मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, चांदी 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ी
सारांश
Key Takeaways
- मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में तेजी।
- सोना 0.67%25 और चांदी 2%25 से अधिक बढ़ी।
- निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
- भू-राजनीतिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
मुंबई, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं (सोना और चांदी) में एक बार फिर तेजी का रुख देखने को मिला। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और महंगाई की चिंताओं के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे शुरूआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
खबर लिखे जाने तक (सुबह लगभग 10:39 बजे) मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी वाला सोना 1,072 रुपये या 0.67 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,60,745 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, वहीं मई कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी वाली चांदी 5,333 रुपये यानी 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के साथ 2,67,524 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
पिछले कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 1,61,525 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि मई की एक्सपायरी वाली चांदी 2,65,560 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी।
वास्तव में, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच यह संघर्ष अब सातवें दिन में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हुई है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी मामूली रूप से बढ़कर 84.11 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोने में 12.60 डॉलर या 0.25%25 की बढ़ोतरी हुई और यह 5,153.91 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी ने कहा कि सोने में हाल की तेजी के बाद मुनाफा वसूली देखने को मिली, जिससे सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आई। इसके अतिरिक्त, यूएस डॉलर इंडेक्स में मजबूती और यूएसडीआईएनआर में ऑल टाइम हाई से आई गिरावट ने भी सोने की कीमतों पर दबाव डाला है। फिर भी, इस हल्की गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने में बड़ी गिरावट की संभावना सीमित बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञ ने बताया कि स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबर आई कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया। वहीं, ईरान ने क्षेत्र के कई देशों की ओर मिसाइल हमले जारी रखे और अहम ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। इन घटनाओं से लंबे समय तक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना पसंद कर रहे हैं। हालांकि बाजार में विभिन्न टिप्पणियों के कारण उतार-चढ़ाव भी बढ़ गया है। ईरान ने हाल ही में संकेत दिया है कि यदि अमेरिका के साथ अच्छा समझौता होता है, तो वह हमलों में कमी पर विचार कर सकता है।
इसी बीच कई मैक्रो आर्थिक कारक भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें फेडरल रिजर्व की संभावित नीतिगत ढील को लेकर बदलती उम्मीदें, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक जोखिम, और वैश्विक बाजारों में तरलता की स्थिति शामिल हैं। जोखिम वाले एसेट्स में समय-समय पर बिकवाली देखने को मिल रही है, जबकि ऊर्जा बाजार, खासकर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे बाजार में निवेश और जोखिम प्रबंधन की रणनीतियों पर असर पड़ रहा है।
एक्सपर्ट ने कहा कि आर्थिक आंकड़ों के संदर्भ में, अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, अमेरिका में शुरुआती बेरोजगारी दावे 2.13 लाख रहे, जो पिछले हफ्ते के बराबर हैं और बाजार के अनुमान 2.15 लाख से थोड़े बेहतर हैं। अब निवेशकों की नजर आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर है, जिनमें यूरोपीय संघ का जीडीपी डेटा, अमेरिका की रिटेल सेल्स, फैक्ट्री ऑर्डर्स और श्रम बाजार से जुड़े अन्य आंकड़े शामिल हैं।