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भारत में अल्ट्रा-रिच आबादी में ऐतिहासिक उछाल, 2031 तक 25,217 पहुंचने का अनुमान: नाइट फ्रैंक रिपोर्ट

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भारत में अल्ट्रा-रिच आबादी में ऐतिहासिक उछाल, 2031 तक 25,217 पहुंचने का अनुमान: नाइट फ्रैंक रिपोर्ट

सारांश

नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में अल्ट्रा-रिच लोगों की संख्या 2031 तक 25,217 पहुंच जाएगी। अरबपतियों की संख्या 313 होगी और वैश्विक अरबपति आबादी में भारत की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत तक बढ़ेगी। भारत अब वैश्विक धन रैंकिंग में छठे स्थान पर है।

मुख्य बातें

भारत में UHNWI की संख्या अभी 19,877 है, जो 2031 तक 27% बढ़कर 25,217 होगी — नाइट फ्रैंक रिपोर्ट।
भारत में 2026 में 207 अरबपति हैं, जो अमेरिका और चीन के बाद विश्व में तीसरा स्थान है।
2031 तक अरबपतियों की संख्या 51% बढ़कर 313 होने का अनुमान है।
वैश्विक अरबपति आबादी में भारत की हिस्सेदारी 6.7% से बढ़कर 8% होगी।
मुंबई 35.4% हिस्सेदारी के साथ अग्रणी, दिल्ली 22.8% के साथ दूसरे स्थान पर।
अल्ट्रा-रिच आबादी में भारत अब वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर पहुंचा।

भारत में अल्ट्रा-हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल (UHNWI) यानी बेहद अमीर लोगों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हो रहा है। नाइट फ्रैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी 19,877 UHNWI हैं, जो 2031 तक 27 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 25,217 तक पहुंच जाएंगे। यह रिपोर्ट गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को जारी की गई।

भारत के अरबपतियों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अरबपतियों की संख्या पिछले पांच वर्षों में 58 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। 2026 में भारत के 207 अरबपति हैं, जो इसे अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर रखता है।

2031 तक इस संख्या में 51 प्रतिशत की और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे भारत में अरबपतियों की कुल संख्या 313 हो जाएगी। इसके साथ ही वैश्विक अरबपति आबादी में भारत की हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 8 प्रतिशत हो जाएगी।

वैश्विक धन परिदृश्य में भारत का बढ़ता दबदबा

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2026 में वैश्विक UHNWI आबादी में भारत की हिस्सेदारी 2.8 प्रतिशत रहेगी, जो पांच साल पहले केवल 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक थी। अल्ट्रा-रिच आबादी के मामले में भारत अब विश्व स्तर पर छठे स्थान पर आ गया है।

यह आंकड़े वैश्विक धन परिदृश्य में भारत के बढ़ते महत्व और आर्थिक ताकत को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

मुंबई अग्रणी, दिल्ली-हैदराबाद की हिस्सेदारी बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में धन का वितरण अब भौगोलिक रूप से अधिक व्यापक होता जा रहा है। मुंबई अभी भी 35.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश की अल्ट्रा-रिच राजधानी बनी हुई है।

दिल्ली की हिस्सेदारी बढ़कर 22.8 प्रतिशत हो गई है। चेन्नई और हैदराबाद ने भी पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जबकि बेंगलुरु की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट देखी गई है।

विशेषज्ञों की राय: डिजिटलीकरण और उद्यमिता बड़े कारण

नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि भारत के वेल्थ आधार में यह विस्तार देश के अधिक उद्यमशील और वित्तीय रूप से परिष्कृत अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण, सूचीबद्ध शेयर बाजार, निजी पूंजी और पारिवारिक स्वामित्व वाले व्यवसाय इस निरंतर धन सृजन के प्रमुख चालक हैं। ये कारक आने वाले वर्षों में भी भारत की वेल्थ ग्रोथ को गति देते रहेंगे।

अगले कुछ वर्षों में भारत के UHNWI और अरबपतियों की संख्या में यह वृद्धि न केवल देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारत वैश्विक निवेश और लग्जरी बाजार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ज़रूरी है कि इस धन सृजन का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे और आर्थिक असमानता को कम करने पर नीतिगत ध्यान दिया जाए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में अल्ट्रा-रिच लोगों की संख्या 2031 तक कितनी होगी?
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में UHNWI की संख्या 2031 तक 27 प्रतिशत बढ़कर 25,217 हो जाएगी। अभी यह संख्या 19,877 है।
भारत में 2026 में कितने अरबपति हैं?
2026 में भारत में 207 अरबपति हैं, जो अमेरिका और चीन के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। पिछले पांच वर्षों में यह संख्या 58 प्रतिशत बढ़ी है।
वैश्विक UHNWI आबादी में भारत की हिस्सेदारी कितनी है?
2026 में वैश्विक UHNWI आबादी में भारत की हिस्सेदारी 2.8 प्रतिशत है, जो पांच साल पहले 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक थी। अल्ट्रा-रिच आबादी में भारत अब छठे स्थान पर है।
भारत में अल्ट्रा-रिच लोगों की सबसे अधिक आबादी किस शहर में है?
मुंबई में भारत के 35.4 प्रतिशत UHNWI रहते हैं, जो इसे देश का सबसे अमीर शहर बनाता है। दिल्ली 22.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।
भारत में धन सृजन के प्रमुख कारण क्या हैं?
नाइट फ्रैंक इंडिया के MD शिशिर बैजल के अनुसार, डिजिटलीकरण, सूचीबद्ध शेयर बाजार, निजी पूंजी और पारिवारिक व्यवसाय भारत में धन सृजन के मुख्य कारण हैं। यह देश के उद्यमशील और परिष्कृत अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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