महाराष्ट्र बायोप्लास्टिक्स पॉलिसी-2026 मंजूर: ₹25,000 करोड़ निवेश और 1.31 लाख रोजगार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
महायुति सरकार ने 3 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र बायोप्लास्टिक्स पॉलिसी-2026 को मंजूरी देकर राज्य को देश का प्रमुख बायोप्लास्टिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया। ₹25,000 करोड़ के निवेश को आकर्षित करने, 1.31 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने और ₹30,039 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य रखने वाली यह नीति 2026 से 2031 तक प्रभावी रहेगी। प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स की बढ़ती चुनौती के बीच यह नीति राज्य को हरित विनिर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है।
नीति के प्रमुख लक्ष्य और वित्तीय प्रावधान
राज्य मंत्रिमंडल ने इस नीति के लिए ₹10,892 करोड़ के कुल परिव्यय को स्वीकृति दी है। इसमें पहले पाँच वर्षों में ₹782 करोड़ और अगले 20 वर्षों में ₹10,110 करोड़ व्यय का प्रावधान है। वर्ष 2026-27 के लिए पैकेज स्कीम ऑफ इंसेंटिव्स के तहत ₹50 करोड़ का अलग से आवंटन किया गया है।
नीति का एक प्रमुख उत्पादन लक्ष्य यह है कि प्रतिवर्ष 2 लाख टन पीएलए (पॉलीलैक्टिक एसिड) और अन्य बायोपॉलिमर उत्पादन क्षमता विकसित की जाए। साथ ही राज्य की आयातित पीएलए पर निर्भरता में 50 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों और निर्यात पर फोकस
सरकार ने चुनिंदा क्षेत्रों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के 30 प्रतिशत उपयोग को कम्पोस्टेबल विकल्पों से बदलने का लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा 1 अरब डॉलर के निर्यात और 1 लाख किसानों को बायोप्लास्टिक्स वैल्यू चेन से जोड़ने की योजना भी इस नीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बायोप्लास्टिक्स बाज़ार तेज़ी से विस्तार कर रहा है, लेकिन वैश्विक बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 0.46 प्रतिशत है।
महाराष्ट्र गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन में अग्रणी राज्यों में है, जिससे मक्का, बैगास और शीरे जैसे कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होती है। राज्य का मजबूत रासायनिक उद्योग, प्रमुख अनुसंधान संस्थान और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसे बायोप्लास्टिक्स उद्योग के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल बनाता है। गौरतलब है कि वर्ष 2022-23 में महाराष्ट्र में करीब 3.96 लाख टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हुआ था, जिसने इस दिशा में नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता को और बल दिया।
एंकर परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन
बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने चरणबद्ध प्रोत्साहन व्यवस्था तैयार की है। ₹3,000 करोड़ या उससे अधिक निवेश वाली पहली दो एंकर परियोजनाओं को विशेष लाभ दिए जाएंगे — इनमें 10 वर्षों में स्थिर पूंजी निवेश पर 30 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी, 12 वर्षों तक 100 प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, बिजली शुल्क में पूर्ण छूट और स्टांप शुल्क में राहत शामिल है। इसी तरह के लाभ पहले 10 पात्र बड़े, मेगा और एमएसएमई उद्योगों को भी उपलब्ध होंगे।
स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹25 लाख होगी। शून्य तरल अपशिष्ट (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) प्रणाली, नवीकरणीय ऊर्जा और सर्कुलर इकोनॉमी-आधारित तकनीकों को अपनाने वाली इकाइयों को अतिरिक्त 'ग्रीन इंसेंटिव' भी मिलेगा।
वैल्यू चेन और मानक
नई नीति कच्चे माल के प्रसंस्करण से लेकर पीएलए, पीएचए, पीबीएस और अन्य बायोपॉलिमर के उत्पादन, कंपाउंडिंग, तैयार उत्पादों के निर्माण, परीक्षण प्रयोगशालाओं, कम्पोस्टिंग और प्रमाणन सेवाओं तक पूरी वैल्यू चेन को कवर करती है। सभी पात्र इकाइयों के लिए बीआईएस/आईएसओ 17088 अथवा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त समकक्ष मानकों का प्रमाणन अनिवार्य होगा। केवल नई (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं और बायोप्लास्टिक्स के लिए समर्पित ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजनाओं को ही इस नीति का लाभ मिलेगा।
आगे की राह
नीति के फोकस क्षेत्रों में क्लस्टर-आधारित औद्योगिक पार्क, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, दो उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस), कौशल विकास, एमएसएमई और स्टार्टअप को प्रोत्साहन, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं की भागीदारी तथा विदेशी निवेश को बढ़ावा देना शामिल है। यदि यह नीति अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करती है, तो महाराष्ट्र न केवल देश में बल्कि एशिया में भी टिकाऊ विनिर्माण का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।