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मार्च में इक्विटी फंड में निवेश 11% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस में निवेशकों का आकर्षण

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मार्च में इक्विटी फंड में निवेश 11% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस में निवेशकों का आकर्षण

सारांश

मार्च में भारतीय इक्विटी फंड्स में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो संकेत करता है कि निवेशक मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जानें इस रिपोर्ट में और क्या दर्शाया गया है।

मुख्य बातें

मार्च में इक्विटी फंड में 46,501 करोड़ रुपए का नेट फ्लो हुआ।
निवेशकों ने मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड से धन निकालकर इक्विटी में निवेश बढ़ाया।
भारतीय शेयर बाजार में तेज रिकवरी के कारण 59,629 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर निवेशकों की नई पसंद बने हैं।
निवेशकों की चिंता के चलते मनी मार्केट में बड़ा उलटफेर हुआ।

मुंबई, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक नई विश्लेषण रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च में इक्विटी फंड्स में निवेश (नेट फ्लो) बढ़कर 46,501 करोड़ रुपए हो गया, जो फरवरी के 41,934 करोड़ रुपए के मुकाबले लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

वैलम कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में कुल नेट एसेट फ्लो में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला, जहां निवेशकों ने मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स से धन निकालकर इक्विटी में निवेश बढ़ाने का निर्णय लिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शेयर बाजार में आई तेज रिकवरी के कारण 59,629 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ। पिछले एक महीने में स्मॉल-कैप शेयरों में 8.1 प्रतिशत, मिड-कैप में 6.9 प्रतिशत और लार्ज-कैप में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालाँकि, साल की शुरुआत से अब तक सभी श्रेणियों में रिटर्न अभी भी नकारात्मक बना हुआ है।

इसी बीच, मनी मार्केट फंड्स में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। फरवरी में जहाँ 42,800 करोड़ रुपए का इनफ्लो था, वह मार्च में घटकर -1,94,775 करोड़ रुपए हो गया। इसी तरह फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी आउटफ्लो बढ़कर -76,354 करोड़ रुपए हो गया, जो फरवरी में -16,919 करोड़ रुपए था। यह संकेत करता है कि निवेशक ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं या पैसा निकाल रहे हैं।

कमोडिटी फंड्स में निवेश सकारात्मक रहा, लेकिन इसमें तेजी कम देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि सोना-चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।

कुल मिलाकर, नेट एसेट फ्लो फरवरी के 73,589 करोड़ रुपए से बदलकर मार्च में -2,20,797 करोड़ रुपए हो गया, जिसका मुख्य कारण मनी मार्केट से बड़े पैमाने पर धन का निकलना रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी और अमेरिका से निवेश का रुख बदलना एक बड़ा ट्रेंड माना जा रहा है। थीमैटिक ईटीएफ में सेमीकंडक्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

भारत में 2026 के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं, जबकि पहले पीएसयू और कंजंप्शन सेक्टर अधिक पसंद किए जाते थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निवेशक अब अधिक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च में लार्ज-कैप फंड्स में 28,558 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो फरवरी से 19,242 करोड़ रुपए ज्यादा है। फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप में भी लगातार निवेश जारी रहा। वहीं, आर्बिट्राज फंड्स से 22,182 करोड़ रुपए की निकासी हुई और डायनेमिक स्ट्रैटेजी फंडों से भी पूंजी का नुकसान हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जो पहले पीएसयू और कंजंप्शन सेक्टरों की तुलना में एक नया ट्रेंड दर्शाता है। यह बदलाव अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत हो सकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्च में निवेश में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
मार्च में निवेश में वृद्धि का मुख्य कारण भारतीय शेयर बाजार में तेज रिकवरी और निवेशकों का मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स से धन निकालकर इक्विटी में लगाना है।
कमोडिटी फंड्स में निवेश की रफ्तार धीमी क्यों हुई है?
कमोडिटी फंड्स में निवेश की रफ्तार धीमी होने का कारण सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश की कम मांग है।
राष्ट्र प्रेस
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