'मेक इन इंडिया' के 12 वर्ष: पीयूष गोयल बोले — भारत अब दुनिया के लिए बना रहा उत्पाद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 सितंबर 2026 को 'मेक इन इंडिया' की 12वीं वर्षगांठ पर कहा कि भारत अब केवल अपनी घरेलू ज़रूरतों के लिए नहीं, बल्कि समूची दुनिया के लिए उत्पाद निर्मित कर रहा है। उन्होंने इस पहल को एक ऐसे दृष्टिकोण की संज्ञा दी जो इस विश्वास पर टिका है कि भारत वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बन सकता है।
मंत्री का संदेश और पहल की पृष्ठभूमि
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि जब कोई देश अपनी क्षमताओं पर विश्वास करता है और सरकार निरंतर सुधारों और ठोस कदमों के ज़रिए उस विश्वास को मज़बूती देती है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2014 में भारत में उपयोग होने वाले अनेक उत्पाद आयात पर निर्भर थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थिति को देश की नियति मानने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि 'मेक इन इंडिया' अभियान की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को हुई थी, जिसका मूल उद्देश्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में स्थापित करना था। बारह वर्षों की इस यात्रा में नीति, निवेश और बुनियादी ढाँचे — तीनों मोर्चों पर उल्लेखनीय बदलाव आए हैं।
प्रमुख आर्थिक उपलब्धियाँ
गोयल ने आँकड़ों के हवाले से बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में रिकॉर्ड $94.53 अरब का वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल FDI प्रवाह $843 अरब तक पहुँच चुका है।
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के तहत 31 मार्च 2026 तक ₹2.40 लाख करोड़ का वास्तविक निवेश हुआ, ₹23.8 लाख करोड़ का उत्पादन एवं बिक्री दर्ज की गई, ₹15.2 लाख करोड़ का निर्यात हुआ और 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हुए।
क्षेत्र-विशेष लाभ और डिजिटल पहल
गोयल के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को PLI योजनाओं से सर्वाधिक लाभ हुआ है। उन्होंने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) का भी उल्लेख किया और कहा कि इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब तक 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर दिए जा चुके हैं, जो छोटे उद्यमों को बड़ा प्रोत्साहन दे रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण बुनियादी ढाँचा खड़ा करना है।
आत्मविश्वास और 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' की असली सफलता केवल आँकड़ों में नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास में है जो इसने स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों, निर्माताओं, नवोन्मेषकों और निर्यातकों में जगाया है। उन्होंने कहा, 'भारत बना सकता है, भारत नवाचार कर सकता है और भारत दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर सकता है।'
गोयल ने स्पष्ट किया कि इस पहल की यात्रा अभी जारी है और इसका अगला लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण महाशक्ति बनाना है — एक ऐसा लक्ष्य जो विकसित भारत 2047 के व्यापक विज़न को भी मज़बूती देता है। 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' सुधारों ने नियमों को सरल और अनुपालन का बोझ कम किया है, जिससे नए निवेश के अवसर बने हैं।