मध्य-पूर्व के तनाव के बीच कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव, सोने-चांदी के दाम में गिरावट

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मध्य-पूर्व के तनाव के बीच कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव, सोने-चांदी के दाम में गिरावट

सारांश

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव आया। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के संघर्ष ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा, लेकिन बाद में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। जानिए इस परिदृश्य का पूरा विश्लेषण।

Key Takeaways

  • मध्य-पूर्व में तनाव के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव।
  • सोने की कीमत 1,61,165 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुँची।
  • चांदी की कीमत 2,62,451 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें बढ़ी।
  • विश्लेषकों का मानना है कि सोने की कीमतें 5,500 से 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच सकती हैं।

नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते गुरुवार को कीमती धातुओं (सोना और चांदी) में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और महंगाई की चिंताओं के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में उत्साहजनक वृद्धि हुई। हालांकि, इसके बाद इन दोनों धातुओं में गिरावट दर्ज की गई।

खबर लिखे जाने तक (दोपहर करीब 12.13 बजे) घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अप्रैल वायदा में इंट्रा-डे आधार पर 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,61,165 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया। वहीं, मई डिलीवरी वाला चांदी का फ्यूचर्स 1.17 प्रतिशत यानी 3,109 रुपये गिरकर 2,62,451 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।

सुबह के समय, एमसीएक्स पर सोने की कीमत 1,63,142 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई थी, जबकि चांदी 2,74,251 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई थी।

इसके पहले दिन में चांदी की कीमतों में 3.3 प्रतिशत तक उछाल आया था, जबकि सोना भी 1 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा था। हालाँकि, कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण कीमतों में थोड़ी नरमी आई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट चांदी 1.2 प्रतिशत बढ़कर 84.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गई, जबकि स्पॉट गोल्ड 0.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5,176.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गया।

वास्तव में, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब छठे दिन में पहुँच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आई है। इससे महंगाई का खतरा और भी बढ़ गया है। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने भी कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया है।

डॉलर इंडेक्स 0.22 प्रतिशत बढ़कर 98.99 पर पहुँच गया, जिससे विदेशी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए सोना-चांदी अपेक्षाकृत सस्ता हो गया। हाल ही में तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी के चलते सुरक्षित मुद्रा माने जाने वाले डॉलर की मांग में कमी आई है।

विश्लेषकों का मानना है कि चांदी की कीमतें फिलहाल 85 से 95 डॉलर प्रति औंस के बीच स्थिर रह सकती हैं और उसके बाद 100 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) बंद रहता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो सोना 5,500 से 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच सकता है।

ऊर्जा बाजार की दृष्टि से, अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती कारोबार में 2.43 प्रतिशत बढ़कर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईमेक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया, जिसमें कम से कम 80 लोगों की जान जाने की खबर है। इस घटना ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और संघर्ष के और फैलने की आशंका पैदा कर दी है।

विश्लेषकों के अनुसार, सोने के लिए 1,58,000 और 1,62,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1,75,000 और 1,80,000 रुपये का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस हो सकता है। वहीं, एमसीएक्स पर चांदी के लिए 2,50,000 और 2,70,000 रुपये सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 3,00,000 और 3,20,000 रुपये रेजिस्टेंस स्तर माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना टल सकती है। इससे अमेरिकी बॉंड यील्ड को सहारा मिल सकता है और निकट भविष्य में सोना-चांदी की तेजी कुछ हद तक सीमित रह सकती है।

Point of View

NationPress
08/03/2026

Frequently Asked Questions

कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली है।
क्या सोने और चांदी की कीमतें फिर से बढ़ेंगी?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आती है, तो सोने और चांदी की कीमतें बढ़ सकती हैं।
क्या अमेरिकी डॉलर की कमजोरी कीमती धातुओं को प्रभावित कर रही है?
हाँ, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया है, जिससे वे विदेशी निवेशकों के लिए सस्ते हो गए हैं।
क्या हालात और बिगड़ सकते हैं?
यदि तनाव बढ़ता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे बाजार में और अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
क्या तेल की कीमतों में वृद्धि का असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं, जिससे फेडरल रिजर्व की नीतियों पर असर पड़ेगा।
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