑटोमोबाइल से लेकर मेडिकल उपकरणों तक — और खासतौर पर एमएसएमई के लिए — यह समझौता 2030 तक $250 अरब के बड़े निर्यात लक्ष्य की ओर एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 को प्रभाव में आया।
ईईपीसी इंडिया के अनुसार, अगले 5 वर्षों में न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग निर्यात 28-30 करोड़ डॉलर तक पहुँचने का अनुमान।
2025-26 में निर्यात 14.05 करोड़ डॉलर रहा; 2024-25 में यह 12.98 करोड़ डॉलर था।
प्रमुख निर्यात वस्तुएँ: ऑटोमोबाइल , डेयरी मशीनरी , मेडिकल उपकरण , लोहा-इस्पात उत्पाद ।
एमएसएमई को उत्पाद विविधता और बाजार पहुँच में विशेष लाभ मिलने की उम्मीद।
यह समझौता भारत के $250 अरब इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य ( 2030 ) को बल देगा।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 को प्रभाव में आ गया, जिसके साथ ही इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में नए द्वार खुलने की उम्मीद जगी है। ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा के अनुसार, अगले पाँच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना होकर 28-30 करोड़ डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।

निर्यात में ताज़ा रुझान

आंकड़ों के अनुसार, भारत का न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग निर्यात 2024-25 में 12.98 करोड़ डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 14.05 करोड़ डॉलर हो गया। यह क्रमिक वृद्धि FTA से पहले की स्वाभाविक गति को दर्शाती है; अब समझौते के लागू होने से इस वृद्धि दर में और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड भारत के कुल इंजीनियरिंग निर्यात के मानचित्र पर अपेक्षाकृत छोटा गंतव्य है, लेकिन चड्ढा का तर्क है कि यही छोटा आकार इसे एक उभरते अवसर में बदलता है — क्योंकि प्रतिस्पर्धा कम है और उच्च-मूल्य वाले उत्पादों की माँग है।

किन उत्पादों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ

भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात होने वाली प्रमुख इंजीनियरिंग वस्तुओं में ऑटोमोबाइल, डेयरी क्षेत्र की औद्योगिक मशीनरी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपकरण, कार्यालय उपकरण तथा लोहा और इस्पात उत्पाद शामिल हैं। न्यूजीलैंड की मजबूत डेयरी अर्थव्यवस्था को देखते हुए उस क्षेत्र की मशीनरी में विशेष माँग की संभावना है।

एमएसएमई को मिलेगा विशेष अवसर

चड्ढा ने इस बात पर जोर दिया कि यह FTA केवल बड़े निर्यातकों के लिए नहीं, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भी एक अहम कदम है। उन्होंने कहा, 'न्यूजीलैंड के साथ FTA इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर प्रदान करता है।' शुल्क रियायतें और मानकों की पारस्परिक मान्यता एमएसएमई की प्रवेश लागत घटाएगी, जिससे वे पहली बार इस बाजार में उतर सकते हैं।

$250 अरब के बड़े लक्ष्य से कड़ी

चड्ढा ने न्यूजीलैंड को भारत के वृहत व्यापार महत्वाकांक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय सफलता 2030 तक 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक और आधार-पत्थर है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों और ब्रिटेन के साथ भी FTA वार्ता में सक्रिय है, जिससे 'एफटीए कूटनीति' की व्यापक रणनीति स्पष्ट होती है।

आगे की राह

उद्योग सूत्रों के अनुसार, समझौते के क्रियान्वयन की गति और सीमा-शुल्क रियायतों की व्यापकता यह तय करेगी कि क्या 28-30 करोड़ डॉलर का अनुमान व्यावहारिक है। ईईपीसी इंडिया ने संकेत दिया है कि वह सदस्य निर्यातकों को बाजार-पहुँच के लिए सहायता प्रदान करेगी। निर्यातकों की नज़र अब दोनों सरकारों द्वारा अधिसूचित विशिष्ट टैरिफ अनुसूचियों पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह FTA भारत की 'एफटीए कूटनीति' के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जो EU, ब्रिटेन और खाड़ी देशों के साथ चल रही वार्ताओं के साथ जुड़ता है। असली सवाल यह है कि क्या 28-30 करोड़ डॉलर का अनुमान टैरिफ राहत की वास्तविक गहराई पर आधारित है या केवल आशावादी प्रक्षेपण — क्योंकि पिछले कुछ FTA में बाजार पहुँच के वादे कागज पर ज्यादा और जमीन पर कम साबित हुए हैं। एमएसएमई के लिए उत्साहजनक बात यह है कि न्यूजीलैंड का बाजार प्रवेश-बाधाएँ अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन जब तक टैरिफ अनुसूची और मानक-मान्यता का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक न हो, इन आँकड़ों को संभावना के रूप में देखना ही उचित होगा।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-न्यूजीलैंड FTA क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 को प्रभाव में आया। यह दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार पर शुल्क रियायतें और बाजार-पहुँच सुविधाएँ प्रदान करने वाला द्विपक्षीय समझौता है।
FTA से भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
ईईपीसी इंडिया के अनुसार, FTA से ऑटोमोबाइल, डेयरी मशीनरी, मेडिकल उपकरण और लोहा-इस्पात उत्पादों के निर्यातकों को टैरिफ कटौती का लाभ मिलेगा। अगले पाँच वर्षों में इंजीनियरिंग निर्यात 14.05 करोड़ डॉलर से बढ़कर 28-30 करोड़ डॉलर पहुँचने का अनुमान है।
एमएसएमई के लिए इस FTA में खास क्या है?
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा के अनुसार, यह समझौता एमएसएमई को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश लागत घटाकर अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने का मौका देता है। छोटी इकाइयाँ पहली बार इस बाजार में प्रतिस्पर्धी तरीके से उतर सकती हैं।
भारत का 2030 तक $250 अरब इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक इंजीनियरिंग क्षेत्र में 250 अरब डॉलर के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। न्यूजीलैंड के साथ FTA इस बड़े लक्ष्य की दिशा में एक योगदान है, हालाँकि न्यूजीलैंड की हिस्सेदारी कुल लक्ष्य में छोटी है।
न्यूजीलैंड को भारत से अभी कितना इंजीनियरिंग निर्यात होता है?
2025-26 में भारत का न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग निर्यात 14.05 करोड़ डॉलर रहा, जो 2024-25 के 12.98 करोड़ डॉलर से अधिक है। FTA के बाद इसके अगले पाँच वर्षों में दोगुना होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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