अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कीमती धातुओं में गिरावट, सोने की कीमत में 0.50 प्रतिशत से अधिक की कमी
सारांश
Key Takeaways
- सोने की कीमत में 0.68 प्रतिशत की गिरावट आई है।
- चांदी की कीमत भी अस्थायी रूप से बढ़ी, लेकिन फिर गिर गई।
- भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
- सोने की कीमतों में वैश्विक स्तर पर गिरावट आई है।
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सोने की मांग को प्रभावित कर रही हैं।
मुंबई, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-ईरान तनाव के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करते ही, कमोडिटी बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिला है। सोमवार को, सप्ताह के पहले कारोबारी दिन, शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में कमी आई। भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बावजूद, निवेशकों की धारणा कमजोर पाई गई, जिसने कीमती धातुओं पर दबाव डाला।
सोमवार की सुबह लगभग 10:43 बजे, एमसीएक्स पर अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 0.68 प्रतिशत यानी 982 रुपये गिरकर 1,43,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, मई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी में 0.34 प्रतिशत यानी 767 रुपये की बढ़त के साथ 2,28,721 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड होती दिखी। हालांकि, शुरुआती कारोबार में चांदी में भी गिरावट आई।
इससे पहले शुक्रवार को भी सोने और चांदी में हल्की कमी देखी गई थी, जब सोने की कीमत 1,44,401 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,27,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे पिछले सप्ताह की वृद्धि लगभग समाप्त हो गई। मध्य पूर्व में तनाव, ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियाँ और अमेरिकी सैन्य तैनाती में वृद्धि के बावजूद, निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) से कुछ हद तक हटा है। प्रारंभिक कारोबार में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 1.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
कमोडिटी एक्सचेंज (कॉमेक्स) में भी सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा। सोमवार को, सोना 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 4,447.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, हालाँकि निचले स्तरों पर खरीदारी के कारण इसमें कुछ सुधार हुआ और कीमतें फिर से 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आस-पास पहुंच गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंताओं ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। इसके साथ ही, अमेरिका के फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना भी सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
यह ध्यान देने योग्य है कि युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने का आकर्षण इस दौरान कमजोर पड़ा है और यह शेयर बाजार की चाल के साथ तालमेल बिठाता नजर आया है।
वहीं, केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद में भी बदलाव देखने को मिला है। पिछले कुछ वर्षों में, जहां सोने की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण केंद्रीय बैंकों की खरीद रही, हालिया घटनाक्रम में तुर्की जैसे देशों ने अपने सोने के भंडार को बेचना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, तुर्की ने युद्ध के शुरुआती दो हफ्तों में लगभग 60 टन सोना, जिसकी कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक है, बेच दिया है।
इसके अतिरिक्त, कई देश जो सोने के बड़े खरीदार हैं, वे ऊर्जा आयातक भी हैं। ऐसे में, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से उनके पास सोना खरीदने के लिए डॉलर की उपलब्धता कम हो जाती है, जिसका असर मांग पर पड़ता है।