भारत बना एपीएसी का दूसरा सबसे बड़ा डेटा सेंटर बाज़ार, छह साल में लाइव IT क्षमता 1.7 GW पर चार गुना
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) में चीन के बाद सबसे बड़े डेटा सेंटर बाज़ार के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है। ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस (BNEF) की 21 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता चार गुना बढ़कर 1.7 गीगावाट हो गई है — जो भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे में आए असाधारण बदलाव को दर्शाती है।
मज़बूत परियोजना पाइपलाइन
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में फिलहाल 1.3 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है। इसके अलावा 3.2 गीगावाट की अन्य परियोजनाओं के लिए भूमि, बिजली और निर्माण की आवश्यक मंजूरियाँ पहले ही हासिल की जा चुकी हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 'ऊर्जा की उपलब्धता और फाइबर कनेक्टिविटी के मामले में मज़बूत स्थिति भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए पसंदीदा स्थान बनाती है।'
महाराष्ट्र का वर्चस्व
महाराष्ट्र भारत का सबसे प्रमुख डेटा सेंटर बाज़ार बना हुआ है और देश की कुल लाइव आईटी क्षमता में उसकी हिस्सेदारी 55 प्रतिशत है। निर्माण-पूर्व मंजूरी प्राप्त परियोजनाओं की सबसे बड़ी पाइपलाइन भी महाराष्ट्र में ही है। अगले चरण के विकास में आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश की भूमिका महत्त्वपूर्ण होने का अनुमान है, क्योंकि कंपनियाँ इन राज्यों में बड़े निवेश और परियोजनाओं की घोषणा कर रही हैं।
निवेश का आकार और स्रोत
घरेलू कारोबारी समूहों ने भारत में डेटा सेंटर विकास के लिए 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो कुल घोषित निवेश का 45 प्रतिशत है। BNEF की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ गूगल, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट अगला सबसे बड़ा निवेशक समूह हैं, जिन्होंने 84 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। घोषित कुल निवेश का लगभग 95 प्रतिशत बड़े हाइपरस्केल एआई कैंपस पर केंद्रित है।
बिजली माँग में आठ गुना उछाल का अनुमान
BNEF को उम्मीद है कि भारत में डेटा सेंटरों की बिजली माँग 2025 में 11 टेरावाट-घंटे से बढ़कर 2035 तक 91 टेरावाट-घंटे हो जाएगी — यानी एक दशक में आठ गुना से अधिक की वृद्धि। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई हाइपरस्केलर कंपनियों ने 2030 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य तय किए हैं, इसलिए अक्षय ऊर्जा के उपयोग में भी समानांतर वृद्धि अपेक्षित है। इस बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 2021 से अब तक 7.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार डिजिटल बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दे रही है और एआई-केंद्रित निवेश की वैश्विक होड़ तेज़ है। गौरतलब है कि हाइपरस्केल एआई कैंपस की बढ़ती संख्या के साथ ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय स्रोतों की उपलब्धता भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती बनने वाली है।