विकसित भारत 2047: 600 मिलियन टन स्टील क्षमता का लक्ष्य, एक सप्ताह में आएगी नई राष्ट्रीय इस्पात नीति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार अगले एक सप्ताह के भीतर नई राष्ट्रीय इस्पात नीति (नेशनल स्टील पॉलिसी) को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करने की तैयारी में है, जिसका केंद्रीय लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत की स्टील उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 600 मिलियन मीट्रिक टन (MT) तक पहुँचाना है। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नीति 'विकसित भारत 2047' के विजन को आधार मानकर तैयार की जा रही है।
नीति में क्या शामिल है
पौंड्रिक के अनुसार, प्रस्तावित नीति में सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले स्टील के आयात को हतोत्साहित करने के लिए सेफगार्ड ड्यूटी और एंटी-डंपिंग ड्यूटी जैसे व्यापारिक उपाय शामिल किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य घरेलू इस्पात उद्योग को अनुचित विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रखना है।
नई नीति में छोटे और मध्यम स्तर के इस्पात उत्पादकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही गई है। सरकार का इरादा इन्हें बेहतर तकनीक, लागत दक्षता और मूल्य प्रतिस्पर्धा के ज़रिये सशक्त बनाना है।
ग्रीन और स्पेशियलिटी स्टील पर फोकस
संशोधित नीति में ग्रीन स्टील, स्पेशियलिटी स्टील और स्टेनलेस स्टील के लिए 2035 और 2047 तक के उत्पादन लक्ष्य भी शामिल किए जाने की संभावना है। यह भारत के इस्पात क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत की मौजूदा कच्चा इस्पात (क्रूड स्टील) उत्पादन क्षमता लगभग 222 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इस वर्ष की शुरुआत में सरकार ने बताया था कि देश 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता के पहले चरण के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उत्पादन और खपत के ताज़ा आँकड़े
इस्पात मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जुलाई के दौरान तैयार इस्पात (फिनिश्ड स्टील) का उत्पादन 4 प्रतिशत बढ़कर 54.3 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 52.2 मिलियन टन था। इसी अवधि में खपत 7.8 प्रतिशत बढ़कर 55.9 मिलियन टन हो गई, जो एक वर्ष पहले 51.9 मिलियन टन थी।
इस वृद्धि के पीछे राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं से बढ़ती माँग को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कच्चा इस्पात उत्पादन भी 2.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 56.3 मिलियन टन रहा।
निर्यात में उल्लेखनीय उछाल
निर्यात के मोर्चे पर भारतीय इस्पात उद्योग ने मज़बूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान इस्पात निर्यात 35 प्रतिशत की छलांग लगाकर 22.9 लाख टन पर पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 17 लाख टन था। मूल्य के आधार पर यह निर्यात 29.4 प्रतिशत बढ़कर ₹18,105.4 करोड़ हो गया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्टील की माँग में अनिश्चितता बनी हुई है और चीन से सस्ते स्टील का दबाव भारत समेत कई देशों पर बढ़ रहा है। नई नीति के आने से भारतीय उद्योग की स्थिति और मज़बूत होने की उम्मीद है।