5 नवंबर 2026
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भारत में वेयरहाउसिंग लीजिंग Q3 2026 में 12% बढ़ी, 1.91 करोड़ वर्ग फुट का रिकॉर्ड

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भारत में वेयरहाउसिंग लीजिंग Q3 2026 में 12% बढ़ी, 1.91 करोड़ वर्ग फुट का रिकॉर्ड

सारांश

भारत के वेयरहाउसिंग बाज़ार ने Q3 2026 में दमदार वापसी की — लीजिंग 12% उछलकर 1.91 करोड़ वर्ग फुट पर पहुँची। विनिर्माण और 3PL की 76% हिस्सेदारी और FMCG माँग में 101% उछाल बताते हैं कि भारत की आपूर्ति श्रृंखला संरचनात्मक रूप से मज़बूत हो रही है।

मुख्य बातें

भारत के आठ प्रमुख वेयरहाउसिंग बाज़ारों में Q3 2026 में लीजिंग सालाना 12% बढ़कर 1.91 करोड़ वर्ग फुट हुई।
कुल माँग में विनिर्माण कंपनियों और 3PL ऑपरेटरों की संयुक्त हिस्सेदारी 76% रही।
3PL ऑपरेटरों की लीजिंग में 27% , FMCG में 101% और FMCD में 43% की वृद्धि दर्ज हुई।
ई-कॉमर्स कंपनियों की लीजिंग में तुलनात्मक रूप से धीमी 5% वृद्धि आई।
नाइट फ्रैंक इंडिया के MD शिशिर बैजल ने भूमि उपलब्धता, त्वरित मंज़ूरी और आधुनिक बुनियादी ढाँचे को अगले विकास चरण की कुंजी बताया।

भारत के वेयरहाउसिंग सेक्टर में 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) के दौरान उल्लेखनीय पुनरुद्धार दर्ज किया गया, क्योंकि देश के आठ प्रमुख बाज़ारों में वेयरहाउसिंग स्पेस की लीजिंग गतिविधि सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 1.91 करोड़ वर्ग फुट पर पहुँच गई। नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे विनिर्माण कंपनियों और थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) ऑपरेटरों की मज़बूत माँग प्रमुख कारण रही। 5 नवंबर 2026 को जारी यह रिपोर्ट दूसरी तिमाही की सुस्ती के बाद सेक्टर में वापसी की पुष्टि करती है।

वृद्धि के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार, तीन मुख्य कारकों ने इस उछाल को गति दी — घरेलू विनिर्माण गतिविधियों में तेज़ी, आउटसोर्स लॉजिस्टिक्स परिचालन का विस्तार, और त्योहारी सीज़न से पहले कंपनियों द्वारा इन्वेंट्री बढ़ाना। उल्लेखनीय है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तेल व माल ढुलाई की ऊँची लागत के बावजूद क्षेत्र की वृद्धि मज़बूत बनी रही।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पुनर्गठन के बीच भारत एक प्राथमिक विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन

तिमाही के दौरान वेयरहाउसिंग की कुल माँग में विनिर्माण कंपनियों और 3PL ऑपरेटरों की संयुक्त हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माताओं की माँग के कारण विनिर्माण क्षेत्र में लीजिंग सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़ी।

वहीं, 3PL ऑपरेटरों द्वारा वेयरहाउसिंग स्पेस लीज पर लेने में 27 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज हुई। परिचालन लागत में उतार-चढ़ाव के बीच अधिक लचीलापन हासिल करने के लिए कंपनियाँ तेज़ी से अपने वेयरहाउसिंग और वितरण कार्य आउटसोर्स कर रही हैं।

FMCG और ई-कॉमर्स का योगदान

FMCG (दैनिक उपयोग की वस्तुएँ) कंपनियों की माँग में सालाना आधार पर 101 प्रतिशत और FMCD (उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ) कंपनियों की माँग में 43 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई। त्योहारी सीज़न से पूर्व उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों ने अपने वेयरहाउसिंग नेटवर्क का व्यापक विस्तार किया।

ई-कॉमर्स कंपनियों की लीजिंग में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई — यह अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार FMCG और FMCD की तुलना में एक अंतर उजागर करती है, जो सुझाती है कि त्योहारी माँग का अनुमान अब ब्रांड और लॉजिस्टिक्स खिलाड़ी सीधे अपने वेयरहाउसिंग ढाँचे में कर रहे हैं।

