मध्य-पूर्व के तनाव के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट

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मध्य-पूर्व के तनाव के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट

सारांश

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को जन्म दिया है। निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि ने सोने और चांदी के दामों में प्रारंभिक वृद्धि की, लेकिन बाद में गिरावट आई। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है।

Key Takeaways

  • मध्य-पूर्व के तनाव ने कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव पैदा किया है।
  • सोने और चांदी की कीमतों में प्रारंभिक वृद्धि के बावजूद गिरावट आई।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,176.69 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।
  • विश्लेषकों के अनुसार, चांदी की कीमतें 100 डॉलर तक जा सकती हैं।
  • बाजार की स्थिति पर नजर रखना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण, गुरुवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं (सोना और चांदी) में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव तथा महंगाई की चिंता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ दिया, जिससे प्रारंभिक कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि हुई। हालांकि, बाद में इन दोनों धातुओं में गिरावट आई।

खबर लिखे जाने तक (दोपहर लगभग 12:13 बजे) घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अप्रैल वायदा में इंट्रा-डे आधार पर 0.22 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 1,61,165 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, मई डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 1.17 प्रतिशत यानी 3,109 रुपए गिरकर 2,62,451 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया।

सुबह के समय, एमसीएक्स पर सोना 1,63,142 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर था, जबकि चांदी 2,74,251 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थी।

दिन के पहले हिस्से में, चांदी की कीमतों में 3.3 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि सोना भी 1 प्रतिशत से अधिक बढ़ा था। हालांकि, बाद में कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण कीमतों में थोड़ी नरमी आई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, स्पॉट सिल्वर 1.2 प्रतिशत बढ़कर 84.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि स्पॉट गोल्ड 0.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5,176.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष छठे दिन में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है और महंगाई बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने भी कीमती धातुओं की कीमतों को समर्थन दिया है।

डॉलर इंडेक्स 0.22 प्रतिशत बढ़कर 98.99 पर पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए सोना-चांदी अपेक्षाकृत सस्ता हो गया। हाल ही में तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी के कारण सुरक्षित मुद्रा माने जाने वाले डॉलर की मांग में कमी आई है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि चांदी की कीमतें फिलहाल 85 से 95 डॉलर प्रति औंस के बीच स्थिर रह सकती हैं और इसके बाद 100 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ सकती हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो सोना 5,500 से 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

ऊर्जा बाजार में, अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती कारोबार में 2.43 प्रतिशत बढ़कर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईमेक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया, जिसमें कम से कम 80 लोगों की मौत की खबर है। इस घटना ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और संघर्ष के और फैलने की आशंका पैदा कर दी है।

विश्लेषकों के मुताबिक, सोने के लिए 1,58,000 और 1,62,000 रुपए का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1,75,000 और 1,80,000 रुपए का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस हो सकता है। एमसीएक्स पर चांदी के लिए 2,50,000 और 2,70,000 रुपए सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 3,00,000 और 3,20,000 रुपए रेजिस्टेंस स्तर माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना टल सकती है। इससे अमेरिकी बॉंड यील्ड को समर्थन मिल सकता है और निकट भविष्य में सोना-चांदी की तेजी कुछ हद तक सीमित रह सकती है।

Point of View

जिससे सोने और चांदी की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। यह स्थिति न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

क्यों कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है?
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
सोने और चांदी की कीमतें कब तक बढ़ सकती हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि चांदी की कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती हैं यदि स्थिति और बिगड़ती है।
क्या इस तनाव का वैश्विक बाजार पर असर पड़ेगा?
हां, यह तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को प्रभावित कर सकता है।
क्या निवेशकों को सोने और चांदी में निवेश करना चाहिए?
वर्तमान परिस्थितियों में सतर्क रहना और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
क्या सोने और चांदी के दामों में और गिरावट हो सकती है?
यदि स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो और गिरावट की संभावना है।
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