भारत-अमेरिका ट्रेड डील और कच्चे तेल की कीमत से तय होगी अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी सप्ताह (30 जून – 4 जुलाई) अत्यंत निर्णायक रहने वाला है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुझान और एक के बाद एक आने वाले घरेलू आर्थिक आंकड़े — ये चार कारक मिलकर सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करेंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: निवेशकों की नज़र
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। यह बयान बाजार में उम्मीद की एक नई लहर लेकर आया है, क्योंकि इस प्रस्तावित समझौते से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुँच मिलने की संभावना है।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता कई महीनों से जारी है। यदि यह डील अगले सप्ताह किसी ठोस रूप में सामने आती है, तो आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल क्षेत्रों के शेयरों में तेज़ प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमत: भू-राजनीतिक तनाव का असर
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई हैं। अमेरिका ने 27 जून को ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, जिसकी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज़ को निशाना बनाना बताया गया। हालाँकि, इस तनाव के बावजूद ब्रेंट क्रूड अभी 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है और हाल के दिनों में इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
कच्चे तेल की कम कीमतें भारत के लिए सकारात्मक संकेत हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ है, जिसे विश्लेषक कम तेल आयात लागत और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों से जोड़ रहे हैं।
घरेलू आर्थिक आंकड़े: कैलेंडर पर नज़र
अगले सप्ताह आर्थिक आंकड़ों की एक महत्वपूर्ण श्रृंखला बाजार को प्रभावित करेगी। 29 जून को औद्योगिक उत्पादन (IIP) और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट के आंकड़े जारी होंगे। 30 जून को मई माह का राजकोषीय घाटा और व्यापार संतुलन सामने आएगा।
1 जुलाई को जीएसटी संग्रह, ऑटो सेल्स और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के आंकड़े निवेशकों का ध्यान खींचेंगे। इसके एक दिन बाद, 2 जुलाई को सर्विसेज पीएमआई, कंपोजिट पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी होंगे। इन सभी आंकड़ों का संयुक्त प्रभाव बाजार की धारणा पर गहरा असर डाल सकता है।
इस सप्ताह बाजार का प्रदर्शन
बीते सप्ताह सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की मामूली तेज़ी के साथ 24,056 पर स्थिर रहा। कच्चे तेल की कम कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों ने रुपये को भी मजबूती दी।
फेडरल रिज़र्व और वैश्विक संकेत
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को लेकर भी सतर्क बने हुए हैं। यदि फेड आगामी बैठकों में दरों में बदलाव करता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक पूँजी प्रवाह और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर पड़ेगा — जिसमें भारत भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले सप्ताह इन सभी कारकों का एक साथ सक्रिय होना बाजार में उच्च अस्थिरता की स्थिति बना सकता है।