5 नवंबर 2026
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सेमीकॉन 2.0: भारत में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी, 5 ने शुरू किया व्यावसायिक उत्पादन

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सेमीकॉन 2.0: भारत में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी, 5 ने शुरू किया व्यावसायिक उत्पादन

सारांश

नीति से क्रियान्वयन का सफर — भारत ने सेमीकॉन 2.0 के तहत 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को हरी झंडी दी है, जिनमें से 5 पहले से उत्पादन में हैं। बिहार के साथ MoU और पहले आईएसआईजी समिट का आयोजन संकेत देता है कि भारत की चिप महत्वाकांक्षा अब कागज़ से ज़मीन पर उतर रही है।

मुख्य बातें

ISM CEO अमितेश कुमार सिन्हा ने 5 नवंबर 2026 को बताया कि सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इनमें से 5 परियोजनाएँ पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।
सेमीकॉन 2.0 का लक्ष्य चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, R&D, कच्चा माल और प्रतिभा विकास सहित संपूर्ण इकोसिस्टम बनाना है।
आईएसआईजी और बिहार सरकार के बीच सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग विकास के लिए रणनीतिक MoU पर हस्ताक्षर हुए।
भारत में पहला आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट नई दिल्ली में सम्पन्न; अगला संस्करण 30 नवंबर–1 दिसंबर 2027 को होगा।
वाइड-बैंडगैप तकनीकों (SiC, GaN), OSAT और AI-संचालित डेटा सेंटर क्षमताओं को भारत के लिए उच्च-अवसर क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया।

भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अब नीतिगत घोषणाओं की सीमा से आगे निकलकर ठोस क्रियान्वयन के चरण में प्रवेश कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव एवं इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमितेश कुमार सिन्हा ने 5 नवंबर 2026 को बताया कि सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को गति देने के लिए 12 परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिनमें से 5 परियोजनाओं ने व्यावसायिक उत्पादन भी आरंभ कर दिया है। यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट इंडिया 2026 के दूसरे और अंतिम दिन सामने आई।

सेमीकॉन 2.0 का व्यापक दायरा

सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सेमीकॉन 2.0 का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। यह पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के निर्माण का रोडमैप है, जिसमें डिजाइन कंपनियाँ, कच्चा माल, रसायन, औद्योगिक गैसें, उपकरण निर्माता, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रतिभा विकास जैसे सभी महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास तीन बड़े प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हैं — एक विशाल घरेलू बाजार, समृद्ध तकनीकी प्रतिभा आधार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएँ। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दीर्घकालिक सफलता के लिए मजबूत वैश्विक तकनीकी साझेदारियाँ और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाएँ अनिवार्य हैं।

समिट में मुख्य विषय और चर्चाएँ

'इंटेलिजेंट फ्यूचर को सक्षम बनाना : एडवांस्ड सेमीकंडक्टर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स' विषय पर आयोजित यह सम्मेलन भारत में आयोजित पहला आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट था। इसमें वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, शोधकर्ता और सरकारी प्रतिनिधि शामिल हुए।

सम्मेलन में उन्नत पैकेजिंग, आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (OSAT), पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) और गैलियम नाइट्राइड (GaN) जैसी वाइड-बैंडगैप तकनीकों पर गहन विमर्श हुआ। इसके अतिरिक्त, AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती माँग तथा भारत में डिजाइन, उपकरण और आपूर्ति शृंखला इकोसिस्टम के विकास पर भी व्यापक चर्चा की गई।

बिहार सरकार के साथ रणनीतिक सहयोग समझौता

समिट के दौरान एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आईएसआईजी ने बिहार सरकार के साथ राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विकास हेतु एक रणनीतिक सहयोग समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि परंपरागत रूप से सेमीकंडक्टर निवेश महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों तक सीमित रहा है — बिहार का इस क्षेत्र में प्रवेश एक नई भौगोलिक विविधता का संकेत है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

आईएसआईजी की भारत प्रमुख और पावर सेमीकंडक्टर विभाग की प्रमुख डॉ. शालु अग्रवाल ने कहा कि इस सम्मेलन ने साबित किया है कि जब वैश्विक उद्योग, निवेशक और सरकार एक मंच पर आते हैं तो नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत पैकेजिंग और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत के पास वास्तविक अवसर मौजूद हैं और आईएसआईजी का लक्ष्य इन अवसरों को प्रौद्योगिकी, पूंजी और साझेदारियों से जोड़ना है।

डॉ. अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में भारत की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निवेश, तकनीकी सहयोग और अनुसंधान क्षमताओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन के दौर में है और अमेरिका, यूरोप तथा जापान के बाद भारत भी इस दौड़ में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस शिखर सम्मेलन का अगला संस्करण 30 नवंबर और 1 दिसंबर 2027 को भारत में आयोजित किया जाएगा, जो इस क्षेत्र की निरंतर प्रगति का आकलन करने का अगला बड़ा अवसर होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये परियोजनाएँ ताइवान और दक्षिण कोरिया की तरह उन्नत नोड (advanced node) विनिर्माण तक पहुँच पाएंगी या केवल पैकेजिंग और असेंबली तक सीमित रहेंगी। बिहार जैसे नए राज्य का प्रवेश भौगोलिक विविधता की दृष्टि से स्वागत योग्य है, लेकिन बुनियादी ढाँचे और कुशल श्रमशक्ति की उपलब्धता पर सवाल बने रहेंगे। वैश्विक सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्धा में आपूर्ति शृंखला की गहराई और तकनीकी स्वायत्तता ही दीर्घकालिक बढ़त तय करती है — मात्र परियोजनाओं की संख्या नहीं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन 2.0 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
सेमीकॉन 2.0 भारत सरकार की सेमीकंडक्टर नीति का क्रियान्वयन चरण है, जिसका उद्देश्य केवल चिप निर्माण नहीं बल्कि डिजाइन, कच्चा माल, R&D और प्रतिभा विकास सहित संपूर्ण इकोसिस्टम खड़ा करना है। इसके तहत अब तक 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।
भारत में कितनी सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ स्वीकृत हैं और कितनी उत्पादन में हैं?
ISM CEO अमितेश कुमार सिन्हा के अनुसार सरकार ने कुल 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 5 ने पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। शेष परियोजनाएँ क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
आईएसआईजी और बिहार सरकार के बीच किस विषय पर समझौता हुआ?
आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट 2026 के दौरान आईएसआईजी ने बिहार सरकार के साथ राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विकास के लिए एक रणनीतिक सहयोग समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के सेमीकंडक्टर मानचित्र पर नए राज्यों को लाने की कोशिश का हिस्सा है।
भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
ISM CEO के अनुसार वैश्विक तकनीकी साझेदारियाँ और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएँ भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग की दीर्घकालिक सफलता के लिए अनिवार्य हैं। इसके अतिरिक्त, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता और विदेशी निवेश आकर्षित करना भी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
अगला आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट कब और कहाँ होगा?
आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट का अगला संस्करण 30 नवंबर और 1 दिसंबर 2027 को भारत में आयोजित किया जाएगा। यह भारत में इस श्रृंखला का दूसरा आयोजन होगा।
राष्ट्र प्रेस
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