विशेषज्ञ की राय

नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतरराष्ट्रीय साझेदार, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, 'भारत का वेयरहाउसिंग बाज़ार दो महत्वपूर्ण बदलावों से आकार ले रहा है — घरेलू विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार और विशेष लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं की बढ़ती भूमिका। इस क्षेत्र में विकास का अगला चरण केवल लीजिंग की मात्रा पर ही निर्भर नहीं करेगा, बल्कि विनिर्माण और उपभोग केंद्रों की ज़रूरतों को पूरा करने वाले स्थानों पर गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।'

बैजल ने यह भी कहा कि 'उपयुक्त भूमि की उपलब्धता, समय पर मंज़ूरी और आधुनिक बुनियादी ढाँचे में निवेश एक ऐसे वेयरहाउसिंग इकोसिस्टम के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होंगे, जो भारत की बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं की ज़रूरतों को पूरा कर सके।'

आगे की राह

गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब Q3 में वेयरहाउसिंग लीजिंग ने सालाना आधार पर मज़बूत वृद्धि दर्ज की है। विशेषज्ञों के अनुसार चौथी तिमाही में त्योहारी सीज़न की माँग, PM गति शक्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर पुश और 'चाइना प्लस वन' रणनीति के तहत भारत में आने वाले वैश्विक ब्रांडों की ज़रूरतें लीजिंग गतिविधि को और बढ़ावा दे सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो टिकाऊ वृद्धि का संकेत है। लेकिन बैजल की चेतावनी — भूमि, मंज़ूरी, आधुनिक ढाँचा — वही पुरानी बाधाएँ हैं जो वर्षों से उद्योग को रोक रही हैं। जब तक इन संरचनात्मक अड़चनों का समाधान नहीं होता, लीजिंग की रफ्तार और आपूर्ति-श्रृंखला की वास्तविक क्षमता के बीच की खाई चौड़ी ही रहेगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में वेयरहाउसिंग लीजिंग Q3 2026 में कितनी बढ़ी?
नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, Q3 2026 (जुलाई–सितंबर) में देश के आठ प्रमुख बाज़ारों में वेयरहाउसिंग लीजिंग सालाना आधार पर 12% बढ़कर 1.91 करोड़ वर्ग फुट पर पहुँच गई। यह दूसरी तिमाही की सुस्ती के बाद क्षेत्र की मज़बूत वापसी है।
वेयरहाउसिंग माँग में सबसे ज़्यादा वृद्धि किस सेक्टर में आई?
FMCG (दैनिक उपयोग की वस्तुएँ) कंपनियों की माँग में सालाना आधार पर 101% की सबसे तेज़ वृद्धि आई। इसके बाद 3PL ऑपरेटरों में 27%, FMCD (उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ) में 43% और ई-कॉमर्स में 5% वृद्धि दर्ज की गई।
3PL ऑपरेटरों की वेयरहाउसिंग माँग क्यों बढ़ रही है?
परिचालन लागत में उतार-चढ़ाव के बीच अधिक लचीलापन हासिल करने के लिए कंपनियाँ तेज़ी से अपने वेयरहाउसिंग और वितरण कार्य थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों को आउटसोर्स कर रही हैं। Q3 2026 में 3PL लीजिंग में 27% की वृद्धि इसी प्रवृत्ति को दर्शाती है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अनुसार वेयरहाउसिंग सेक्टर के विकास में अगली बड़ी चुनौती क्या है?
नाइट फ्रैंक इंडिया के MD शिशिर बैजल के अनुसार, उपयुक्त भूमि की उपलब्धता, समय पर सरकारी मंज़ूरी और आधुनिक बुनियादी ढाँचे में निवेश सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। उनका कहना है कि अगला विकास चरण सिर्फ लीजिंग मात्रा नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
Q3 2026 में वेयरहाउसिंग माँग किन उद्योगों ने मिलकर सबसे अधिक हिस्सेदारी बनाई?
विनिर्माण कंपनियों और 3PL ऑपरेटरों ने मिलकर Q3 2026 में कुल वेयरहाउसिंग माँग में 76% हिस्सेदारी बनाई। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माताओं ने विनिर्माण क्षेत्र की लीजिंग में 11% वृद्धि में योगदान दिया।
राष्ट्र प्रेस
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