जिनेवा में यूएनसीटीएडी उपभोक्ता संरक्षण सत्र की अध्यक्षता करेगा भारत, सचिव निधि खरे का नेतृत्व
सारांश
मुख्य बातें
भारत 7 जुलाई 2025 से जिनेवा के ऐतिहासिक पैले डे नेशंस में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (यूएनसीटीएडी) के तत्वावधान में आयोजित इंटरगवर्नमेंटल ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स (IGE) ऑन कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ एंड पॉलिसी के नौवें सत्र की अध्यक्षता करेगा। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इस बहु-देशीय विमर्श का नेतृत्व करेंगी।
सत्र की संरचना और भागीदारी
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, यह दो दिवसीय बैठक होगी जिसमें सदस्य देश, अंतरराष्ट्रीय संगठन, उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, शिक्षाविद और अन्य हितधारक सम्मिलित होंगे। बैठक में उपभोक्ता संरक्षण कानून और नीति से जुड़े उभरते वैश्विक मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।
संयुक्त राष्ट्र दिशानिर्देशों के तहत गठित IGE उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति-संवाद का प्रमुख अंतर-सरकारी मंच है। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल वाणिज्य और सीमा-पार लेनदेन में तेज़ी के साथ उपभोक्ता अधिकारों की जटिलताएँ भी बढ़ रही हैं।
सत्र की प्रमुख विशेषताएँ
इस सत्र का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू संयुक्त राष्ट्र उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा सिद्धांतों का औपचारिक शुभारंभ होगा, जिन्हें दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया था। इसके अतिरिक्त 'Why the Principles Matter' विषय पर एक उच्चस्तरीय फायरसाइड चैट आयोजित होगी, जिसमें भारत भी सक्रिय रूप से भाग लेगा।
सत्र में संयुक्त राष्ट्र उपभोक्ता संरक्षण दिशानिर्देश (UNGCP) के प्रभावी क्रियान्वयन, हालिया कानूनी एवं संस्थागत विकास, क्षमता निर्माण पहलों तथा आगामी सत्र के लिए रिपोर्ट एवं एजेंडे को अंतिम रूप देने पर भी विस्तृत चर्चा होगी।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में जिनेवा में आयोजित 'प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता संरक्षण पर 9वें संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' के दौरान भारत ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) और उसके प्री-लिटिगेशन मॉडल के माध्यम से सीमा-पार उपभोक्ता विवाद समाधान में अपने अनुभव साझा किए थे। यह भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह वैश्विक उपभोक्ता नीति निर्माण में अपनी आवाज़ मज़बूत कर रहा है।
यूएनसीटीएडी ने विशेष रूप से निधि खरे को इस सत्र की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया है — यह भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है। वे तीन दिवसीय चर्चाओं में सदस्य देशों के बीच प्रमुख उपभोक्ता संरक्षण प्राथमिकताओं पर विमर्श का नेतृत्व करेंगी।
आगे क्या होगा
इस सत्र में लिए गए निर्णय और तैयार की गई रिपोर्ट भविष्य की वैश्विक उपभोक्ता नीति की दिशा तय करने में सहायक होंगे। भारत के लिए यह अवसर न केवल अपनी घरेलू उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का है, बल्कि उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता अधिकारों के नए मानक गढ़ने में भी योगदान देने का है।